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वो फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजती, चैटिंग करती, फिर घर बुलाती... मुलाकात के बीच कर देती थी खेल, शातिर महिला की कहानी

एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई. सामने खूबसूरत प्रोफाइल फोटो थी. बात शुरू हुई तो चैटिंग का सिलसिला चलने लगा. अनजान शख्स दोस्त बन गया और दोस्ती भरोसे में बदल गई. फिर एक दिन महिला ने मिलने के लिए घर बुलाया. जैसे ही शख्स घर पहुंचता, कुछ ही देर में उसकी नकदी और जेवरात गायब हो जाते. पटना में सामने आई यह कहानी एक ऐसी शातिर महिला और उसके पति की है, जिन्होंने सोशल मीडिया की दोस्ती को लूट का हथियार बना लिया था.

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महिला के पास से 10 लाख रुपये और लाखों के जेवरात बरामद. (Photo: ITG)
महिला के पास से 10 लाख रुपये और लाखों के जेवरात बरामद. (Photo: ITG)

सोशल मीडिया पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आई. बातचीत शुरू हुई. फिर चैटिंग बढ़ी. कुछ दिनों बाद दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि मुलाकात की बात होने लगी. सामने वाली महिला बेहद भरोसेमंद लग रही थी. बातचीत में अपनापन था, व्यवहार में आत्मीयता थी और मिलने की बात भी बेहद सामान्य. लेकिन जिस शख्स ने इस दोस्ती को सच्चा समझा, उसे क्या पता था कि वह एक ऐसे जाल में फंसने जा रहा है, जहां से निकलते-निकलते उसकी जेब खाली हो जाएगी.

पटना में सामने आया यह मामला किसी क्राइम थ्रिलर फिल्म की कहानी जैसा लगता है. यहां सोशल मीडिया के जरिए लोगों से दोस्ती कर उन्हें घर बुलाया जाता था और फिर उनसे नकदी व जेवरात लूट लिए जाते थे.

मामले का खुलासा तब हुआ, जब रूपसपुर थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पुलिस से शिकायत की. पीड़ित ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए उसकी पहचान एक महिला से हुई थी. दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे भरोसा बन गया.

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कुछ समय बाद महिला ने उसे मिलने के लिए बुलाया. पीड़ित को लगा कि वह एक सामान्य मुलाकात के लिए जा रहा है, लेकिन वहां पहुंचते ही पूरी कहानी बदल गई. आरोप है कि महिला और उसके पति ने मिलकर उससे नकदी और ज्वेलरी छीन ली. जब तक पीड़ित कुछ समझ पाता, तब तक वह ठगी और लूट का शिकार बन चुका था.

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घटना की जानकारी मिलते ही रूपसपुर थाना पुलिस हरकत में आ गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पुलिस अधीक्षक के निर्देश में एक टीम बनी. पुलिस ने जांच शुरू की. इस दौरान पुलिस को कई सुराग मिले. मोबाइल कॉल डिटेल, सोशल मीडिया कॉन्टैक्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर टीम आरोपियों तक पहुंच गई. पुलिस ने एक्शन लेते हुए महिला और उसके पति को गिरफ्तार कर लिया.

पूछताछ के दौरान जो जानकारी सामने आई, उसने पुलिस को भी चौंका दिया. पुलिस के अनुसार, महिला और उसका पति पहली बार इस तरह की वारदात को अंजाम नहीं दे रहे थे. पूछताछ में पता चला कि दोनों पहले भी इसी तरह लोगों को सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाते थे. उनका तरीका लगभग एक जैसा था. पहले सोशल मीडिया पर संपर्क. फिर दोस्ती. इसके बाद भरोसा. और अंत में मुलाकात के नाम पर बुलाकर लूट. जांच में यह भी सामने आया कि रूपसपुर थाने में इनके खिलाफ पहले से भी कई मामले दर्ज हैं. 

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मामले में एक और मोड़ तब आया, जब पुलिस ने छीने गए जेवरात की कड़ी को खंगालना शुरू किया. जांच के दौरान पता चला कि लूटे गए गहनों को बेचने या ठिकाने लगाने की कोशिश की गई थी. पुलिस ने उन जेवरातों को खरीदने वाले व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया. इस तरह इस पूरे नेटवर्क में शामिल तीसरा आरोपी भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया.

पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 10 लाख रुपये कैश और लाखों रुपये कीमत के जेवरात बरामद किए हैं. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर इस गैंग ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया. फिलहाल पुलिस ने महिला समेत कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

पटना का यह मामला उन लोगों के लिए चेतावनी है जो सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से जल्दी घुलमिल जाते हैं. एक फ्रेंड रिक्वेस्ट, कुछ दिनों की बातचीत और भरोसे का रिश्ता कब जाल में बदल जाए, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है.

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