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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, उत्तर भारत के रियल एस्टेट का 'गेम चेंजर', इन शहरों में बरसेगा पैसा!

12,000 करोड़ की लागत से तैयार हुआ 'दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर' न केवल देवभूमि की दूरी को घटाकर ढाई घंटे करने जा रहा है, बल्कि यह उत्तर भारत के रियल एस्टेट मैप पर निवेश के 'गोल्डन गेट' भी खोल रहा है

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दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे के किनारे निवेश करने का यही है सही समय (Photo-ITG)
दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे के किनारे निवेश करने का यही है सही समय (Photo-ITG)

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे महज एक रास्ता नहीं, बल्कि उत्तर भारत के रियल एस्टेट मैप पर सुनहरे भविष्य की नई सौगात बनकर आया है. 12,000 करोड़ की लागत से बना यह 'ग्रोथ कॉरिडोर' अब दिल्ली के पड़ोस में निवेश और सुकून के नए 'हॉटस्पॉट्स' तैयार कर रहा है.

जहां एक ओर हरिद्वार अपनी आध्यात्मिक पहचान से आगे बढ़कर एक प्रीमियम आवासीय केंद्र के रूप में उभर रहा है, वहीं बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे शहर निवेशकों के लिए 'प्रॉफिट जोन' बन गए हैं.  

विशेषज्ञ मान रहे हैं कि अगले दो वर्षों में यहां संपत्तियों की कीमतों में 25% तक का उछाल आ सकता है. लेकिन यह तेजी सिर्फ मकानों तक सीमित नहीं है. होटल, आईटी पार्क्स और हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स की आहट इस पूरे गलियारे को एक डायनामिक इकोनॉमिक बेल्ट में तब्दील कर रही है, जानते हैं, रियल एस्टेट जगत के एक्सपर्ट्स इस बदलाव को किस नजरिए से देख रहे हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

प्रॉपर्टी मास्टर के को-फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर गोल्डी अरोड़ा कहते हैं-  'आज के दौर में निवेशक सिर्फ प्रॉपर्टी नहीं बल्कि वह उस लोकेशन की भविष्य की ग्रोथ को समझ रहा है. यह एक्सप्रेसवे आने वाले समय में रियल एस्टेट की तस्वीर बदलने वाला है. बागपत, शामली और सहारनपुर में अभी प्रॉपर्टी के दाम बजट में हैं, पर बेहतर रास्तों के कारण यहां मांग तेजी से बढ़ेगी, जो लोग प्लॉट या फार्महाउस में पैसा लगाना चाहते हैं, उनके लिए यह सही समय है. आज का छोटा निवेश आने वाले 4-5 सालों में एक बड़े मुनाफे में बदल सकता है.'

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हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते हैं- 'रियल एस्टेट मार्केट में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है लोग अब शुद्ध हवा और सुकून की तलाश में इन शहरों को अपना मुख्य ठिकाना बनाने के लिए तैयार हैं. बेहतर कनेक्टिविटी ने हरिद्वार जैसे शहरों के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल दिए हैं. अब यहां सिर्फ श्रद्धालु ही नहीं, बल्कि घर खरीदने के इच्छुक निवेशक और 'वीकेंड ट्रैवलर्स' भी बड़ी संख्या में आकर्षित हो रहे हैं. यह बढ़ता रुझान न केवल प्रीमियम हाउसिंग की मांग बढ़ाएगा, बल्कि हरिद्वार को एक प्रमुख 'आवासीय केंद्र' के रूप में भी स्थापित करेगा. हरिद्वार हमेशा से ही एक प्रमुख आध्यात्मिक स्थल रहा है, लेकिन बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब यह एक उभरते हुए आवासीय और निवेश केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बनाएगा.'

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मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी इस एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत की आर्थिकी के लिए मील का पत्थर मान रहे हैं. उनका कहना है 'बेहतर सड़क संपर्क से बागपत और सहारनपुर जैसे टियर-2 शहरों में निवेश का माहौल बनेगा. खास तौर पर मिड-सेगमेंट हाउसिंग में आने वाली तेजी रियल एस्टेट मार्केट को नई मजबूती देगी, जिससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न और आम लोगों को बेहतर घर मिल सकेंगे."

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निंबस ग्रुप के सीईओ, साहिल अग्रवाल का कहना है- 'दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे की वजह से प्रॉपर्टी के दाम बढ़ने लगे हैं. बाजार के हिसाब से, बेहतर कनेक्टिविटी और लोगों के बढ़ते भरोसे की वजह से अगले 18-24 महीनों में कीमतें 15-25% तक बढ़ सकती हैं. यह एक्सप्रेसवे केवल रहने के लिए घर ही नहीं, बल्कि रोजगार और व्यापार के नए द्वार भी खोल रहा है. सुगम सफर की वजह से अब इस कॉरिडोर पर ऑफिस स्पेस, होटल इंडस्ट्री और आईटी प्रोजेक्ट्स की बाढ़ आने वाली है. यह महज एक सड़क नहीं, बल्कि एक 'ग्रोथ कॉरिडोर' साबित होगा, जो हेल्थकेयर और रिटेल जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए प्रतिमान स्थापित करेगा.'

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का कहते हैं- 'ये सिर्फ एक सड़क प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरे कॉरिडोर के विकास का आधार है. शहर में बढ़ती भीड़ से परेशान लोग  शांत और बेहतर लाइफस्टाइल वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं. बेहतर कनेक्टिविटी की वजह से ये इलाका लोगों के लिए एक और विकल्प पैदा करेगा. साथ ही होटल, होमस्टे और कमर्शियल प्रॉपर्टी में भी निवेश के नए मौके मिलेंगे.

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अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और सीएफओ, संतोष अग्रवाल कहते हैं, "दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे  रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है. इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि इस कॉरिडोर के किनारे आवासीय और 'सेकंड-होम' निवेश के महत्वपूर्ण अवसर भी बनेंगे. आमतौर पर उभरते हुए माइक्रो-मार्केट में प्लॉटेड डेवलपमेंट और इंटीग्रेटेड टाउनशिप की मांग को बढ़ाता है. डेवलपर्स के लिए, यह बदलती जीवनशैली की प्राथमिकताओं को पूरा करने का एक रणनीतिक अवसर है."

ब्रह्मा ग्रुप के एवीपी ऑपरेशंस, आशीष शर्मा ने कहा, "दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का बनना दिल्ली और उत्तर भारत के बीच आवाजाही के लिए एक बड़ा बदलाव है, इससे न केवल दिल्ली आना-जाना आसान होगा, बल्कि यह शहर रहने और निवेश करने के लिए भी एक बेहतरीन जगह बन जाएगा. जब भी इस तरह की सड़कें या सुविधाएं बनती हैं, तो वहां जमीन और घरों की मांग बढ़ जाती है, जिससे आने वाले समय में प्रॉपर्टी की कीमतें भी काफी बढ़ती हैं."

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