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बिज़नेस न्यूज़

Air India के बाद इस साल इन आधा दर्जन से ज्यादा सरकारी कंपनियों को बेचने-विनिवेश की तैयारी

17 साल में पहली बार किसी सरकारी कंपनी का सफल निजीकरण
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एअर इंडिया की बिक्री (Air India sale) के साथ ही पिछले 17 साल में पहली बार किसी सरकारी कंपनी का सफल निजीकरण हुआ है. इसके पहले साल 2003-04 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार निजीकरण में सफल हुई थी. इससे इस बात की संभावना बढ़ी है कि सरकार अब अपने निजीकरण और विनिवेश लक्ष्य पर तेजी से आगे बढ़ेगी. इस वित्त वर्ष 2021-22 में यानी मार्च 2022 तक मोदी सरकार की योजना आधा दर्जन से ज्यादा कंपनियों के निजीकरण या विनिवेश की है. (फाइल फोटो)

मोदी सरकार निजीकरण की पक्षधर
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मोदी सरकार ने शुरू से ही सुधार उन्मुख और निजीकरण की पक्षधर सरकार की छवि बनाई है. सरकार के नीति नियंताओं का मानना है कि कई सेक्टर ऐसे हैं जिनमें सरकारी कंपनी की जरूरत नहीं है. सरकार को बिजनेस में नहीं होना चाहिए. इसी तरह लगातार घाटे में चल रही कंपनियों का निजीकरण या विनिवेश कर देना ही बेहतर है. कुछ महीने पहले निवेश और लोक संपत्त‍ि प्रबंधन (DIPAM)  सचिव तुहिन कांत पांडे ने कहा था कि सरकार का विनिवेश कार्यक्रम पटरी पर लौट आया है, जो कि कोरोन की दूसरी लहर की वजह से ठप पड़ गया था. (फाइल फोटो)

विनिवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
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सरकार ने इस वित्त वर्ष में विनिवेश से 1.75 लाख करोड़ रुपये हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है. लेकिन अभी तक सरकार को Axis Bank, एनएमडीसी, हुडको आदि में हिस्सेदारी की बिक्री से महज 8,369 करोड़ रुपये और हाल में एअर इंडिया की बिक्री से करीब 18 हजार करोड़ रुपये मिले हैं. इस तरह अभी तक करीब 26,369 हजार करोड़ रुपये ही जुटाया जा सका है. (फाइल फोटो)

निजीकरण की प्रक्रिया तेज
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तुहीन कांत पांडे ने बताया था कि इस वित्त वर्ष में ही यानी मार्च 2022 तक भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन BPCLका निजीकरण कार्य पूरा कर लिया जाएगा. इसके अलावा सरकार श‍िपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, BEML, पवन हंस और नीलांचल इस्पात निगम (Neelachal Ispat Nigam) के निजीकरण की प्रक्रिया भी इस साल पूरा कर लेना चाहती है. इनमें कई कंपनियां रुचि दिखा रही हैं और इनकी बिक्री के लिए प्रक्रिया चल रही है. इनमें दो पीएसयू बैंकों और एक बीमा कंपनी का भी निजीकरण किया जाना है. हालांकि ये बैंक कौन से होंगे अभी इनका खुलासा सरकार ने नहीं किया है. (फाइल फोटो: PIB)

बजट में वित्त मंत्री ने किया था ऐलान
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इसी तरह IDBI Bank के विनिवेश प्रक्रिया को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है. इस वित्त वर्ष के अंत तक इसे भी कर देने का लक्ष्य है. पिछले छह साल में सरकार सरकारी कंपनियों के विनिवेश से करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये जुटा चुकी है. इस वित्त वर्ष के अंत तक सरकार एलआईसी का कुछ हिस्सा बेचने के लिए आईपीओ लेकर आएगी. सरकार ने Container Corporation of India (Concor) को भी बजट के दौरान आईपीओ यानी लिस्टिंग की सूची में रखा था. लेकिन इस पर कोई प्रगति नहीं हो पाई. इसलिए यह साफ है कि इस वित्त वर्ष में यह नहीं हो पाएगा. (फाइल फोटो)

एलआईसी का विनिवेश इसी साल
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एलआईसी का विनिवेश: सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का विनिवेश इस वित्त वर्ष के अंत यानी मार्च 2022 तक कर लेने का लक्ष्य है. ऐसा अनुमान है कि सरकार इसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेचकर 80 हजार करोड़ से 1 लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती है. यह भारतीय शेयर बाजार का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है. इसका वैल्यूशन 8 से 10 लाख करोड़ रुपये का हो सकता है. यानी अगर सरकार ने इसकी 10 फीसदी हिस्सेदारी बेची और वैल्यूएशन उच्च स्तर पर रहा तो अकेले एलआईसी से ही एक लाख करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं. (फाइल फोटो)

