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गंगा एक्सप्रेसवे का काउंटडाउन, यूपी के इन जिलों में जमीन के दाम छुएंगे आसमान

गंगा एक्सप्रेसवे न केवल यात्रियों का समय बचाएगा, बल्कि यह रियल एस्टेट और उद्योग जगत के लिए एक 'मनी मेकर' साबित होने वाला है, अगर आप लंबी अवधि के निवेश की सोच रहे हैं, तो गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे के जिले वर्तमान में सबसे आकर्षक विकल्प बनकर उभरे हैं.

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जल्द शुरू होने वाला है गंगा एक्स्प्रेसवे (सांकेतिक फोटो: Pexel)
जल्द शुरू होने वाला है गंगा एक्स्प्रेसवे (सांकेतिक फोटो: Pexel)

गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है. 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे न केवल मेरठ और प्रयागराज की दूरी को मात्र 6 से 8 घंटे में समेट देगा, बल्कि उत्तर प्रदेश के आर्थिक नक्शे को भी पूरी तरह बदलने वाला है. जैसे-जैसे इसके उद्घाटन की तारीख नजदीक आ रही है, इसके किनारे बसे शहरों के रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ी हलचल देखी जा रही है.

गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से सीधे जोड़ने वाली सबसे बड़ी लाइफलाइन बनने जा रही है. मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांदू गांव तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों से होकर गुजरेगा. इसमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज शामिल हैं. इस हाई-स्पीड कनेक्टिविटी ने इन क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की संभावनाओं को पंख लगा दिए हैं.

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रियल एस्टेट मार्केट में भारी उछाल का अनुमान

किसी भी क्षेत्र का विकास वहां की सड़कों से तय होता है. गंगा एक्सप्रेसवे के कारण उन शहरों में भी निवेश बढ़ रहा है जिन्हें पहले 'स्लीपर टाउन' माना जाता था. रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के 10-15 किलोमीटर के दायरे में आने वाली जमीनों की कीमतों में पिछले दो वर्षों में 40% से 60% तक का उछाल आया है. खासकर जहां एक्सप्रेसवे के प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं, वहां कमर्शियल और आवासीय संपत्तियों की मांग सबसे अधिक है.

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उत्तर प्रदेश सरकार की योजना एक्सप्रेसवे के किनारे केवल सड़क बनाना ही नहीं, बल्कि बड़े औद्योगिक क्लस्टर विकसित करना भी है. अमरोहा, बदायूं और हरदोई जैसे जिलों में औद्योगिक गलियारे (Industrial Corridors) प्रस्तावित हैं. जैसे ही यहां फैक्ट्रियां और डेटा सेंटर स्थापित होंगे, स्थानीय स्तर पर रोजगार के लाखों अवसर पैदा होंगे. इसी उम्मीद में निवेशकों ने अभी से औद्योगिक भूमि और उसके आसपास के आवासीय प्लॉट्स को खरीदना शुरू कर दिया है, जिससे कीमतों में भारी तेजी देखी जा रही है.

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एक्सप्रेसवे के किनारे वेयरहाउसिंग की अपार संभावनाएं हैं. ई-कॉमर्स कंपनियां और बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स अब हापुड़ और बुलंदशहर जैसे जिलों की ओर रुख कर रही हैं क्योंकि यहां से दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ दोनों तक पहुंच बेहद आसान हो जाएगी. इस क्षेत्र में कृषि आधारित उद्योगों (Food Processing Units) को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे कृषि योग्य भूमि के दाम भी कमर्शियल दरों पर बिकने लगे हैं.

निवेशकों के लिए एक्सपर्ट सलाह

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि निवेश के लिए उन इलाकों को प्राथमिकता दें, जो एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज पॉइंट के पास हैं. मेरठ का बाहरी इलाका, अमरोहा का औद्योगिक क्षेत्र और प्रयागराज के प्रवेश मार्ग निवेश के लिए सबसे सुरक्षित और फायदेमंद माने जा रहे हैं. हालांकि, किसी भी डील से पहले UPEIDA की गाइडलाइंस और जमीन के मालिकाना हक की जांच करना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में किसी कानूनी पचड़े से बचा जा सके.

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