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US-Iran जंग की चपेट में आया चीन... तेल आयात में भारी नुकसान, अब क्‍या करेगा ड्रैगन?

अमेरिका और ईरान के बीच जंग ने दुनिया के बीच तेल संकट जैसी स्थिति पैदा कर दी है. यहां तक की चीन भी इसकी चपेट में आ गया है. अप्रैल के दौरान आयात में चीन को भारी नुकसान हुआ है.

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चीन के तेल आयात में बड़ी गिरावट. (Photo: Reuters)
चीन के तेल आयात में बड़ी गिरावट. (Photo: Reuters)

चीन को एनर्जी आयात के मामले में भारी नुकसान हुआ है. उसका मंथली आयात तेजी से गिरा है, क्‍योंकि होर्मुज के माध्यम से शिपमेंट लगभग ठप होने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात लगभग रुक गया है. 

शनिवार को चीनी सीमा शुल्क आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल के आयात में साल-दर-साल लगभग 20% की गिरावट आई और यह 38.47 मिलियन टन रह गया, जो जुलाई 2022 के बाद सबसे कम है, जबकि गैस की ढुलाई में लगभग 13% की गिरावट आई और यह 8.42 मिलियन टन पर पहुंच गई. 

तेल आयात भी पिछले महीने की तुलना में कम रहा, जिसमें वे खेप भी शामिल हैं जो 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों से पहले ही फारस की खाड़ी से अपनी यात्रा शुरू कर चुकी थीं.

8 साल के निचले स्तर पर पहुंची LNG की बाइंग 
मिडिल ईस्‍ट से आम तौर पर चीन के कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा हिस्सा और नेचुरल गैस का लगभग एक तिहाई हिस्सा आता है. मंथली चार्ज के शुरुआती आंकड़ों में समुद्री मार्ग से आने वाली LNG और पाइपलाइनों के माध्यम से सड़क मार्ग से आने वाली गैस के बीच अंतर नहीं किया गया है, लेकिन एक्‍सपर्ट फर्म केप्लर के जहाज-ट्रैकिंग डेटा से पता चलता है कि अप्रैल में LNG की खरीद 8 साल के निचले स्तर पर आ गई थी. 

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चीन ने किए ये उपाय 
दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा खरीदार देश में तेल की कमी होने की आशंकाओं के चलते सरकार ने घरेलू उपयोग के लिए डीजल और गैसोलीन जैसे रिफाइन प्रोडक्‍ट्स को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है. जिस कारण, अप्रैल में तेल उत्पादों का निर्यात पिछले साल की तुलना में लगभग 38% गिरकर 31 लाख टन रह गया, जो लगभग एक दशक में सबसे कम है. 

कोयले की मांग बढ़ी
ब्‍लूमबर्ग की रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि गैस की आपूर्ति में रुकावट के कारण कोयले जैसे ऑप्‍शनल सोर्स की मांग बढ़ गई है. हालांकि, चीन की खरीद में लगभग 13 फीसदी की गिरावट आई है और यह गिरकर 33.08 मिलियन टन रह गई है, जो पिछले साल जून के बाद से सबसे कम है. यह इसलिए कम हुआ है, क्‍योंकि चीन ने घरेलू उत्‍पादन पर ज्‍यादा फोकस किया है. हालांकि चीन ने एल्युमीनियम, तांबा और अन्‍य धातुओं का निर्यात बढ़ाया है, क्‍योंकि यह विश्‍व में एक प्रमुख निर्यातक बन चुका है. 

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