पहलगाम में बीते 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हैं और दोनों ही देशों में तनाव (India-Pakistan Tension) लगातार बढ़ता जा रहा है. पाकिस्तान परमाणु हमले की चेतावनी तक दे रहा है. ऐसे में एक बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि कर्ज के भारी बोझ तले दबा पाकिस्तान (Pakistan Debt) आखिर युद्ध कैसे लड़ेगा, क्योंकि कोई भी देश सिर्फ शक्ति प्रदर्शन के बल पर War जारी नहीं रख सकता, उसे क्रेडिट, विश्वसनीयता और सबसे ज्यादा पैसों की जरूरत होती है और पाकिस्तान के पास इस समय शायद इसमें से कुछ भी नहीं है.
बता दें कि दिसंबर 2024 तक पाकिस्तान का बाहरी कर्ज ही 131.1 अरब डॉलर पर पहुंच गया है, जो इसकी जीडीपी का करीप 42 फीसदी है. वहीं लंबी आर्थिक तंगी के चलते इकोनॉमी (Pakistan Economy) की हालत पहले से ही पस्त है.
कर्ज के जाल में फंसा PAK बेहाल
India-Pakistan Border पर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. पाकिस्तान सेना लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रही है और भारत के किसी भी हमले का जवाब देने का दावा कर रही है. जैसे-जैसे Pakistan Army युद्ध की तैयारी कर रही है, ढहने की कगार पर पहुंची पाकिस्तान की इकोनॉमी और तगड़े कर्ज के बोझ के बीच ये कैसे लड़ पाएगा. ऐसे में बड़ा सवाल ये नहीं कि पाकिस्तान लड़ सकता है या नहीं, बल्कि ये है कि क्या वह भारत से युद्ध करने का जोखिम उठा सकता है.
ये सवाल इसलिए भी खड़े हो रहे हैं, क्योंकि Pakistan Debt लगातार बढ़ता जा रहा है. आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं. World Economics के मुताबिक, पाकिस्तान की जीडीपी (Pakistan GDP) 350 अरब डॉलर है. लेकिन इसपर कुल बाहरी कर्ज इसका 42 फीसदी के आसपास है. बड़ी बात ये की पाकिस्तान पर कुल कर्ज में 85 फीसदी हिस्सा बाहरी कर्ज का है.

China का बड़ा कर्जदार है PAK
पाकिस्तान एक ओर जहां अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का पांचवां सबसे बड़ा कर्जदार है, तो वहीं World Bank और एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से भी उसे बड़ा कर्ज मिला है. हालांकि, पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कर्ज देने के मामले में चीन (China) सबसे आगे है. नवंबर 2023 तक पाकिस्तान पर चीन का कर्ज 68.91 अरब डॉलर है. हालांकि, वर्ल्ड बैंक की 2024 की इंटरनेशनल डेब्ट रिपोर्ट को देखें, तो पाकिस्तान के कुल बाहरी ऋण में चीन की हिस्सेदारी में मामूली गिरावट जरूर आई है और ये घटकर 22 फीसदी रह गई, जो 2023 में 25 फीसदी थी.
आईएमएफ ने पाकिस्तान 7 अरब डॉलर का कर्ज दिया है, जो 1958 के बाद से उसका 24वां बेलआउट पैकेज है. तो विश्व बैंक ने विभिन्न कार्यक्रमों के लिए 108 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी है. यहां ये सवाल भी है कि डगमगाई इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए ये कर्ज मिला है, तो क्या युद्ध के लिए भी पाकिस्तान को बाहर कर्ज मिल पाएगा.
चीन की चुप्पी भी पाकिस्तान पर भारी
एक ओर जहां पाकिस्तान भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है, तो दूसरी ओर अपने मित्र देशों और आईएमएफ के आगे हाथ फैलाकर आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा है. हालांकि, युद्ध के हालातों के बीच इन मांगों को लेकर चीन की चुप्पी भी पाकिस्तान के लिए किसी झटके से कम नजर नहीं आ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Pakistan ने फरवरी 2025 में 3.4 अरब डॉलर के कर्ज को पुनर्निर्धारित करने का अनुरोध किया था, लेकिन China Exim Bank ने री-पेमंट जोखिमों का हवाला देते हुए इस पर अनिच्छा जाहिर की है.
इसके साथ ही पाकिस्तान के वित्त मंत्री औरंगजेब ने बीते दिनों एक इंटरव्यू में खुलासा करते हुए बताया है कि पाकिस्तान ने चीन से अपनी मौजूदा स्वैप लाइन 30 अरब युआन से बढ़ाकर 40 अरब युआन करने की अपील की है. लेकिन इसे लेकर भी चीन ने अभी तक चुप्पी साधी रखी है.

आंकड़ों से समझें पाकिस्तान की बर्बादी
पाकिस्तान, भारत से युद्ध लड़ने को पूरी तरह तैयार बता रहा है, लेकिन देश के हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. मौजूदा आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की प्रति व्यक्ति GDPकरीब 1,500 डॉलर है और ये श्रीलंका, बांग्लादेश जैसे देशों से भी ज्यादा गरीब है. जी हां, बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी 2,700 डॉलर, श्रीलंका की 3,800 डॉलर है. मानव विकास सूचकांक (HDI) में भी पाकिस्तान 160वें स्थान पर है, जबकि नेपाल और श्रीलंका जैसे देश 143 और 73वें स्थान पर हैं.
दूसरी ओर पाकिस्तान में लंबे समय से जनता महंगाई की मार से जूझ रही है और खाने-पीने तक को मोहताज है. ऐसे में भारत से युद्ध इनकी परेशानी को और बढ़ाने वाला साबित होगा. बता दें कि बीते वित्त वर्ष औसस महंगाई 24 फीसदी के आस-पास रही थी, तो वहीं अभी भी ये गिरावट के बावजूद लोगों का हाल-बेहाल कर रही है. हालात ये है कि जनता रोटी-दाल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए जूझ रही है. पेट्रोल, गैस और बिजली की कीमतें आसमान छू रही हैं.