बिहार विधानमंडल में सोमवार को पेश किए गए बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में राज्य की अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि और संरचनात्मक बदलावों के संकेत दिए गए हैं, हालांकि कई पुरानी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव के मुताबिक वित्त वर्ष 2024–25 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) चालू कीमतों पर 13.1 प्रतिशत बढ़ा, जो राष्ट्रीय औसत 9.8 प्रतिशत से काफी अधिक है. वास्तविक वृद्धि दर भी मजबूत रही, जिससे संकेत मिलता है कि बिहार की अर्थव्यवस्था “उच्च-वृद्धि पथ” पर है.
मुख्य आर्थिक संकेतक
मजबूत वृद्धि: वास्तविक रूप से GSDP में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिससे बिहार देश के सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले बड़े राज्यों में शामिल हो गया.
प्रति व्यक्ति आय: बिहार की औसत प्रति व्यक्ति आय ₹76,490 रही. पटना जिला ₹1,31,332 की प्रति व्यक्ति आय के साथ सबसे ऊपर रहा. शिवहर, अररिया और सीतामढ़ी सबसे कम आय वाले जिले रहे.
क्षेत्रीय बदलाव: द्वितीयक क्षेत्र (उद्योग और निर्माण) की हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है, जबकि सेवा क्षेत्र पहले की तरह सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है.
निवेश, अवसंरचना और सार्वजनिक वित्त
सर्वेक्षण में जोर दिया गया कि सरकार ने पूंजीगत व्यय और अवसंरचना विकास पर विशेष ध्यान दिया है. खर्च का बड़ा हिस्सा अब सड़कों, सिंचाई, विद्युत और शहरी अवसंरचना जैसी दीर्घकालिक परियोजनाओं पर किया जा रहा है, जिससे पूंजीगत व्यय का हिस्सा बढ़ा है. राज्य की राजस्व संग्रह क्षमता में भी सुधार हुआ है. कर राजस्व का हिस्सा बढ़ने से केंद्र पर निर्भरता कुछ कम होती दिखाई दी.
कृषि और ग्रामीण विकास
कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र अभी भी बिहार की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और 23 प्रतिशत से अधिक योगदान करते हैं. सर्वेक्षण में किसानों के लिए बीज की होम डिलीवरी जैसी योजना और सिंचाई के विस्तार की भी सराहना की गई.
शहरी विकास में बढ़त
शहरी विकास के लिए आवास, नाली एवं जल प्रबंधन और परिवहन बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर निवेश की घोषणा की गई है. पटना मेट्रो रेल परियोजना को शहरी चुनौतियों के समाधान और रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है.
मानव विकास एवं जीवन गुणवत्ता
स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों पर बढ़ा हुआ खर्च सकारात्मक परिणाम दे रहा है. कई मानव विकास संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है, विशेष रूप से बालिकाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में.
क्या हैं स्थायी चुनौतियां?
मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के बावजूद कई चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं. राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले कम प्रति व्यक्ति आय, जिसका समाधान व्यापक आर्थिक सुधारों से ही संभव है. रोजगार सृजन की कमी, बड़ी आबादी अब भी स्व-रोजगार पर निर्भर. जिलों के बीच आर्थिक असमानताएं, जिससे विकास की गति असमान दिखती है.
क्या है सरकार का फ्यूचर प्लान?
सर्वेक्षण के साथ जारी बयान में सरकार ने 2030 तक प्रति व्यक्ति आय को दोगुना करने और एक करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य दोहराया है. यह राज्य के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण को दर्शाता है.
समग्र रूप से, बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 बताता है कि राज्य की अर्थव्यवस्था तेज़ी से आगे बढ़ रही है, जिसे अवसंरचना निवेश, वित्तीय अनुशासन और संरचनात्मक विविधीकरण का समर्थन मिल रहा है. हालांकि, कम प्रति व्यक्ति आय और समावेशी रोजगार सृजन जैसी चुनौतियां अभी भी गंभीर रूप से मौजूद हैं.