भारत में अपना घर खरीदना जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होता है. अक्सर लोग अपनी जमा-पूंजी का एक बड़ा हिस्सा प्रॉपर्टी खरीदने में लगा देते हैं, लेकिन असली परीक्षा तब शुरू होती है जब उस मकान को एक खूबसूरत आशियाने में बदलने की बारी आती है. इंटीरियर डिजाइनिंग को लेकर अक्सर यह धारणा रहती है कि इसमें बहुत पैसा खर्च होता है. लेकिन क्या ये हकीकत है.
आजतक रेडियो के शो 'प्रॉपर्टी से फायदा' में इंटीरियर एक्सपर्ट मनीष सेहरावत ने स्पष्ट किया कि इंटीरियर का सीधा संबंध महंगे सामान से नहीं, बल्कि सही समझ और संतुलन से है.
अक्सर लोग सवाल करते हैं कि क्या इंटीरियर पर खर्च करना वाकई जरूरी है. मनीष कहते हैं - 'जिस तरह एक अच्छी पर्सनालिटी वाले इंसान की पहचान उसके कपड़ों और एक्सेसरीज से और निखर जाती है, ठीक वैसे ही एक खाली मकान की आत्मा उसका इंटीरियर होता है. लोग आपके घर को देखकर आपकी पसंद और आपके रहन-सहन का अंदाजा लगाते हैं. इंटीरियर केवल दिखावे के लिए नहीं है, बल्कि यह उस जगह को रहने लायक बनाता है.'
घर को 'खिचड़ी' बनने से कैसे रोकें?
अक्सर देखा जाता है कि लोग इंटरनेट या दूसरों के घरों से प्रेरणा लेकर बिना सोचे-समझे चीजें खरीद लेते हैं. नतीजा यह होता है कि घर का एक कोना अच्छा लगता है, तो दूसरा हिस्सा भारी और क्लटर्ड नजर आता है. इस भ्रम या 'खिचड़ी' से बचने के लिए मनीष 'विजुअल प्लानिंग' की सलाह देते हैं. उनका कहना है कि आप अपने कमरे की चारों दीवारों के लिए अलग-अलग फोटो चुनें, उन्हें दीवार पर चिपकाएं और एक बार विजन क्लियर हो जाने के बाद इंटरनेट से दूरी बना लें. बार-बार नए आइडिया देखने से भ्रम बढ़ता है और निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है.
घर को सुंदर दिखाने का सबसे बड़ा मंत्र है 'जगह को सांस लेने देना'. मनीष के अनुसार, किसी भी कमरे को सजाते समय 60:40 के अनुपात का पालन करना चाहिए. इसका अर्थ है कि कमरे का 60% हिस्सा खाली या न्यूट्रल होना चाहिए और केवल 40% हिस्से में ही फर्नीचर या सजावटी सामान होना चाहिए. जब आप घर को सामान से पूरी तरह भर देते हैं, तो वह छोटा और घुटन भरा लगने लगता है. यह रेशियो आपके घर को एक प्रोफेशनल और 'ब्रीदिंग' लुक देता है.
रंगों का विज्ञान: 70:30:10 का नियम
अक्सर लोग रंगों के चुनाव में गलती कर बैठते हैं, जिससे घर आंखों में चुभने लगता है. इसे संतुलित करने के लिए '70:30:10' का नियम सबसे कारगर है. आपके कमरे का 70% हिस्सा मुख्य रंग होना चाहिए, जो हल्का और शांत हो. 30% हिस्सा उस रंग का थोड़ा गहरा शेड हो सकता है. सबसे महत्वपूर्ण है आखिरी 10%, जिसे 'पॉप-अप कलर' कहते हैं. यह कोई भी ब्राइट रंग (जैसे गहरा लाल या पीला) हो सकता है जो कमरे में जान फूंक देता है. यदि आप पॉप-अप कलर्स को 10% से ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो वह आपको चिड़चिड़ा बना सकता है.
इंटीरियर डिजाइनिंग का उद्देश्य एक ऐसा वातावरण तैयार करना है जहां आप दिनभर की थकान के बाद सुकून महसूस कर सकें. चाहे वह ऑफिस की लड़ाई हो या बाहर का तनाव, घर में घुसते ही आपको शांति मिलनी चाहिए. यदि आपने अपनी पर्सनालिटी के हिसाब से सही रंगों और स्पेस का चुनाव किया है, तो आपका घर न केवल बजट में बनेगा, बल्कि वह आपकी पहचान का एक खूबसूरत हिस्सा भी बन जाएगा.