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AI से 'सुपर सेफ' बन रहीं इमारतें, न आग का डर, न पानी-बिजली की बर्बादी!

अब ऊंची इमारतें सिर्फ खड़ी नहीं रहतीं, सोचती भी हैं. AI और स्मार्ट टेक्नोलॉजी की मदद से शहरों की बिल्डिंग्स 'सुपर सेफ' बन रही हैं. यह तकनीक न केवल सुरक्षा का ध्यान रखती है, बल्कि बिजली-पानी की बर्बादी भी रोकती है. कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम.

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AI की मदद से अब ऊंची इमारतें और भी मजबूत और स्मार्ट बन रही हैं (Photo: Pexels)
AI की मदद से अब ऊंची इमारतें और भी मजबूत और स्मार्ट बन रही हैं (Photo: Pexels)

सोचिए, आप एक ऐसी ऊंची इमारत में घुसते हैं जो आपको अंदर आते ही पहचान लेती है. यह कोई ईंट-पत्थर का बेजान ढांचा नहीं है, बल्कि इसके पास अपना एक 'डिजिटल दिमाग' है, जो हर वक्त एक्टिव रहता है. हम सालों से सुनते आ रहे हैं कि टेक्नोलॉजी बिजनेस करने के तरीके बदल रही है, लेकिन अब यही तकनीक उन शहरों की शक्ल बदल रही है जहां हम रहते हैं. आज की ऊंची इमारतें सिर्फ चार दीवारों और एक छत तक सीमित नहीं रह गई हैं. डिजिटल क्रांति ने इन्हें 'आंख और कान' दे दिए हैं. देखा जाए तो स्मार्ट बिल्डिंग का बाजार इतनी तेजी से बढ़ा है कि इसने पूरी दुनिया में रहने और घर बनाने के मायने ही बदल दिए हैं.

इस पूरे बदलाव का सबसे बड़ा खिलाड़ी है 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' यानी AI. आज हर तरफ इंटरनेट और वायरलेस का जमाना है, जिसकी वजह से बिल्डिंग के हर कोने से ढेर सारा डेटा निकलता है. AI इसी डेटा का इस्तेमाल कर ऊंची इमारतों को जिंदा और 'सुपर सेफ' बना रहा है.

यह तकनीक न केवल बिल्डिंग को सुरक्षा देती है, बल्कि पानी बचाने और बिजली की बर्बादी रोकने में भी बड़ा रोल निभा रही है. AI और स्मार्ट बिल्डिंग का यह मेल कामकाज को इतना आसान बना देता है कि मैनेजर से लेकर रहने वालों तक, हर किसी की टेंशन खत्म हो जाती है. अब इमारतें सिर्फ हमें छत नहीं देतीं, बल्कि एक बड़े-बुजुर्ग की तरह हमारा ख्याल भी रखती हैं. तो चलिए जानते हैं कि आखिर AI ऊंची इमारतों की किस्मत कैसे बदल रहा है.

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भविष्य की इमारतों का नया अवतार

स्मार्ट बिल्डिंग शब्द आजकल खूब सुनने को मिलता है, लेकिन इसका असली मतलब इसके काम करने के तरीके में है. आसान शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी ऑटोमेटिक बिल्डिंग है, जो अपने आसपास होने वाली हर एक्टिविटी को समझती है और उस पर तुरंत जवाब देती है. पुराने समय में सुरक्षा का मतलब सिर्फ एक चौकीदार या कोने में लगा एक कैमरा होता था. लेकिन आज की स्मार्ट इमारतों में सेंसर का एक पूरा जाल बिछा होता है. ये सेंसर कमरे के तापमान से लेकर हवा में ताजगी कितनी है, यह सब मापते हैं और पूरी बिल्डिंग को आपस में जोड़ देते हैं. इससे बिल्डिंग मैनेजर को हर छोटी से छोटी चीज की खबर रहती है, जिससे सुरक्षा का लेवल कई गुना बढ़ जाता है.

