ईरान और इजरायल में जंग की वजह से दुनियाभर में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है. खासकर कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई है. एनर्जी सेक्टर में अडानी ग्रुप का बड़ा कारोबार है. अडानी ग्रुप का इजरायल में भी पोर्ट्स का बिजनेस है. मौजूदा हालात से निपटने के लिए अडानी ग्रुप क्या कर रहा है? इस बारे में अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) के प्रबंध निदेशक (MD) करण अडानी ने अपनी पूरी रणनीति बताई.
दरअसल इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 (India Today Conclave 2026) में करण अडानी ने कहा है कि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर तनाव है, और सप्लाई चेन में थोड़ी दिक्कतें आ रही हैं. इन समस्याओं को देखते हुए अब भारत के लिए मजबूत सप्लाई चेन बनाना बेहद जरूरी हो गया है.
करण अडानी के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने सप्लाई चेन से जुड़े कई बड़े झटके देखे हैं. इनमें कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे घटनाक्रम शामिल हैं. पूरी तरह से वैश्विक सप्लाई नेटवर्क पर निर्भर रहना कई देशों के लिए जोखिम भरा हो सकता है. जिसके बाद दुनिया के कई देश अपनी सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. भारत भी धीरे-धीरे इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि किसी संकट की स्थिति में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो.
इंफ्रा में निवेश से बढ़ेगा देश
उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू इंफ्रा खासकर बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और ट्रांसपोर्ट सिस्टम सप्लाई चेन को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. किसी भी देश के लिए अपने बुनियादी ढांचे का मजबूत होना जरूरी है, क्योंकि इससे व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति दोनों सुरक्षित रहती हैं.
उन्होंने बताया कि अडानी पोर्ट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन ने अपने पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को इस तरह विकसित किया है कि वह संकट के समय भी महत्वपूर्ण ऊर्जा कार्गो जैसे कच्चा तेल और LPG को संभाल सके. मौजूदा वैश्विक तनाव को देखते हुए कंपनी भारत की ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए तैयार है.
करण अडानी ने कहा कि आपको भले ही बाहर से देखने पर अडानी ग्रुप का बिजनेस कई अलग-अलग क्षेत्रों में फैला हुआ लगता है, लेकिन वास्तव में कंपनी की रणनीति 3 मुख्य सेक्टर्स में हैं, ऊर्जा (Energy), पोर्ट-लॉजिस्टिक्स (Ports & Logistics) और मटेरियल्स (Materials).
1. एनर्जी पर सबसे ज्यादा फोकस
करण अडानी ने कहा कि ग्रुप के लिए पहला और सबसे अहम सेक्टर एनर्जी है. कंपनी का लक्ष्य है कि भारत को सस्ती और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराई जाए. इसके लिए समूह बिजली उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन और वितरण तक पूरी ऊर्जा वैल्यू-चेन में काम कर रहा है. उन्होंने बताया कि कंपनी के पास थर्मल पावर, रिन्यूएबल एनर्जी और अब बैटरी स्टोरेज जैसे सेक्टर भी हैं. इसके अलावा कंपनी डेटा सेंटर जैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी निवेश कर रही है, क्योंकि भविष्य की अर्थव्यवस्था में ऊर्जा और डिजिटल सिस्टम दोनों की बड़ी भूमिका होगी.
2. पोर्ट, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क
समूह की दूसरी बड़ी रणनीति पोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूत करना है. कंपनी का लक्ष्य अलग-अलग इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़कर एक ऐसा नेटवर्क बनाना है, जिससे देश में लॉजिस्टिक्स लागत कम हो सके. इसमें पोर्ट, एयरपोर्ट, रेल, वेयरहाउस और अन्य परिवहन सुविधाओं को एक साथ जोड़ने का काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अगर लॉजिस्टिक्स लागत कम आती है, तो फिर भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता भी बढ़ती है और व्यापार को फायदा मिलता है.
3. फ्यूचर की इंडस्ट्री के लिए मटेरियल्स
समूह का तीसरा बड़ा सेक्टर मटेरियल्स और औद्योगिक संसाधन है. उन्होंने कहा कि दुनिया में दो बड़े बदलाव तेजी से हो रहे हैं, ग्रीन एनर्जी की ओर बदलाव और डिजिटलाइजेशन. इन दोनों बदलावों के लिए कई खास कच्चे माल और औद्योगिक क्षमता की जरूरत होती है. इसी वजह से कंपनी सीमेंट, एल्यूमिनियम और कॉपर जैसे सेक्टर्स में भी काम कर रही है.
करण अडानी की मानें तो अडानी ग्रुप का विस्तार किसी एक मौके या छोटे लक्ष्य के आधार पर नहीं किया जाता. कंपनी लंबी अवधि के आर्थिक बदलावों को ध्यान में रखकर रणनीति बनाती है. ऊर्जा परिवर्तन, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक मटेरियल्स जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में तेजी से विकास होने की संभावना है. इसी वजह से कंपनी इन सेक्टर्स में लगातार निवेश कर रही है. करण अडानी ने स्पष्ट किया कि अडानी समूह अगले 5 वर्षों तक हर साल 2 लाख करोड़ रुपये का ग्रीनफील्ड निवेश (Capex) करने के लिए प्रतिबद्ध है.
करण अडानी की मानें तो भारत अब केवल एक उपभोग करने वाला बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में अग्रसर है. अडानी पोर्ट्स का लक्ष्य भारत के बंदरगाहों की क्षमता को दोगुना करना है, ताकि वे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों का मुकाबला कर सकें.
गौतम अडानी के बारे
अपने पिता और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के बारे में बोलते हुए करण ने कहा कि वे बहुत शांत स्वभाव के हैं और संकट के समय भी अपना आपा नहीं खोते. वे नई पीढ़ी को प्रयोग करने की पूरी आजादी देते हैं. मेरी मां का भी ग्रुप को बड़ा करने में अहम रोल है. क्योंकि पिताजी हमेशा बाहर रहते हैं, ऐसे परिवार को देखने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों को संभालती हैं. उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य जब साथ बैठते हैं, तो चर्चा इस बात पर होती है कि देश के विकास में कैसे बेहतर योगदान दे सकते हैं.
अडानी ग्रुप को लेकर विवाद पर करण अडानी ने कहा कि जब आप इतने बड़े स्तर पर काम करते हैं, तो कुछ लोग सवाल उठाएंगे ही. लेकिन अक्सर ग्रुप को लेकर जो सवाल उठाए जाते हैं, वो एकतरफा होता है, क्योंकि अडानी ग्रुप विवाद नहीं, काम में विश्वास रखता है.