BPCL  का निजीकरण
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BPCL की बिक्री: भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) का सरकार पूरी तरह से निजीकरण करने जा रही है. इसके लिए दिसंबर तक फाइनेंश‍ियल बिड आमंत्रित किए जा सकते हैं. इसके लिए वेदांता, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट और थ‍िंक गैस जैसी कंपनियों ने रुचि दिखाई है. इसमें केंद्र सरकार अपनी पूरी 52.98% हिस्सेदारी बेच सकती है जिसकी मार्केट वैल्यू करीब 52,200 करोड़ रुपये है. (फाइल फोटो)

CELकी बिक्री के लिए प्रयास तेज
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सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड: एअर इंडिया के सफल निजीकरण के बाद अब मोदी सरकार ने एक और सरकारी कंपनी सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की बिक्री के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं. सरकार को इस कंपनी की बिक्री के लिए फाइनेंशियल बिड हासिल हो गए हैं. वित्त मंत्रालय ने यह जानकारी दी है कि सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (CEL) की 100 फीसदी हिस्सेदारी और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर करने के लिए सरकार को फाइनेंश‍ियल बिड हासिल हो गया है.(फाइल फोटो)

आईडीबीआई बैंक का निजीकरण होगा
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आईडीबीआई बैंक का निजीकरण: कैबिनेट ने IDBI बैंक में रणनीतिक विनिवेश और मैनेजमेंट कंट्रोल ट्रांसफर के लिए मंजूरी दे दी है. इस बैंक में केंद्र सरकार और एलआईसी की कुल मिलाकर 94 फीसदी हिस्सेदारी है. एलआईसी की 49.24 फीसदी और सरकार की 45.48 फीसदी. इसके अलावा 5.29 फीसदी हिस्सेदारी अन्य की है. वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2021-22 का बजट पेश करते हुए कहा था कि IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया मौजूदा वित्त वर्ष में ही पूरी होगी. (फाइल फोटो)

SCI का निजीकरण होगा
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SCI का निजीकरण: Shipping Corp of India (SCI) का भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है. इसमें भी सरकार अपनी पूरी 63.75 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है. तुहीन कांत पांडे ने बताया था कि इसके लिए भी कई कंपनियों ने रुचि दिखाई है. इसमें तीन कंपनियों का नाम फाइनल किया गया है जिनके बीच प्रतिस्पर्धा होगी. ये कंपनियां हैं-अमेरिका की Safesea, हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर और रवि मल्होत्रा के नेतृत्व वाला एक कंसोर्टियम. रवि मल्होत्रा SCI में काम कर चुके हैं. (फाइल फोटो)

मार्च 2022 से पहले बिक्री का लक्ष्य
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Pawan Hans का निजीकरण: सरकार पिछले कई साल से हेलीकॉप्टर बनाने वाली कंपनी पवन हंस (Pawan Hans Limited) से बाहर जाना चाहती है, लेकिन इसका निजीकरण कायमाब नहीं हो पा रहा. अब सरकार ने मार्च 2022 से पहले इसकी बिक्री का लक्ष्य रखा है. पवन हंस के निजीकरण के लिए भी सरकार को कई कंपनियों से बिड मिला है. इसमें सरकार अपनी हिस्सेदारी की रणनीतिक बिक्री करेगी और मैनेमेंट कंट्रोल भी निजी कंपनी को दिया जाएगा. इसमें फिलहाल सरकार की 51 फीसदी हिस्सेदारी है और 49 फीसदी हिस्सेदारी सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ओएनजीसी की है. ओएनजीसी ने भी अपना हिस्सा बेचने का फैसला किया है. (फाइल फोटो)

नीलांचल इस्पात निगम का भी निजीकरण
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नीलांचल इस्पात निगम की बिक्री: इस वित्त वर्ष के अंत तक नीलांचल इस्पात निगम का भी निजीकरण किया जाना है. Neelachal Ispat Nigam Ltd (NINL) के निजीकरण के लिए भी सरकार को कई कंपनियों से ईओआई मिला है. इसका भी मार्च 2022 से पहले निजीकरण किया जाना है. यह असल  में केंद्र सरकार की कई  कंपनियों MMTC, NMDC, BHEL, MECON और ओडिशा सरकार की दो कंपनियों OMC और IPICOL के बीच संयुक्त उद्यम है. (फाइल फोटो)

BEML का होगा विनिवेश
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BEML का विनिवेश: इस वित्त वर्ष के अंत तक सरकार ने BEML के भी विनिवेश का लक्ष्य रखा है, जिसे पहले भारत अर्थ मूवर्स के नाम से जाना जाता था. 1964 में स्थापित यह कंपनी रेल के कोच और स्पेयर पार्ट्स तथा माइनिंग इक्विपमेंट बनाती है. सरकार की इसमें करीब 54.03% हिस्सेदारी है जिसमें से वह सिर्फ 26% हिस्सेदारी बेचेगी. इसके लिए कई निजी कंपनियों ने रुचि दिखाई है. (फाइल फोटो)