लखनऊ, जो कभी अपनी 'नवाबी तहजीब' और नजाकत के लिए जाना जाता था, आज आधुनिक शहरी विकास की दौड़ में सबसे आगे खड़ा है. अपनी सदियों पुरानी सांस्कृतिक जड़ों को सहेजे हुए यह शहर अब बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है. शानदार एक्सप्रेसवे, बेहतर मेट्रो कनेक्टिविटी और नियोजित शहरी विस्तार ने लखनऊ के रियल एस्टेट सेक्टर को पुरानी सीमाओं से बाहर निकालकर एक ग्लोबल पहचान दी है.
प्रॉपर्टी कंसल्टेंट एनारॉक (ANAROCK) के आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 की पहली छमाही में जमीन के डील ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, जो साल 2024 के कुल आंकड़ों को भी पीछे छोड़ चुका है, यह रुझान रियल एस्टेट सेक्टर में बड़े डेवलपर्स के अटूट भरोसे को दर्शाता है. आंकड़े बताते हैं कि अब निवेशकों का ध्यान बड़े महानगरों से हटकर लखनऊ जैसे उभरते केंद्रों की ओर बढ़ रहा है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में इस अवधि में कुल 1,907 एकड़ ज़मीन के सौदे दर्ज किए गए. वहीं टियर-1 शहर में केवल 991 एकड़ भूमि का ही लेनदेन हुआ.
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क्यों लखनऊ बना निवेशकों की पसंद?
लखनऊ ही नहीं यूपी के दूसरे शहर जैसे अयोध्या, प्रयागराजस वृंदावन जैसे धार्मिक शहरों में भी रियल एस्टेट सेक्टर तेजी से विकास कर रहा है. लखनऊ के विकास की धारा अब केवल पुराने और पारंपरिक इलाकों तक सीमित नहीं रह गई है. शहर का विस्तार अब नए क्षितिज तलाश रहा है, जहां फैज़ाबाद रोड, सुल्तानपुर रोड, शहीद पथ और आउटर रिंग रोड जैसे इलाके आधुनिक विकास के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं.
इन क्षेत्रों की सबसे बड़ी विशेषता इनका 'आत्मनिर्भर शहरी जोन' के रूप में विकसित होना है. यहां केवल रिहायशी कॉलोनियां ही नहीं बन रही हैं, बल्कि जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए विश्वस्तरीय स्कूल, अत्याधुनिक अस्पताल, रिटेल हब और मनोरंजन के केंद्र भी एक साथ तैयार हो रहे हैं. आउटर रिंग रोड और शहीद पथ जैसी बेहतर कनेक्टिविटी ने इन इलाकों को निवेश के लिए सबसे आकर्षक बना दिया है. आज ये क्षेत्र एक ऐसी लाइफस्टाइल पेश कर रहे हैं, जहां लोगों को अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए मुख्य शहर पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. यह बदलाव लखनऊ को एक 'कॉम्पैक्ट' शहर से बदलकर एक आधुनिक 'मेगा सिटी' की ओर ले जा रहा है.
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क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
ओमैक्स ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित गोयल कहते हैं- 'लखनऊ अब सिर्फ पुराने शहर तक ही सीमित नहीं रह गया है. यहां बने शानदार एक्सप्रेसवे ने शहर की किस्मत बदल दी है. आगरा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के बाद, अब गंगा एक्सप्रेसवे और कानपुर-लखनऊ कॉरिडोर जैसी सड़कों ने आने-जाने को बहुत आसान बना दिया है. इसी वजह से आउटर रिंग रोड और रायबरेली रोड जैसे इलाकों में लोग तेज़ी से जमीन और घर खरीद रहे हैं. लोग यहां सिर्फ छोटे-मोटे मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के भरोसे के साथ निवेश कर रहे हैं. आज का लखनऊ एक प्लानिंग के साथ आगे बढ़ रहा है, जहां अच्छी सड़कें हैं, आधुनिक रहन-सहन है और कमाई के नए मौके भी हैं. यही कारण है कि लखनऊ आज पूरे उत्तर भारत का सबसे मजबूत प्रॉपर्टी बाज़ार बन चुका है.'
हाइटेक हो गया है लखनऊ
सड़कों और सुविधाओं के मामले में लखनऊ अब बहुत हाई-टेक हो गया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के शहरों से लखनऊ आना-जाना बेहद आसान और तेज हो गया है. लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे इस इलाके के व्यापार और फैक्ट्रियों के लिए रोजगार के नए मौके लेकर आएगा. सिर्फ बाहर ही नहीं, शहर के अंदर भी मेट्रो के आने से आम जनता का सफर काफी आरामदायक हो गया है और ट्रैफिक की झंझट कम हुई है.
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मिगसन ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर यश मिगलानी का कहना है - 'लखनऊ में असली बदलाव सिर्फ नई सड़कों का बनना नहीं है, बल्कि लोगों की सोच का बदलना है, जो इलाके कल तक शहर के बाहर माने जाते थे, जैसे सुल्तानपुर रोड, फैज़ाबाद रोड और आउटर रिंग रोड, वे अब लोगों के लिए पसंदीदा 'नया लखनऊ' बन गए हैं. लोग यहां सिर्फ पैसा लगाकर जल्दी मुनाफा कमाने के लिए नहीं आ रहे, बल्कि अपना घर बसाने और भविष्य के सुरक्षित निवेश के लिए ज़मीनें खरीद रहे हैं. इन इलाकों में जिस तरह से स्कूल और बाजार विकसित हो रहे हैं, उससे यह साफ है कि आने वाले 10 सालों में लखनऊ की असली पहचान और कीमत इन्हीं रास्तों से तय होगी.'

अग्रशील इंफ्राटेक की सीईओ प्रेक्षा सिंह कहती हैं- एक्सप्रेसवे की वजह से लखनऊ का विकास तेजी से हो रहा है. अच्छी कनेक्टिविटी, स्कूलों और अस्पतालों के निर्माण की वजह से शहीद पथ और सुल्तानपुर रोड जैसे इलाके लोगों की पसंदीदा ठिकाना बन रहे हैं.'
साफ है कि लखनऊ अब अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ एक आधुनिक 'मेगा सिटी' के रूप में उभर रहा है. एक्सप्रेसवे का जाल, मेट्रो का विस्तार और आत्मनिर्भर टाउनशिप ने यहां के रियल एस्टेट को नई संजीवनी दी है, जहां निवेश अब केवल मुनाफे के लिए नहीं बल्कि एक बेहतर जीवनशैली के लिए हो रहा है. टियर-2 शहरों की रेस में लखनऊ का सबसे आगे निकलना यह दर्शाता है कि यह शहर उत्तर भारत का नया आर्थिक पावरहाउस बनने की दिशा में है.
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