भारत का समुद्र कॉरिडोर अब काफी खास बन चुका है. दुनिया का 50 फीसदी ग्लोबल कंटेनर, 70 फीसदी एशिया ऑयल और 40 फीसदी ग्लोबल कच्चा तेल भारतीय समुद्री मार्ग से आता है. वहीं भारत 90 फीसदी व्यापार और 85 फीसदी कच्चा तेल समंदर के रास्ते ही कर रहा है.
मौजूदा समय में समु्द्री मार्ग काफी टफ बना हुआ है. समुद्री डकैती, जहाजों अटैक और नौसैनिक एक्टिविटी में बढ़ोतरी के कारण समुद्री सुरक्षा डिफेंस वर्क से बढ़कर एक खास इकोनॉमी सुरक्षा उपाय बन चुका है. हाल ही में SMIFS की एक रिपोर्ट के अनुसार, जियो पॉलिटिकल तनाव के कारण भारत का जहाज निर्माण उद्योग तेजी से बढ़ने वाला है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि नौसेना के 2026 से हर 40-42 दिनों में एक युद्धपोत शामिल करने के साथ ही, उसके कमीशनिंग सुपर-साइकिल में प्रवेश करने की उम्मीद जताई है. वहीं, सरकार द्वारा 2025 में घोषित 697 अरब रुपये के समुद्री विकास पैकेज का उद्देश्य भारत को विश्व के 16वें सबसे बड़े जहाज निर्माण राष्ट्र से 2047 तक शीर्ष पांच देशों में शामिल करना है.
GRSE को मिल सकता है बड़ा ऑर्डर
ब्रोकरेज ने कहा कि गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड इसके प्रमुख लाभार्थी बन सकते हैं. SMIFS ने बताया कि GRSE ने वित्त वर्ष 2026 के अंत तक 39 प्लेटफार्मों के लिए 153.2 अरब रुपये के ऑर्डर हासिल किए, जो वित्त वर्ष 2026 के राजस्व का 2.2 गुना है. इसकी परियोजनाओं में P-17A फ्रिगेट, अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत, पनडुब्बी रोधी युद्धपोत और जर्मनी के लिए निर्यात ऑर्डर शामिल हैं.
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि अगर ठेका मिलता है, तो GRSE का ऑर्डर बुक 48,000 करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है और अन्य परियोजनाओं के साथ वित्त वर्ष 2028 तक संभावित रूप से 75,000-80,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे वित्त वर्ष 2035 तक आय की स्पष्टता बनी रहेगी. एसएमआईएफएस ने हाइब्रिड फेरी, ग्रीन टग, तटीय जहाजों और निर्यात के माध्यम से 2035 तक 130-290 बिलियन रुपये के ग्रीन समुद्री बाजार का भी अनुमान लगाया है.
82 फीसदी का रिटर्न दे सकता है ये शेयर
कंपनी के पास 3,730 करोड़ रुपये की नकदी थी और कर्ज शून्य था, जबकि एक्सपोर्ट रेवेन्यू में ग्रोथ हो रही है, जिसमें जर्मनी से लगभग 13.5 अरब रुपये के 12 जहाजों का ऑर्डर भी शामिल था. GRSE पर, फर्म सबसे अधिक आशावादी था, जिसने 'खरीदें' रेटिंग और 5,075 रुपये का टारगेट दिया है, जिसका अर्थ है कि यह शेयर 82 फीसदी का रिटर्न दे सकता है.
मझगांव डॉक पर टारगेट
ब्रोकरेज फर्म ने मझगांव डॉक को भारत का सबसे रणनीतिक रक्षा शिपयार्ड और विध्वंसक और पारंपरिक पनडुब्बियों दोनों का एकमात्र निर्माता बताया है. कंपनी ने 1960 से अब तक 800 से अधिक जहाज वितरित किए हैं. अभी इसके ऑर्डर लगभग 205 अरब रुपये के हैं, जबकि व्यापक संभावित परियोजनाओं का अनुमान 34 लाख करोड़ रुपये है. ब्रोकरेज फर्म ने मझगांव डॉक को 2,905 रुपये के टारगेट प्राइस के साथ 'बाय' रेटिंग बरकरार रखी है.
कोचीन शिपयार्ड के लिए टारगेट
कोचीन शिपयार्ड के लिए, ब्रोकरेज ने 'खरीदें' रेटिंग और 2,555 रुपये का टारगेट दिया है, जो बुधवार को लगभग 1,480 रुपये के प्राइस पर था. नया टारगेट 73 प्रतिशत तेजी का अनुमान दिखाता है. ब्रोकरेज का कहना है कि यह जहाज निर्माण करने से लेकर मरम्मत करने तक के कारोबार में है और कंपनी का 45 फीसदी एक्पोजर मरम्मत वाले कारोबार में है. कंपनी के कारोबार का पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफाइड है.
(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.)