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'नीतीश कुमार की बुद्धि...', बिहार CM के राज्यसभा जाने के फैसले पर राबड़ी देवी ने साधा निशाना

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब दिल्ली जाने की तैयारी में हैं, लेकिन उनके इस फैसले पर पूर्व सीएम राबड़ी देवी के बयान के बाद बिहार की सियासत गरमा गई है.

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राबड़ी देवी का सीएम नीतीश पर तीखा तंज (File Photo: ITG)
राबड़ी देवी का सीएम नीतीश पर तीखा तंज (File Photo: ITG)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा के बीच प्रदेश की सियासत तेज हो गई है. लालू प्रसाद यादव की पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस फैसले पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नीतीश कुमार खुद राज्यसभा नहीं जा रहे हैं, बल्कि भाजपा उन्हें वहां भेज रही है. उन्होंने यहां तक कह दिया कि उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है और उन्हें किसी भी हालत में मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहिए.

राबड़ी देवी का तीखा हमला

राजद नेता राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन को लेकर कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार खुद राज्यसभा नहीं जा रहे हैं, बल्कि भाजपा उन्हें वहां भेज रही है. यूं कहें कि उन्हें वहां से भगा रही है.” राबड़ी देवी ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को राज्यसभा नहीं जाना चाहिए और उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं छोड़ना चाहिए. उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है.

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राज्यसभा जाने की इच्छा जता चुके हैं नीतीश

दरअसल, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में राज्यसभा का सदस्य बनने की अपनी इच्छा जाहिर की है. करीब दो दशकों से बिहार की राजनीति में सक्रिय रहने के बाद वे अब संसदीय राजनीति में नई भूमिका निभाना चाहते हैं. बताया जा रहा है कि उनका सपना संसद और विधानमंडल के सभी चार सदनों (लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद) का हिस्सा बनने का है.

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5 मार्च को दाखिल किया नामांकन

सीएम नीतीश कुमार ने 5 मार्च को पटना में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया. बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें खाली हैं, जिनके लिए 16 मार्च को मतदान होना है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अगर सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा पहुंचते हैं, तो वे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं.

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नीतीश कुमार के इस कदम के बाद बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ गई है. विपक्ष लगातार इस फैसले पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन इसे एक सामान्य राजनीतिक फैसला बता रहा है. अब सबकी नजर 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव और उसके बाद बिहार की सत्ता में होने वाले संभावित बदलावों पर टिकी हुई है.

(इनपुट- शुभम लाल)
 

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