डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ-टैरिफ खेलते (Donald Trump Tariff Game) रह गए और उधर भारत ने कमाल कर दिया है. जी हां, मंगलवार को मदर ऑफ ऑल डील्स (Mother Of All Deals) कही जा रही, भारत-यूरोपीय संध के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर मोहर लग गई और India-EU की ओर से इस समझौते का ऐलान भी कर दिया गया.
अमेरिकी राष्ट्रपति के 50% टैरिफ का असर भारत के आयात-निर्यात पर न पड़े, इसके लिए मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) अच्छी तरह से काम कर रहा है और इसके तहत ओमान, न्यूजीलैंड के बाद अब भारत ने ईयू के साथ बड़ा समझौता कर लिया है. हालांकि, इसके फाइनल से पहले ही अमेरिका की बेचैनी दिखने लगी थी और ट्रंप के मंत्री बेतुके बयान देते नजर आए थे. आइए समझते हैं कि आखिर भारत के इस समझौते से आखिर अमेरिका का घाटा क्या है?
ऐसे नजर आई US की बैखलाहट
50% अमेरिकी टैरिफ (US Tariff On India) के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका कोई खास असर नहीं दिखा है और इसकी रफ्तार लगातार तेज बनी हुई है. वहीं दूसरी ओर भारत ने स्ट्रेटजी के तहत अपने एक्सपोर्ट डेस्टिनेशंस में विविधिता लाई है और इससे भी टैरिफ का असर कम करने में मदद मिली है. भले ही भारत के लिए अमेरिकी बाजार सबसे बड़ा क्यों न हो. ये पहले से ट्रंप और उनके प्रशासन की बेचैनी बना हुआ था और Oman, New Zeeland के बाद अब EU के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ने इसे और भी बढ़ा दिया है.

इसका असर देखने को मिला, जब अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने समझौते से ऐन पहले, India-EU ट्रेड डील को लेकर तीखा बयान दिया. अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि, 'यूरोपीय देश खुद के खिलाफ चल रही जंग को फंड कर रहे हैं.' उन्होंने कहा है कि यूरोप ने भारत के साथ ट्रेड डील साइन की और यूरोपियंस असल में अपने ही खिलाफ जंग को फाइनेंस कर रहे हैं.
रूसी तेल खरीद पर दिया था ऐसा बयान
Donald Trump वित्त मंत्री बेसेंट इससे पहले रूसी तेल की खरीद को लेकर भी भारत पर निशाना साध चुके हैं. उस समय उन्होंने भारत की Russian Oil खरीद को यूक्रेन युद्ध में 'पुतिन की वॉर मशीन' को फंड करने का जरिया बताया था. भारत पर अमेरिका द्वारा 25% एक्स्ट्रा टैरिफ के लिए भी उन्होंने इसी को वजह बताया था. बता दें कि पहले ट्रंप ने भारत पर 25% का रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाया था, जिसे बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया था.
अमेरिका के लिए कैसे तगड़ा झटका?
अब बताते हैं कि आखिर भारत का यूरोपीय संघ के साथ समझौता अमेरिका के लिए झटका देने वाली खबर क्यों है? इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं, कि अब तक अमेरिका भारत के लिए सबसे बड़ा बाजार रहा है और ट्रंप ने हाई टैरिफ लगाकर इसमें भारतीय कंपनियों की पहुंच को रोकने का काम किया, India-US Trade Deal के अटकने में भी इसका अहम रोल माना जा रहा है, लेकिन ट्रंप की इस ट्रिक का थोड़ा-बहुत असर तो दिखा, लेकिन बड़े स्तर पर भारतीय निर्यात को प्रभावित नहीं कर सकी.
भारत ने अपने निर्यात गंतव्यों में विविधिता का तरीका अपनाया और ये काम कर गया. लगातार कई देशों के साथ ट्रेड डील करते हुए देश ने नए बाजारों में अपनी पहुंच बनाई है. अब ईयू के साथ एफटीए से तो उसे सीधे 27 देशों के बाजार में आसान एंट्री दिलाने का काम किया है और वो भी बड़ा बाजार, जिसे ट्रंप के लिए एक और बड़ा झटका माना जा रहा है. अमेरिका की तरह ही यूरोपीय देशों में भी खपत ज्यादा है और इसी कंजम्पशन क्साल पर अमेरिकी निर्भरता को कम करने में भी ये डील मददगार साबित होगी.

वैश्विक व्यापार में भारत-EU की साझेदारी मजबूत होने से अमेरिका की पकड़ कुछ हद तक कमजोर पड़ सकती है. वहीं अगर India-EU Trade यूरो या अन्य स्थानीय मुद्रा में आगे बढ़ता है, तो अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व के लिए एक बड़ा खतरा हो सकता है, जो ट्रंप की पहले से ही टेंशन बना हुआ है, क्योंकि चीन जैसे कई देश स्थानीय करेंसी में ट्रेड कर रहे हैं.
भारत-EU एफटीए के फायदे क्या?
India-EU व्यापार समझौता बहुत व्यापक है और इसके तमाम फायदे होने वाले हैं. इस एग्रीमेंट के तहत जहां भारत यूरोपीय कारों पर टैरिफ को धीरे-धीरे घटाकर 10% कर देगा, तो वहीं भारत में आने वाले करीब 90% से अधिक यूरोपीय देशों के सामानों पर लगने वाले टैरिफ या तो खत्म या फिर कम किया जाएगा.
उदाहरण के तौर पर मशीनरी (44%), केमिकल (22%), मेडिसिन (11%) पर ज्यादातर टैरिफ खत्म हो सकते हैं. बीयर पर टैरिफ 50%, शराब-वाइन पर 40% हो सकता है. जूस, प्रोसेस्ड फूड, एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट पर टैरिफ जीरो हो सकता है. कुल मिलाकर यूरोप से आने वालीं लग्जरी कारों से लेकर शराब तक सस्ती हो सकती है.