'जब लक्ष्य तुम्हें दिखाई पड़ रहा है बेटा, तो मंजिल जरूर आसान हो जाएगी…' ऐसी प्रेरणादायक बातें बोलने वाला रंजीत खुद ही एक झूठी कहानी का किरदार निकला. बिहार के शेखपुरा जिले में रंजीत ने खुद को यूपीएससी परीक्षा में चयनित बताकर न सिर्फ लोगों की वाहवाही लूटी, बल्कि कई जगह सम्मान भी हासिल कर लिया. लेकिन कुछ ही दिनों बाद जब सच्चाई सामने आई तो पूरे इलाके में हैरानी फैल गई.
दरअसल, शेखपुरा के माहुली थाना क्षेत्र के फतेहपुर गांव का रहने वाला रंजीत कुमार खुद को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा में 440वीं रैंक हासिल करने वाला उम्मीदवार बता रहा था. यह खबर जैसे ही गांव और आसपास के इलाकों में फैली, लोग उसे बधाई देने पहुंचने लगे. जगह-जगह कार्यक्रम हुए, माला पहनाकर सम्मानित किया गया और मंच से उसे युवाओं के लिए प्रेरणा बताया गया. लेकिन जब रिजल्ट की असली सूची सामने आई तो पता चला कि 440वीं रैंक किसी और अभ्यर्थी को मिली है. इसके बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया.
जब सफलता की कहानी फैल गई
UPSC देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है. हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में बैठते हैं और उनमें से कुछ ही सफल हो पाते हैं. ऐसे में जब किसी गांव या छोटे शहर से किसी के चयन की खबर आती है तो वह पूरे इलाके के लिए गर्व का विषय बन जाती है. शेखपुरा में भी कुछ ऐसा ही हुआ. जैसे ही खबर फैली कि फतेहपुर गांव के रंजीत कुमार ने यूपीएससी में 440वीं रैंक हासिल की है, गांव में खुशी का माहौल बन गया. लोगों ने इसे बड़ी उपलब्धि मानते हुए रंजीत को सम्मानित करना शुरू कर दिया. कई जगह कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां उसे माला पहनाकर और शॉल ओढ़ाकर सम्मान दिया गया.
देता था मोटिवेशनल स्पीच
इन कार्यक्रमों में रंजीत कुमार युवाओं को प्रेरित करने वाले भाषण भी देने लगा. वह कहता था कि जीवन का सफर लंबा होता है, परिश्रम का लक्ष्य बड़ा होता है. जब लक्ष्य तुम्हें दिखाई पड़ रहा है तो मंजिल जरूर आसान होगी. लेकिन अगर लक्ष्य दिखाई ही नहीं पड़ रहा तो जितना भी मेहनत कर लो, कुछ हासिल नहीं होगा. उसकी बातें सुनकर लोग प्रभावित हो रहे थे. कई छात्र उसे प्रेरणा के रूप में देखने लगे थे. रंजीत अक्सर मेहनत, संघर्ष और आत्मविश्वास की बातें करता था. वह यह भी कहता था कि इंसान को इतना मेहनत करना चाहिए कि किस्मत भी एक दिन कह उठे कि सफलता उसी की थी.
पुलिस और नेताओं ने भी किया सम्मान
रंजीत के चयन की खबर इतनी तेजी से फैली कि स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी उससे प्रभावित हो गए. बताया जाता है कि इलाके के पूर्व विधायक विजय यादव, स्थानीय मुखिया और यहां तक कि माहुली थाना की पुलिस ने भी उसे सम्मानित किया. एक कार्यक्रम में तो बाकायदा मंच सजाकर उसका अभिनंदन किया गया और उसे युवाओं के लिए प्रेरणा बताया गया. इन आयोजनों में हजारों रुपये भी खर्च किए गए.
असली रिजल्ट ने खोली पोल
लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिक सकी. सोमवार की शाम जब कुछ लोगों ने यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर परिणाम की जांच की तो मामला संदिग्ध लगा. सूची में 440वीं रैंक के सामने जिस उम्मीदवार का नाम था, वह कर्नाटक राज्य का रंजीथ था. यह देखकर लोगों को शक हुआ. जब पूरी जानकारी खंगाली गई तो साफ हो गया कि शेखपुरा का रंजीत कुमार उस रैंक को अपना बताकर लोगों को गुमराह कर रहा था.
खुलासा होते ही गायब हुआ युवक
जैसे ही यह बात सामने आई कि यूपीएससी में 440वीं रैंक रंजीत कुमार की नहीं है, इलाके में चर्चा तेज हो गई. पूर्व मुखिया सरफराज आलम ने बताया कि जब फर्जीवाड़े की जानकारी मिली तो लोगों ने रंजीत से जवाब मांगने की कोशिश की. लेकिन उसके बाद से वह घर छोड़कर गायब हो गया. बताया जा रहा है कि उसका मोबाइल भी बंद है और फिलहाल उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है.
पुलिस को भी हुआ था शक
माहुली थाना के थानाध्यक्ष ने बताया कि उन्हें भी सूचना मिली थी कि इलाके का एक युवक यूपीएससी में सफल हुआ है. इस सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे थाना बुलाकर सम्मानित भी किया था. लेकिन बाद में जब कुछ लोगों ने परिणाम पर सवाल उठाए तो पुलिस ने रंजीत से उसका प्रवेश पत्र और अन्य दस्तावेज दिखाने को कहा. इसके बाद से वह संपर्क से बाहर हो गया.
दिल्ली भागने की चर्चा
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद रंजीत कुमार दिल्ली की ओर निकल गया है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन गांव में लोग उसके बारे में तरह-तरह की बातें कर रहे हैं. कई लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर शुरुआत में ही सही जानकारी दी जाती तो शायद मामला इतना बड़ा नहीं बनता.
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
UPSC जैसी बड़ी परीक्षा के नाम पर झूठा दावा करने का यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी बिहार में इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है. कुछ समय पहले आकांक्षा सिंह नाम की एक अभ्यर्थी ने भी खुद को यूपीएससी में सफल बताया था. बाद में पता चला कि असली चयन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की आकांक्षा सिंह का हुआ था, जिन्होंने 301वीं रैंक हासिल की थी. उस समय यूपीएससी को भी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह स्पष्ट करना पड़ा था कि वास्तविक परिणाम किस उम्मीदवार का है.
यूपी की शिखा ने भी बोला था झूठ
इसी तरह का एक मामला यूपी के बुलंदशहर से भी सामने आया. यहां की शिखा ने खुद को 113 वीं रैंक पर बताया. बात में खुद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अपनी गलती स्वीकार की है. उन्होंने बताया कि रिजल्ट आने के बाद उन्होंने UPSC की पीडीएफ सूची में अपना नाम देखा और खुशी से भावुक हो गईं. उस समय उन्होंने रोल नंबर की जांच नहीं की. शिखा के अनुसार, जिस उम्मीदवार का चयन हुआ है वह दूसरी शिखा हैं. हमारा नाम एक जैसा है. मैंने सिर्फ नाम देखा और रोल नंबर नहीं देखा. यही मेरी गलती थी.
(रिपोर्ट: अरुण कुमार)