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टाटा समूह भी देगा ई-कॉमर्स के दंगल में रिलायंस, एमेजॉन जैसे दिग्गजों को चुनौती

देश के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स सेगमेंट में अब टाटा समूह भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है. रिलायंस जियो मार्ट, फ्लिपकार्ट, एमेजॉन जैसे दिग्गजों के बीच ई-कॉमर्स रिटेल में पहले से ही कड़ा मुकाबला चल रहा है.

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टाटा समूह भी रिटेल में दो-दो हाथ को तैयार
टाटा समूह भी रिटेल में दो-दो हाथ को तैयार
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ई-कॉमर्स रिटेल सेगमेंट में कड़ा है मुकाबला?
  • इसमें रिलायंस, एमेजॉन जैसे दिग्गज खिलाड़ी हैं
  • टाटा समूह भी अपने कदम मजबूत करने को तैयार

ई-कॉमर्स के दंगल में रिलायंस, एमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसे दिग्गजों से दो-दो हाथ के लिए अब टाटा समूह भी अखाड़े में उतरने की तैयारी कर रहा है. टाटा समूह एक 'सुपर ऐप' लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. 


गौरलब है कि रिलायंस जियो मार्ट, फ्लिपकार्ट, एमेजॉन जैसे दिग्गजों के बीच ई-कॉमर्स रिटेल में पहले से ही कड़ा मुकाबला चल रहा है. देश के तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स सेगमेंट में अब टाटा समूह भी अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है.
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ये है टाटा का नया दांव

अपने सुपर ऐप के द्वारा टाटा समूह पहली बार अपनी कई ग्राहक सेवाओं को एक जगह लेकर आएगा. यह ऐप दिसंबर या जनवरी में लॉन्च हो सकता है. इस ऐप के द्वारा शॉपिंग ऐप टाटा क्लिक, ग्रॉसरी स्टोर StarQuik और ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक्स प्लेटफॉर्म क्रोमा जैसे टाटा समूह के कई प्लेटफॉर्म के उत्पाद एवं सेवाएं एक ​ही जगह उपलब्ध हो जाएंगी. 


अंग्रेजी अखबार फाइनेंशियल टाइम्स से टाटा सन्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कहा, 'यह एक सुपर ऐप होगा. एक ऐप के भीतर कई ऐप होंगे. हमारे सामने काफी बड़ा अवसर है.' 

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कड़ा है मुकाबला 

गौरतलब है कि रिलायंस समूह रिटेल में काफी आक्रामक तरीके से टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहा है. उसके पास दुनिया की कई दिग्गज कंपनियों की टेक्नोलॉजी है, क्योंकि पिछले तीन महीने में रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स में एक दर्जन से ज्यादा विदेशी कंपनियों ने 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश किया है. लेकिन टाटा समूह इस मामले में अभी काफी पीछे था.

टाटा समूह के पास कई बड़ी कंपनियां है, जिनमें टाटा स्टील से लेकर देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी टीसीएस तक शामिल हैं. अभी दक्षिण-पूर्व के देशों और चीन में ऐसे सुपर ऐप काफी लोकप्रिय हैं, लेकिन भारत में ऐसा ऐप कोई पहली बार ला रहा है. 

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जबरदस्त है अवसर  

गौरतलब है कि भारत ई-कॉमर्स का फलता-फूलता बाजार है. इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया की सितंबर 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 के आखिर में भारत इंटरनेट के इस्तेमाल के लिहाज से चीन के बाद दूसरे नंबर पर था. इंटरनेट की पैठ अलबत्ता अब भी महज 36 फीसद ही है. इसका मतलब है कि विकासशील देशों के मुकाबले, जहां बाजार पूर्णता के मुहाने पर पहुंच गया है, भारत में अभी बहुत क्षमता और संभावनाओं का दोहन बाकी है. 

जर्मन डेटा रिसर्च फर्म स्टैटिस्टा कहती है कि भारत में मोबाइल ई-कॉमर्स 2016 के मूल्य से चार गुना बढ़कर 2020 में 38 अरब डॉलर के मूल्य को छू लेगा.

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