सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने इनकम टैक्स नियम, 2026 को नोटिफाइ कर दिया है, जिसमें सैलरी कर्मचारियों को दिए जाने वाले अलाउंस और सर्विसेज के लिए एक संशोधित ढांचा पेश किया है. 1 अप्रैल 2026 से यह नए नियम प्रभावी होंगे. यह नियम HRA से लेकर अन्य अलाउंस को भी टैक्सेशन के तहत डिस्क्राइब करता है. आइए जानते हैं इसके तहत क्या-क्या बदलाव होने वाले हैं.
1. मकान किराया भत्ता (HRA) में बदलाव
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, हैदराबाद, पुणे, अहमदाबाद और बेंगलुरु समेत कई शहरों को अब उच्च एचआरए छूट के दायरे में रखा जाएगा. इन शहरों में रहने वाले व्यक्ति अपने वेतन के 50 प्रतिशत तक HRA छूट क्लेम कर सकते हैं, जबकि अन्य स्थानों पर रहने वाले लोग 40 प्रतिशत तक ही क्लेम कर पाएंगे. वहीं नई टैक्स रिजीम के तहत HRA छूट उपलब्ध नहीं है.
2. बच्चों की शिक्षा और अन्य भत्ते
संशोधित नियम के तहत बच्चों के खर्चों से जुड़े भत्तों में बड़ी बढ़ोतरी की गई है. बच्चों का एजुकेशन अलाउंस 100 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह हर बच्चा कर दिया गया है, जो अधिकतम दो बच्चों के लिए लागू रहेगा. इसी तरह हॉस्टल खर्च अलाउंस 300 रुपये से बढ़ाकर 9000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है.
3. कार यूज पर टैक्स नियम
आयकर नियम, 2026 ने कर्मचारियों को आधिकारिक और व्यक्तिगत उपयोग के लिए उपलब्ध कराई गई मोटर कारों के लिए भी टैक्स नियम अपडेट किया गया है.
कंपनी की कार या किराए पर ली गई कार पर खर्च का क्लेम
कंपनी की कार या किराए पर ली गई कार पर कर्मचारी द्वारा खर्च किए गए रकम पर टैक्स क्लेम
इसी तरह, कर्मचारी की कार और कंपनी द्वारा किए गए खर्च पर टैक्स क्लेम
4. घरेलू सेवाओं और यूज पर टैक्स का नया नियम
5. गिफ्ट और वाउचर
अगर किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इनकी कुल वैल्यू 15,000 रुपये से अधिक हो जाती है, तो ये टैक्सेबल इनकम हो जाते हैं.
6. फूड
कार्य समय के दौरान दिए जाने वाले निःशुल्क भोजन और पेय पदार्थ, कैश वाउचर के माध्यम से दिए जाने पर टैक्स फ्री रहते हैं, बशर्ते ये लिमिट 200 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. नए नियम के तहत कर्मचारियों की सरकारी कारों के इस्तेमाल पर भी अतिरिक्त लाभ उपलब्ध हैं. साथ ही, नए टैक्स सिस्टम के तहत फूड कूपन भी उपलब्ध हैं.
7. कटौतियों के लिए आवश्यक प्रमाण
आयकर नियम, 2026 के तहत, पुरानी कर व्यवस्था को चुनने वाले टैक्सपेयर्स को कई कटौतियों का दावा करने के लिए सहायक दस्तावेज देने होते हैं.