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मनमानी की कीमत चुकाएंगे ट्रंप, आज से लौटाएंगे टैरिफ से वसूले गए अरबों डॉलर, क्या भारत पर पड़ेगा असर?

ट्रंप ने सत्ता में आते ही दुनिया भर के देशों से टैरिफ की वसूली शुरू कर दी थी. राष्ट्रपति की ये मुहिम तब औंधें मुंह गिरी जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस टैरिफ को ही अवैध घोषित कर दिया. ट्रंप प्रशासन अब अरबों डॉलर की इस वसूली को वापस करेगा.

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ट्रंप के टैरिफ को US सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराया था.  (Photo: ITG)
ट्रंप के टैरिफ को US सुप्रीम कोर्ट ने अवैध ठहराया था. (Photo: ITG)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आते ही 'अमेरिका फर्स्ट' की चर्चित नीति को लागू किया और दुनिया के देशों पर मनमाना, मनचाहा टैरिफ लगाना शुरू कर दिया. भारत भी ट्रंप की इस मनमानी का शिकार हुआ. एक समय तो ट्रंप ने भारत पर कुल मिलाकर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया था. 

ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी की वजह से अमेरिका के लाखों-करोड़ों उपभाक्ताओं को दुनिया भर से महंगा सामान खरीदने पर मजबूर होना पड़ा. लेकिन अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आज (सोमवार) से ट्रंप प्रशासन अमेरिकी बिजनेसमैन को अरबों डॉलर का टैरिफ लौटाना शुरू कर दिया है. नीतिगत मामलों पर ये ट्रंप की बड़ी हार है.

यह उन अरबों डॉलर को वापस करने की दिशा में पहला व्यावहारिक कदम है, जिन्हें अब अमान्य हो चुके शुल्कों के तहत वसूला गया था।

अमेरिकी आयातकों से जो टैरिफ ट्रंप प्रशासन ने वसूला था, उसे पाने के लिए अमेरिकी आयातक और ब्रोकर ऑनलाइन आवेदन भर रहे हैं. 

ट्रंप ने टैरिफ तो लगा दिया था लेकिन कानून की कसौटी पर टैरिफ लगाने का ट्रंप का फैसला सही साबित नहीं हुआ. ट्रंप प्रशासन ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act, 1977) का इस्तेमाल करके टैरिफ लगाए थे. 

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इस मामले को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई. लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी 2026 को 6-3 के बहुमत से अपने फैसले में साफ कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता. कोर्ट ने कहा कि  अमेरिकी संविधान का Article I, Section 8 टैरिफ लगाने का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को देता है. राष्ट्रपति को शांतिकाल में टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं है. 

जिन कंपनियों, आयातकों को ट्रंप सरकार से टैरिफ रिफंड चाहिए उन्हें उन सामानों की पहचान करते हुए घोषणाएं दाखिल करनी होंगी, जिन पर उन्होंने आयात कर चुकाए थे. 

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार मंज़ूर किए गए दावों का रिफ़ंड 60 से 90 दिनों के भीतर मिलने की उम्मीद है, हालांकि तकनीकी और प्रक्रियागत चुनौतियों के कारण इस प्रक्रिया में ज़्यादा समय भी लग सकता है. 

सरकार रिफ़ंड को अलग-अलग चरणों में जारी करने की योजना बना रही है, जिसमें हाल ही में चुकाए गए टैरिफ भुगतानों को पहले प्राथमिकता दी जाएगी. 

रिफंड के लिए ट्रंप प्रशासन ने पोर्टल लॉन्च किया

अमेरिकी वेबसाइट Axios ने बताया कि रिफंड पोर्टल की शुरुआत प्रशासन द्वारा अदालत के उन आदेशों का पालन करने का पहला चरण है, जिनके तहत अरबों डॉलर के टैरिफ और ब्याज की भरपाई करनी है. 

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उम्मीद है कि रिफंड का यह प्रयास US के इतिहास में टैरिफ की सबसे बड़ी वापसी बन जाएगा. अदालती फाइलिंग से पता चलता है कि 3,30,000 से अधिक आयातकों ने 53 मिलियन से अधिक शिपमेंट पर अनुमानित $166 बिलियन का टैरिफ चुकाया था. रिफंड के लिए अमेरिकी सरकार बारीकी से सभी दावों की जांच कर रही है. 

क्या भारत के व्यापारी इस वापसी के हकदार हैं?

 भारत के एक्सपोर्टर्स इस टैरिफ रिफंड के सीधे हकदार नहीं हैं. यह रिफंड केवल  Importer of Record यानी उन अमेरिकी कंपनी या यूनिट्स को दिया जाएगा जो US Customs and Border Protection (CBP) के पास एंट्री फाइल करती थीं और टैरिफ का पेमेंट सीधे करती थीं. भारत से सामान निर्यात करने वाले ज्यादातर भारतीय व्यापारी FOB (Free on Board) या CIF (Cost, Insurance, Freight) टर्म्स पर शिपमेंट करते हैं, जिसमें अमेरिकी खरीदार ही Importer of Record होता है. टैरिफ का बोझ अमेरिकी इंपोर्टर पर पड़ता था, इसलिए रिफंड भी उसी को जाएगा. 
 

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