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बेंगलुरु vs नोएडा या गुरुग्राम? इस एक वजह से छिड़ी बहस, अब IT कंपनियों के लिए बेहतर कौन?

बेंगलुरु में बाढ़ के हालात उत्पन्न होने से आईटी और बैंकिंग कंपनियों को एक दिन में 225 करोड़ रुपये के नुकसान की खबरें आ रही हैं. आउटर रिंग रोड कंपनीज एसोसिएशन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई को पत्र लिखकर इसका हवाला दिया है.

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बाढ़ से बेहाल हुआ आईटी हब
बाढ़ से बेहाल हुआ आईटी हब

Bengaluru Flood: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) को शानदार मौसम से ज्यादा आईटी इंडस्ट्री के हब के रूप में जाना जाता है. यहां तक कि इस शहर को भारत का 'सिलिकॉन वैली' भी बताया जाता रहा है. पिछले कुछ दिनों से यह खूबसूरत बेहाल हुआ पड़ा है. लगातार हो रही भारी बारिश (Bengaluru Rain) ने शहर के कई हिस्सों को तालाब बना दिया है. इसके कारण सड़कों पर गाड़ियों की जगह नाव चलाने के हालात उत्पन्न हो गए हैं. लोगों को उनके घरों से ट्रैक्टरों से रेस्क्यू किया जा रहा है और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यही ऑफिस तक पहुंचने की सवारी है. इस हालात ने देश में एक नई बहस छेड़ दी है कि कौन सा शहर आईटी कंपनियों के लिए बेहतर है.

लोग बता रहे नोएडा को बेंगलुरु से बेहतर

इंटरनेट पर पिछले कुछ दिनों से बहस तेज हो चली है लोग बेंगलुरु को सिलिकॉन वैली कहे जाने पर सवाल उठा रहे हैं. इसके साथ ही यूजर्स नोएडा और गुरुग्राम जैसे शहरों को आईटी इंडस्ट्री के लिए बेंगलुरु से बेहतर विकल्प बता रहे हैं. Appinventiv में हेड ऑफ गवर्नमेंट रिलेशंस आयुष गुप्ता नोएडा का एक स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए इस बहस का हिस्सा बनते हैं. वह तस्वीर के साथ लिखते हैं, 'मुझे यह जानकर कोई आश्चर्य नहीं होगा कि बेंगलुरु बेस्ड ज्यादातर आईटी कंपनियां जल्दी ही नोएडा शिफ्ट हो जाएं. बेंगलुरु में बाढ़ की स्थिति है. कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम फेल होने से कई मोर्चे पर नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. ट्रैफिक बड़ी समस्या है. बेसिकली बेंगलुरु का सिर्फ मौसम ही अच्छा है.'

इसके आगे वह नोएडा की तारीफ करने लगते हैं. वह कहते हैं, 'दूसरी ओर नोएडा को देखें  तो यह तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह शहर बहुत अच्छे से प्रबंधित भी है, चाहे ट्रैफिक के घंटे हों या बारिश या इंफ्रास्ट्रक्चर.' गुप्ता नोएडा के इस बदलाव के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार के पिछले पांच साल के कार्यकाल को श्रेय देते हैं.

स्टार्टअप्स के लिए गुरुग्राम बेहतर

वहीं एक अन्य यूजर ने स्टार्टअप्स के लिए गुरुग्राम को बेंगलुरु से बेहतर शहर बताकर अलग बहस छेड़ दी. यूजर का गुरुग्राम के बारे में कहना है कि यहां से एयरपोर्ट महज 20 मिनट की दूरी पर है, आसानी से कैब मिल जाते हैं और बेंगलुरु से तुलना करें तो मेट्रो कनेक्टिविटी काफी बेहतर है. यूजर आगे लिखता है, 'आप कमेंट में लिस्ट में नाम जोड़ सकते हैं और मुझे बता सकते हैं कि बेंगलुरु क्यों बेहतर है. हालांकि जो भी है, मैं वहां नहीं जा रहा.' एक यूजर ने तो इस बात पर आश्चर्य जाहिर किया कि बेंगलुरु बनाम कोई अन्य शहर बाजार में आई नई बहस है, वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल किया कि बेंगलुरु में नाव की सुविधा मिल जा रही है.

क्वॉइनस्विच कुबेर ने उठाया ये सवाल

क्वॉइनस्विच कुबेर के अंकित वेंगुरेलेकर इन सब बातों के बीच ऐसे हालात में कर्मचारियों की बेहतर सुनिश्चित करने की बात करते हैं. वह लिखते हैं, 'बेंगलुरु में बाढ़ की स्थिति है और लाखों लोग बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. कुछ लोग फ्लाईओवर्स पर से ही काम कर रहे हैं. आखिर लोग काम को लेकर इतने परेशान क्यों हैं?' उन्होंने आगे कंपनियों और मैनेजर्स से सवाल किया कि उन्होंने इस हालात में अपने कर्मचारियों की बेहतरी सुनिश्चित करने के क्या उपाय किए हैं?

एक दिन में कंपनियों के डूबे इतने करोड़

आपको बता दें कि बेंगलुरु में बाढ़ के हालात उत्पन्न होने से आईटी और बैंकिंग कंपनियों को एक दिन में 225 करोड़ रुपये के नुकसान की खबरें आ रही हैं. आउटर रिंग रोड कंपनीज एसोसिएशन ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई को पत्र लिखकर इसका हवाला दिया है. संगठन ने पत्र में कहा है कि सिर्फ आउटर रिंग रोड कॉरिडोर में आईटी और बैंकिंग सेक्टर की कंपनियों में 50 हजार से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं. ये कंपनियां सालाना 22 मिलियन डॉलर रेवेन्यू जेनरेट करती हैं. संगठन ने कहा कि इस कॉरिडोर में खस्ताहाल इंफ्रा के चलते कंपनियों को परेशानियां हो रही हैं. सिर्फ 20 अगस्त को आउटर रिंग रोड पर बाढ़ की हालत उत्पन्न होने से कर्मचारी 05 घंटे से ज्यादा सड़क पर फंसे रहे, जिससे कंपनियों को 225 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.

 

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