बेंगलुरु के हाउसिंग मार्केट में कीमतों में गिरावट की आहट एक बार फिर सुनाई देने लगी है. सोशल मीडिया पर यह बात तेजी से फैल रही है कि ग्लोबल टेक सेक्टर (IT) में छाई सुस्ती शहर के महंगे घरों की मांग को कम कर सकती है.
चर्चा यह है कि मोटी सैलरी और सुरक्षित नौकरियों के दम पर अब तक जो 'महंगी लाइफस्टाइल' चल रही थी, उसे लंबे समय तक बरकरार रखना शायद मुमकिन न हो.
अगर लग्जरी सेगमेंट की कीमतों में नरमी आती है, तो इसका असर ₹2-3 करोड़ वाले मिड-मार्केट घरों पर भी पड़ेगा और उनकी कीमतों का असली सच सामने आ जाएगा. बेंगलुरु के प्रॉपर्टी मार्केट को लेकर रेडिट (Reddit) पर छिड़ी एक बहस ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. चर्चा है कि मंदी की स्थिति में सबसे ज्यादा गाज उन 'स्टैंडअलोन अपार्टमेंट्स' पर गिरेगी, जिनमें आधुनिक सुख-सुविधाओं का अभाव है.
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क्यों डरे हैं लोग?
यूजर्स का तर्क है कि कई महंगे अपार्टमेंट युवा पेशेवरों या NRI निवेशकों ने खरीदे हैं, जो भारी-भरकम लोन और भविष्य में सैलरी बढ़ने की उम्मीद पर टिके हैं, पोस्ट में लिखा गया, "जैसे ही बड़े पदों पर बैठे लोगों की नौकरियों पर आंच आएगी, इन अपार्टमेंट्स की असलियत सामने आने लगेगी." अगर आय की स्थिरता डगमगाती है, तो मौजूदा ऊंचे दाम टिक नहीं पाएंगे. यूजर ने आगे लिखा, "एक बार जब लग्जरी अपार्टमेंट्स की कीमतें गिरेंगी, तो ₹2-3 करोड़ के 'औसत' घर भी आसमान से जमीन पर आ जाएंगे. सबसे बुरा हाल उन स्टैंडअलोन अपार्टमेंट्स का होगा, जिनमें न तो कोई सुविधा है और न ही इतनी ऊंची कीमतों का कोई ठोस कारण. "
लोगों का कहना है कि जैसे-जैसे हाई-टेक सेक्टर से जुड़े लोगों की सैलरी कम होगी और वे बचत की कोशिश करेंगे, एनआरआई (NRI) अपनी सुरक्षा के लिए घरों को बेचना शुरू कर देंगे. वहीं, वे परिवार जिनकी आय अब बहुत ज्यादा नहीं रही, वे किसी तरह खींच-तान कर अपनी किश्तें भरने की कोशिश में फंसे रह जाएंगे. ग्रोथ न होने के कारण, बिल्डर्स जो अब तक अपार्टमेंट के रख-रखाव पर ध्यान दे रहे थे, वे भी संपत्ति की अनदेखी करने लगेंगे, जिससे कीमतों में और भी ज्यादा गिरावट आएगी.
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सोशल मीडिया पर कुछ लोगों का कहना है कि दुनिया भर में जिस तरह से नई नौकरियों में कमी आ रही है, सैलरी धीरे बढ़ रही है और टेक कंपनियों में मिलने वाले बोनस कम हो रहे हैं, उससे घरों की डिमांड गिर सकती है. पोस्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अब कर्मचारियों के पास ज्यादा सैलरी मांगने की ताकत नहीं रही, इसलिए मोटी तनख्वाह के भरोसे जो ऐशो-आराम वाली लाइफस्टाइल शुरू की गई थी, उसे अब कायम रखना मुश्किल होगा.