बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे और विधायक चेतन आनंद को राज्य स्तरीय कार्यान्वयन समिति में शामिल कर लिया है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब आनंद मोहन लगातार अपने बेटे को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर असंतोष जता रहे थे.
कैबिनेट सचिवालय विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य स्तरीय कार्यक्रम कार्यान्वयन समिति का पुनर्गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे. वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को इसका कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है.
समिति में दो उपाध्यक्ष भी हुए नियुक्त
समिति में दो उपाध्यक्ष भी नियुक्त किए गए हैं, जिनमें बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी और जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा शामिल हैं. दोनों को राज्य मंत्री स्तर की सुविधाएं और दर्जा मिलेगा.
समिति में इन्हें भी मिली जगह
कुल 16 सदस्यीय इस समिति में चेतन आनंद के साथ-साथ मोकामा के बाहुबली नेता और जदयू विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी जगह दी गई है. इसके अलावा ललन कुमार मंडल, संगीता कुमारी, भारत बिंद, मुरारी प्रसाद गौतम, सिद्धार्थ सौरभ, प्रहलाद यादव, जगन्नाथ ठाकुर, राजेश कुमार वर्मा, भारती मेहता और चंदन कुमार सिंह को भी सदस्य बनाया गया है. सभी सदस्यों को उप मंत्री स्तर का दर्जा दिया गया है, जबकि उपाध्यक्षों को राज्य मंत्री का दर्जा मिलेगा.
टीम में बैलेंस बनाने की कोशिश
इस राजनीतिक कदम को एनडीए के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. खासकर उस समय जब आनंद मोहन ने सार्वजनिक रूप से अपने बेटे को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर नाराजगी जताई थी और नीतीश कुमार के करीबी नेताओं पर तीखे बयान दिए थे.
हालांकि चेतन आनंद को कैबिनेट में जगह नहीं मिली है, लेकिन इस समिति में शामिल किए जाने के बाद उन्हें सरकारी दर्जा और प्रशासनिक भूमिका मिल गई है, जिसे राजनीतिक संतुलन साधने की बड़ी कोशिश माना जा रहा है.