मिडिल ईस्ट में जंग के दौरान जब तेल कीमतें तेजी से ऊपर जा रही थीं, तो अमेरिका ने रूसी तेल और ईरानी तेल पर से प्रतिबंध कुछ दिनों के लिए हटा दिया था, जिसके बाद भारत और अन्य देशों ने खरीदारी शुरू कर दी थी. हालांकि अब अमेरिका इन छूटों को समाप्त कर रहा है, जिसके बाद भारत को एक नई आपूर्ति चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने 15 अप्रैल को कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका रूसी और ईरानी तेल आयात पर लागू प्रतिबंधों में छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा. व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बेसेंट ने कहा कि हम रूसी और ईरानी तेल पर लागू सामान्य लाइसेंस को रिन्यू नहीं करेंगे. उन्होंने आगे कहा कि यह छूट केवल उन कार्गो पर लागू होती थी, जो 11 मार्च से पहले समुद्र में थे.
12 मार्च से पहले लोड किए गए रूसी कार्गो के लिए 30 दिन का सामान्य लाइसेंस अब समाप्त हो गया है, जबकि ईरानी तेल के लिए अलग से दी गई छूट 19 अप्रैल को समाप्त हो जाएगी. इस कदम से वह सीमित कानूनी अवसर समाप्त हो गया है जिसने भारतीय तेल कंपनियों (OMCs) को पिछले महीने रूसी कच्चे तेल की खरीद में तेजी से बढ़ोतरी की थी.
भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात मार्च 2026 में नौ महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो लगभग 1.96 मिलियन बैरल प्रति दिन (एमबीपीडी) था और फरवरी से लगभग 53% अधिक है. इस बढ़ोतरी का ज्यादातर हिस्सा छूट अवधि के दौरान आया था. ऐसे में आइए जानते हैं अब तेल को लेकर भारत के पास क्या विकल्प हो सकते हैं...
अब भारत कहां से लाएगा तेल?
सरकार ने हमेशा से कहा है कि उसका फोकस विविधीकरण पर रहा है. होर्मुज के रुकावट के बाद भी, भारत का तर्क रहा है कि भारत का आयात भंडार पहले से कहीं ज्यादा व्यापार और लचीला है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने पहले कहा था कि कच्चे तेल की सोर्सिंग तकनीकी-व्यावसायिक निर्णय हैं और ओएमसी ने पहले ही 40 से अधिक देशों में एनर्जी सोर्स के आयात में विविधता लाई है यानी कि अब भारत 40 देशों से एनर्जी का आयात कर रहा है.
अब उम्मीद है कि भारत की आपातकालीन योजना खाड़ी क्षेत्र से बाहर और होर्मुज चोकपॉइंट से परे स्थित आपूर्तिकर्ताओं पर फोकस होगी. लैटिन अमेरिका इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं. इसके बाद ब्राजील, कोलंबिया और इक्वाडोर भारतीय रिफाइनरियों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बन गए हैं, जबकि गुयाना दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते नए तेल निर्यातकों में से एक के रूप में तेजी से उभरा है.
अफ्रीका देशों से भी बढ़ सकता है तेल आयात
पश्चिम अफ्रीका की भूमिका भी बढ़ने की उम्मीद है, जहां नाइजीरिया और अंगोला से मिलने वाली स्थिर मात्रा रिफाइनर को खाड़ी देशों के कच्चे तेल का विकल्प देती हैं. साथ ही, भारतीय तेल उत्पादक कंपनियां अमेरिका से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकती हैं, जहां शेल से जुड़ा कच्चा तेल व्यापक मात्रा में उत्पादन और विश्वसनीयता दोनों पेश करता है.
इनमें से कोई भी विकल्प रियायती रूसी तेल का पूरा विकल्प नहीं हो सकता है, लेकिन ये सभी मिलकर भारत को रूसी और ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में छूट की समाप्ति से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पर्याप्त लचीलापन पेश कर सकते हैं. हालांकि, इससे भारत की आयात लागत बढ़ सकती है.