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Rupee की दहाड़, डॉलर के मुकाबले 49 पैसे की लगाई छलांग, शेयर बाजार में भी बहार

Rupee Vs Dollar: रुपया में बीते कुछ समय जारी जोरदार गिरावट न केवल देशवासियों के मुसीबत का सबब बनती जा रही थी, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी इसे लेकर घमासान मचा हुआ था. हालांकि, इसके टूटने के सिलसिले पर अब ब्रेक लगता नजर आ रहा है.

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डॉलर के मुकाबले रुपया में आई जोरदार तेजी
डॉलर के मुकाबले रुपया में आई जोरदार तेजी

लंबे समय से जारी भारतीय करेंसी रुपया (Rupee) में गिरावट पर ब्रेक लगता दिखाई दे रहा है. बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले 49 पैसे की लंबी छलांग लगाकर 81.43 के स्तर पर आ गया. इससे पहले रुपया लगातार टूटने का नया रिकॉर्ड बनाता जा रहा था और बीते अक्टूबर महीने में यह टूटकर पहली बार पहुंचा 83 के पार पहुंच गया था. 

टूटने का नया रिकॉर्ड बना रहा था रुपया
अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले रुपया (Rupee) में गिरावट महीने-दर-महीने तेजी होती जा रही थी. सितंबर 2022 में इसने गिरते हुए 82 के स्तर को पार किया था, तो अगले ही महीने यानी अक्टूबर 2022 में यह टूटकर 83.01 रुपये प्रति डॉलर परा बंद हुआ. ये पहली बार था जब रुपया ने 83 के आंकड़े को पार किया था. हालांकि, इसके बाद रुपये में गिरावट में कुछ कमी आती गई और उतार-चढ़ाव जारी रहा. हालांकि, बुधवार को आई 49 पैसे की जोरदार बढ़त राहत देने वाली खबर है. 

रुपये में गिरावट के रहे ये कारण
भारतीय मुद्रा Rupee में गिरावट की सबसे बड़ी वजह रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War), सप्लाई चेन में रुकावट और अमेरिकी फेड रिजर्व (US Fed) की ओर से लगातार की जा रही ब्याज दरों में बढ़ोतरी रही. डॉलर के मजबूत होने से भारतीय शेयर बाजारों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली चरम पर पहुंच गई और रुपया धड़ाम हो गया. विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जब उथल-पुथल मचती है तो निवेशक डॉलर की ओर अपना रुख करते हैं. डॉलर की मांग बढ़ती है तो फिर अन्य करेंसियों पर दबाव बढ़ जाता है. यहा कारण है कि न सिर्फ रुपया, बल्कि दुनिया की अन्य करेंसियां भी अमेरिकी डॉलर के आगे धराशाई हो रही हैं. हालांकि, अब रुपया ने अपनी ताकत दिखाना शुरू कर दिया है. 

रुपये में कमजोरी का यहां होता है असर
भारत तेल से लेकर जरूरी इलेक्ट्रिक सामान और मशीनरी के साथ मोबाइल-लैपटॉप समेत अन्य गैजेट्स के लिए दूसरे देशों से आयात पर निर्भर है. अधिकतर मोबाइल और गैजेट का आयात चीन और अन्य पूर्वी एशिया के शहरों से होता और अधिकतर कारोबार डॉलर में होता है. अगर रुपये में  गिरावट जारी रहती है, तो देश में आयात महंगा होता जाता है. माल ढुलाई भी महंगी होती है और इसके असर से हर जरूरत की चीज पर महंगाई की और मार पड़ने लगती है. साफ शब्दों में कहें तो रुपये में गिरावट से महंगाई (Inflation) का जोखिम बढ़ जाता है.  

Stock Market में जोरदार तेजी
सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को घरेलू शेयर बाजार (Stock Market) मजबूती के साथ खुले. शुरुआती कारोबार में सुबह 9.15 बजे पर बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) 134.75 अंकों की बढ़त के साथ 61,319.90 अंकों पर कारोबार कर रहा था. वहीं दूसरी ओर एनएसई का निफ्टी (Nifty) 55.20 अंकों की तेजी लेते हुए18,258.00 अंकों पर ट्रेड कर रहा था. 

 

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