डॉलर की तुलना में रुपया में इस साल बड़ी गिरावट देखने को मिली है. रुपया अब 96 लेवल के पार पहुंच चुका है. बुधवार को इसने ऑल टाइम लो लेवल लगाते हुए 97 स्तर के करीब पहुंच गया था. ऐसे में कई एक्सपर्ट्स यह तक कहने लगे हैं कि रुपया अब 100 लेवल को जल्द ही पार कर सकता है.
आईमएफ की पूर्व डिप्टी एमडी गीता गोपीनाथ ने भी रुपये की गिरावट को लेकर नई चेतावनी दे दी है और कहा है कि रुपया जल्द ही 100 के मार्क तक जा सकता है. हालांकि, गुरुवार को रुपये में थोड़ी रिकवरी देखने को मिली . अभी यह 41 पैसे चढ़कर 96.45 लेवल पर आ गया है.
अभी भी तेल की कीमतें ऊपर जाने से रुपये पर दबाव बना हुआ है. लेकिन सिर्फ भारत की ही करेंसी नहीं टूट रही है, बल्कि डॉलर की तुलना में जापान, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत कई देशों की करेंसी पर दबाव दिखाई दिया है और हर देश की गिरावट की रफ्तार अलग रही है. वहीं चीन-रूस जैसे देश ऐसे भी हैं, जिनकी करेंसी एक साल के दौरान डॉलर की तुलना में चढ़ी है.
बांग्लादेश की करेंसी रुपये की तुलना में भी मजबूत हुआ है. हालांकि पाकिस्तान की करेंसी रुपये की तुलना में भी दबाव में दिखी है.
क्यों गिर रहा भारतीय रुपया?
भारतीय रुपया अभी 96 के ऊपर बना हुआ है, जिसकी बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मजबूत डॉलर है. विदेशी निवेशकों ने इस साल 2.20 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बिकवाली की है और कच्चा तेल 110 डॉलर के करीब बना हुआ है, जिस कारण आयात के मामले में रुपये पर ज्यादा दबाव बना हुआ है.
पिछले एक साल के आंकड़े को देखें तो डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 10-12% तक कमजोर हुआ है. 2025 में भी रुपया लगभग 4.7% टूटा था, जो 2022 के बाद सबसे खराब प्रदर्शन था.
जापान की करेंसी पर दबाव
जापानी येन भी डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ है. USD/JPY जोड़ी 150-160 के ऊपर बनी रही, यानी एक डॉलर खरीदने के लिए पहले से ज्यादा येन खर्च करने पड़े. जापान में बेहद कम ब्याज दरें इसकी बड़ी वजह रही है. पिछले एक साल में जापान की करेंसी येन 7.21% गिरी है.
चीन की करेंसी में कितनी आई गिरावट?
चीनी युआन में गिरावट सीमित रही. चीन की केंद्रीय बैंक ने लगातार हस्तक्षेप कर युआन को स्थिर रखा है. डॉलर के मुकाबले युआन करीब 7 के आसपास बना रहा और एशिया की कई करेंसी की तुलना में कम दबाव में दिखा है.
पाकिस्तान की करेंसी कितनी गिरी?
पाकिस्तानी रुपया भी कमजोर बना हुआ है. डॉलर के मुकाबले पाकिस्तान की करेंसी लगातार दबाव में रही, हालांकि कुछ समय IMF सहायता और आयात नियंत्रण के कारण स्थिरता देखने को मिली. कई रिपोर्टों में कहा गया कि भारतीय रुपया पाकिस्तानी रुपये के मुकाबले भी कमजोर हुआ है.
बांग्लादेश का टका भी कमजोर
बांग्लादेशी टका भी डॉलर के मुकाबले कमजोर बना हुआ है. विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव और आयात बिल बढ़ने से टका तेजी से गिरा है. वहीं इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय रुपया टका के मुकाबले भी कमजोर हुआ है.
रूस की करेंसी का क्या हाल?
डॉलर की तुलना में रूबल में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है, लेकिन पिछले एक साल के आंकड़ों को देखें तो मई 2025 में 1 डॉलर के बराबर 88–92 रूबल था और अब मई 2026 में 71–74 रूबल का एक डॉलर है. यानी अब रूबल की वैल्यू लगभग 9% से 10% तक बढ़ी है.