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दिल्‍ली-NCR में रहने के लिए कितनी सैलरी चाहिए? ज्‍यादातर के पास नहीं इतने पैसे

दिल्‍ली एनसीआर में रहने वालों की लिविंग कॉस्‍ट इतनी हाई हो चुकी है कि अब ये मिडिल क्‍लास की कमाई से भी ऊपर जा चुकी है. ज्‍यादातर लोग अफोर्ड नहीं कर पा रहे हैं.

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दिल्‍ली एनसीआर में बेतहाशा खर्च. (Photo: File/ITG)
दिल्‍ली एनसीआर में बेतहाशा खर्च. (Photo: File/ITG)

पिछले कुछ सालों में मेट्रो शहरों में तेजी से लाइफस्‍टाइल बदली है. साथ ही खाने-पीने की चीजों से लेकर घर की कीमतें और किराये पर मकान की भी वैल्‍यू बढ़ी है. आज ये महंगाई इतनी हो गई है कि ज्‍यादातर लोग अफोर्ड नहीं कर पा रहे हैं. इनके पास पर्याप्‍त कमाई या सैलरी नहीं है.

खासकर दिल्‍ली-एनसीआर जैसी जगहों पर तो ये स्थिति और भी गंभीर है, जहां पर ज्‍यादातर प्राइवेट सेक्‍टर के कर्मचारी अपने महीने का खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं. करियर की शुरुआत कर रहे कुछ कर्मचारी तो, यहां रहने के लिए घर से पैसे मंगा रहे हैं या फिर अपने जरूरतों से समझौता करने को मजबूर हैं. 

अब एक पोस्‍ट ने इसी बात का खुलासा किया है और वो सच बताने की कोशिश की है, जो दिल्‍ली-एनसीआर के लोग झेल रहे हैं. दरअसल, सोशल मीडिया X पर एक IIT PHD स्‍कॉलर ने एक पोस्‍ट शेयर किया है, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली-एनसीआर में रहने के लिए एक दंपति को हर महीने करीब 85,000-95,000 रुपये की आवश्‍यकता होती है. 

इस पोस्‍ट ने एक बहस छेड़ दी है कि क्या भारत का शहरी मध्यम वर्ग महानगरीय जीवन से वंचित होता जा रहा है? क्‍योंकि ज्‍यादातर क्‍लास इतना पैसा नहीं कमा पा रहा है. 

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बेतहाशा है खर्च 
आईआईटी के स्कॉलर मिश्रा देव ने X पर लिखा कि एनसीआर में एक दंपत्ति के लिए कम से कम लाइफस्‍टाइल का खर्च भी अब 85,000 से 95,000 रुपये हर महीने के बीच है. उन्होंने लिखा कि एनसीआर में लाइफस्‍टाइल का खर्च बेतहाशा है और सवाल उठाया कि गुरुग्राम, नोएडा और दिल्ली जैसे शहरों में 50,000-60,000 रुपये कमाने वाले परिवार दैनिक खर्चों का प्रबंधन कैसे करते हैं. 

उन्‍होंने लिखा कि NCR में जीवनयापन का खर्च बहुत ज्यादा है. मुझे समझ नहीं आता कि एक दंपत्ति 50-60 हजार रुपये प्रति माह में कैसे गुजारा कर सकता है. 1 लाख रुपये प्रति माह से कम कमाने वाले लोग खर्च कैसे पूरा करते हैं? मैं एक तरह से सादगी पसंद इंसान हूं और दो लोगों के लिए न्यूनतम जीवनयापन का खर्च 85-95 हजार रुपये प्रति माह है.

किन चीजों में जा रहा मोटा पैसा? 
यह खर्च ज्‍यादातर बुनियादी चीजों पर हो रहा है. इसमें किराया (सबसे ज्‍यादा), मंथली किराने का सामना, ट्रांसपोर्ट, हेल्‍थ सर्विसेज और अन्‍य जरूरतें शामिल हैं. वहीं कई लोगों के लिए तो यह सहन से भी परे हो गया है. 

एक यूजर ने कहा कि मैं दिल्‍ली में रहत हूं, मेरा मंथली खर्च करीब 70,000 रुपये है. ऐसा इसलिए है, क्‍योंकि मैं अपने पिता द्वारा खरीदे गए फ्लैट में रहता हूं, मेरी जरूरतें कम हैं. 70,000 रुपये में मेरा, मेरी पत्नी और मेरे 11 साल के बच्‍चे का खर्च शामिल है. यह खर्च आगे भी बढ़ेगा. 

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75,000 का सिर्फ फ्लैट
एक अन्‍य यूजर्स ने लिखा कि नोएडा जाते समय हमें भी ऐसा ही महसूस हुआ. शायद हमें बहुत महंगी प्रॉपर्टीज दिखाई गईं. हमने ऐसी प्रॉपर्टीज देखीं जहां 2 बेडरूम वाले फ्लैट का किराया 45,000-50,000 रुपये प्रति माह था. साथ ही मेंटेनेंस भी देना पड़ता था और एक और प्रॉपर्टी देखी, जहां 3 बेडरूम वाले फ्लैट का किराया 75,000 रुपये प्रति महीने था और मेंटेनेस के लिए 15,000 रुपये देने पड़ते थे. 

दिल्‍ली के आसपास कितनी तेजी से बढ़ी महंगाई? 
दिल्ली सरकार की वैल्‍यू इंडेक्‍स 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली क्षेत्र में महंगाई लगातार बढ़ रही है, जिसमें आवास लागत का प्रमुख योगदान है. रिपोर्ट में बताया गया है कि रिपीट हाउस रेंट सर्वे दिल्ली और आसपास के शहरी सेंटर्स में किराए और आवास संबंधी खर्चों में नियमित तेजी पर नजर रखता है.  

इसी रिपोर्ट में दिखाया गया है कि गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में 2024 में महंगाई दर 3.8% दर्ज की गई, जबकि फरीदाबाद में महंगाई 4.8% रही, जो एनसीआर क्षेत्र में सबसे अधिक में से एक है.

यह रिपोर्ट खोलता है कई राज 

उद्योग जगत की रिपोर्ट्स के मुताबिक, किराये का बाजार और भी कम्‍पिटेटिव हो गया है. विल्स इंडिया की एक बाज़ार रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में औसत किराये में 2025 की पहली छमाही में सालाना आधार पर 6% की वृद्धि हुई, जबकि नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्र में किराये में लगभग 19% की वृद्धि दर्ज की गई 

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सैविल्स इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 2025 की पहली छमाही में 68 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थान की मांग दर्ज की गई, जिसमें गुरुग्राम और नोएडा की मांग सबसे अधिक रही. 

रियल एस्टेट में आई तेज़ी ने आवासीय संपत्तियों की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल ला दिया है. AREDCO की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 2025 तक संपत्ति की कीमतों में 49% की वृद्धि दर्ज की गई, जो प्रमुख भारतीय शहरों में सबसे अधिक है. 

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