पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच भारत के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की है, जिसके बाद खबर है कि ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है.
इस बीच, मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा गया है कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से तेल के दो बड़े टैंकर गुजरे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 5 से 10 मार्च के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद रहते हुए भी भारतीय तेल के दो बड़े जहाज यहां से गुजरे. इन जहाजों पर भारत के 3 मिलियन बैरल तेल थे, जो ईराक और अरब देश से आए.
कहां से लोड़ हुए भारत के दो टैंकर
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच लगभग 55 किलोमीटर चौड़ा एक जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. सूत्रों ने बताया कि भारत आने वाले इन दो टैंकरों को अलग-अलग जगहों से लोड किया गया था. एक टैंकर को दक्षिणी इराक में स्थित अल-बसरा तेल टर्मिनल से लोड किया गया था, जबकि दूसरे को सऊदी अरब के पूर्वी तट से लोड किया गया था.
ईरान के विदेश मंत्री से हुई बात
बुधवार को भारत आ रहे जहाज पर हमले की खबर आने के बाद, इंडिया टुडे के सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी तालमेल बिठाया है. उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की. इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना था. साथ ही ईरान के विदेश मंत्री से भी बातचीत हुई है और होर्मुज मार्ग खुलने की अनुमति मिली है.
भारत आ रहे जहाज पर हमला
गौरतलब है कि बुधवार को भारत आ रहे थाईलैंड के ध्वज वाले एक मालवाहक पोत पर जलडमरूमध्य से गुजरते समय हमला किया गया. इस हमले के कारण जहाज पर आग लग गई और आपातकालीन बचाव अभियान शुरू करना पड़ा, जिससे ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया. वहीं सऊदी अरब ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दरकिनार करते हुए पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का उपयोग करके अपने पश्चिमी तट के बंदरगाह यानबू पर माल ढुलाई बढ़ा दी है.