पानी की बर्बादी पर AI की कड़ी नजर

हम अपना ज्यादातर समय घरों या ऑफिस के अंदर बिताते हैं और इस दौरान पानी का खूब इस्तेमाल होता है. अक्सर हमें पता भी नहीं चलता कि अनजाने में हम कितना पानी बर्बाद कर रहे हैं. यहां AI एक स्मार्ट मैनेजर की तरह काम आता है. पाइपों और टैंकों में लगे छोटे-छोटे सेंसर AI को लगातार जानकारी भेजते रहते हैं. अगर कहीं भी पानी का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा होता है या कोई लीकेज होती है, तो AI सिस्टम तुरंत मैसेज भेज देता है. यह तकनीक न केवल पानी बचाती है बल्कि भविष्य में होने वाली किल्लत को रोकने का एक बढ़िया तरीका भी है.

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खराबी आने से पहले ही मिल जाएगा समाधान

ऊंची इमारतों में सबसे बड़ी चिंता यह होती है कि मशीनें और सिस्टम सही से काम कर रहे हैं या नहीं. यहां AI एक 'भविष्य बताने वाले' की तरह काम करता है. उदाहरण के लिए, बिल्डिंग की लिफ्ट में लगे सेंसर उसके चलने के ढंग को लगातार चेक करते रहते हैं. AI इस जानकारी से पहले ही भांप लेता है कि लिफ्ट में कोई गड़बड़ी आने वाली है या वह खराब होने वाली है. इससे पहले कि कोई बड़ा हादसा हो या लिफ्ट बीच में रुके, उसे ठीक कर दिया जाता है. यही नहीं, AI पूरी बिल्डिंग की बिजली सप्लाई में आने वाली छोटी से छोटी गड़बड़ी को भी पकड़ लेता है.

पार्किंग की टेंशन से पूरी आजादी

आजकल किसी भी बड़ी बिल्डिंग या मॉल में पार्किंग ढूंढना सबसे बड़ा सिरदर्द है. घंटों तक खाली जगह तलाशने में न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि तेल भी फुकता है. स्मार्ट बिल्डिंग में AI इस समस्या को जड़ से खत्म कर देता है. जमीन में लगे सेंसर और कैमरे पार्किंग की पूरी जानकारी जुटाते हैं और AI इसे आपके स्मार्टफोन ऐप पर भेज देता है. आप अपनी स्क्रीन पर बस एक क्लिक करके देख सकते हैं कि कौन सी जगह खाली है और ऐप आपको सीधे उस जगह तक ले भी जाएगा. यह सुविधा न केवल आपका अनुभव बेहतर बनाती है बल्कि समय की भी बड़ी बचत करती है.

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इंजीनियरों के लिए काम हुआ आसान

AI सिर्फ बनी-बनाई इमारतों की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें बनाने के तरीके को भी बदल रहा है. अब इंजीनियर ऐसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जो हजारों पुराने डिजाइनों को देखकर बिल्कुल नए और अनोखे नक्शे तैयार कर देते हैं. यह तकनीक कुदरत से जुड़ी ऐसी आकृतियों का सुझाव देती है जो देखने में सुंदर होने के साथ-साथ बेहद मजबूत भी होती हैं. इंसानी दिमाग और मशीन की इस होशियारी ने बिल्डिंग बनाने की दुनिया में नए रास्ते खोल दिए हैं. अब ऐसी इमारतें बनाना मुमकिन हो गया है जिनके बारे में पहले सिर्फ सोचा जा सकता था.

किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में समय और पैसा सबसे ज्यादा कीमती होता है. AI नक्शों और कागजों की ऐसी बारीकी से जांच करता है कि इंसान की नजर से छूट जाने वाली छोटी गलतियां भी पकड़ में आ जाती हैं. इससे काम के दौरान होने वाली देरी और दोबारा काम करने का खर्चा बच जाता है. इसके अलावा, AI यह भी पक्का करता है कि सीमेंट, सरिया या दूसरा सामान बर्बाद न हो. यह तकनीक प्रोजेक्ट की रफ्तार पर नजर रखती है और आने वाली रुकावटों का पहले ही अंदाजा लगा लेती है. इससे काम बजट के अंदर और सही समय पर पूरा होता है.

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