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दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में गिरी घरों की सेल, इन शहरों में लोगों ने खूब खरीदी प्रॉपर्टी

देश के 8 बड़े शहरों में घरों की बिक्री 12% तक गिरी, जिसमें मुंबई और दिल्ली-एनसीआर के बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए. इसके उलट दक्षिण भारत के शहरों में जबरदस्त तेजी रही, जहां अकेले चेन्नई में हाउसिंग सेल्स में 55% का बंपर उछाल आया. नई सप्लाई भी 2021 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

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2025 में क्यों कम हुई घरों की सप्लाई (Photo-ITG)
2025 में क्यों कम हुई घरों की सप्लाई (Photo-ITG)

देश के रियल एस्टेट सेक्टर में दक्षिण भारत के प्रमुख शहर निवेश और भरोसे के नए केंद्र बनकर उभरे हैं. बढ़ती मांग और बेहतर सप्लाई के दम पर पिछले साल बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई ने हाउसिंग सेल्स में शानदार प्रदर्शन किया है. 'प्रॉपटाइगर' (PropTiger) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन तीनों महानगरों में घरों की बिक्री में सामूहिक रूप से 15 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है, जो इस क्षेत्र में खरीदारों के बढ़ते रुझान की ओर इशारा करता है.

प्रॉपटाइगर के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल इन तीनों दक्षिण भारतीय शहरों में कुल 1,33,120 से अधिक हाउसिंग यूनिट्स की बिक्री हुई. यह आंकड़ा 2024 की तुलना में काफी बेहतर है, जो यह साबित करता है कि बढ़ती ब्याज दरों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय प्रॉपर्टी बाजार, खासकर साउथ इंडिया में, मजबूती से टिका हुआ है.

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इन शहरों में 2025 में कम बिके घर

देश के प्रमुख आठ शहरों में आवासीय संपत्तियों की बिक्री के लिए साल 2025 मिला-जुला रहा है. आंकड़ों के मुताबिक, बीते कैलेंडर वर्ष में घरों की कुल बिक्री में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है. साल 2024 में जहां कुल 4,36,992 यूनिट्स की बिक्री हुई थी, वहीं 2025 में यह आंकड़ा सिमटकर 3,86,365 यूनिट्स पर आ गया. यह डेटा स्पष्ट करता है कि पिछले साल की तुलना में इस साल खरीदारों ने थोड़े धीमे कदम बढ़ाए हैं.

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बाजार के इस रुख का असर अलग-अलग शहरों पर अलग तरह से पड़ा है. मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR), दिल्ली-एनसीआर, पुणे और अहमदाबाद जैसे बड़े रियल एस्टेट मार्केट्स में आवासीय संपत्तियों की मांग में गिरावट देखी गई, जिससे इन क्षेत्रों की कुल बिक्री प्रभावित हुई. इसके उलट, दक्षिण भारत के प्रमुख केंद्रों और पूर्वी भारत में स्थिति काफी सकारात्मक रही. बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता में न केवल खरीदार सक्रिय रहे, बल्कि यहां घरों की बिक्री में पिछले साल के मुकाबले अच्छी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है.

बाजार के जानकारों का मानना है कि 2025 में मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी, बल्कि खरीदार अब काफी सोच-समझकर और गहराई से जांच-परख करने के बाद ही खरीदारी का फैसला ले रहे हैं. दूसरी ओर, डेवलपर्स ने भी बाजार की स्थिति को देखते हुए सप्लाई पर नियंत्रण रखा, जिससे बाजार में बिना बिके घरों का बोझ नहीं बढ़ा. यही वजह है कि बिक्री की रफ्तार कम होने के बावजूद प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट नहीं आई और वे मजबूती के साथ स्थिर बनी रहीं. 

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दक्षिण भारत का दबदबा

दक्षिण भारत के तीन प्रमुख शहरों बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई ने शानदार प्रदर्शन किया है. बेंगलुरु में घरों की बिक्री 13 प्रतिशत बढ़कर 54,414 यूनिट्स तक पहुंच गई, जो 2024 में 48,272 यूनिट्स थी. सबसे चौंकाने वाले नतीजे चेन्नई से आए हैं, जहां बिक्री में 55 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोत्तरी दर्ज की गई (16,044 से बढ़कर 24,892 यूनिट्स)।

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हैदराबाद में भी 6 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और कुल 54,271 घर बिके, इन तीनों दक्षिणी शहरों ने मिलकर कुल 1,33,577 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल के मुकाबले 15.5 प्रतिशत अधिक है, कोलकाता में भी सकारात्मक रुझान रहा और बिक्री 12 प्रतिशत बढ़कर 15,172 यूनिट्स पर पहुंच गई, देश के सबसे बड़े मार्केट मुंबई में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई, यहां बिक्री 26 प्रतिशत गिरकर 1,05,595 यूनिट्स रह गई, जो 2024 में 1,43,487 थी. दिल्ली-एनसीआर में भी मांग में 13 प्रतिशत की कमी आई और यहां केवल 35,711 यूनिट्स की बिक्री हुई. पुणे और अहमदाबाद में भी बिक्री में 12-12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सप्लाई में कमी: 2021 के बाद सबसे निचला स्तर

रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है कि बिल्डरों ने नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने में सावधानी बरती है. साल 2025 में आठ प्रमुख शहरों में नई हाउसिंग सप्लाई 6 प्रतिशत घटकर 3,61,096 यूनिट्स रह गई. प्रॉपटाइगर के अनुसार, यह 2021 के बाद से अब तक की सबसे कम वार्षिक सप्लाई है. सप्लाई में इस कमी का मुख्य उद्देश्य बाजार में पुराने स्टॉक (Inventory) को खत्म करना और कीमतों को स्थिर बनाए रखना है.

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