scorecardresearch
 

इथेनॉल बनाने में कितना पानी होता है खर्च? स्टडी ने गन्ने को बताया हीरो

भारत में इन दिनों इथेनॉल ब्लेंडिंग पर काफी चर्चा हो रही है. एक चर्चा तो पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा पर है. वहीं दूसरी तरफ चर्चा इथेनॉल बनाने में खर्च होने वाले पानी पर है. इस चर्चा में गन्ने को विलेन बनाया जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि गन्ने से 1 लीटर इथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होता है. अब एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें कहानी कुछ अलग है.

Advertisement
X
सरकार ने हाल में ही E85 और E100 फ्यूल को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया है. (Photo: ITG)
सरकार ने हाल में ही E85 और E100 फ्यूल को लेकर एक नोटिफिकेशन जारी किया है. (Photo: ITG)

भारत में E20 पेट्रोल अब सभी जगहों पर मिल रहा है. यानी पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल मिला हुआ है. वैसे सरकार ने हाल में ही एक ड्राफ्ट E85 और E100 फ्यूल को लेकर भी जारी किया था. जहां एक ओर पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की चर्चा हो रही है, तो वहीं दूसरी तरफ इथेनॉल प्रोड्यूस करने में खर्च होने वाले पानी पर भी बहस छिड़ी हुई है. 

गन्ना आखिरकार कितना पानी कंज्यूम करता है? इंडस्ट्री समर्थित एक नई स्टडी के जरिए इस मुद्दे को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश हो रही है. ये रिपोर्ट ISMA (इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन) और ICAR (इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च) के सहयोग से तैयार की गई है. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि गन्ने की खेती में ज्यादा पानी खर्च होने की जो बातें आम तौर पर कही जाती हैं, वे कई मामलों में बढ़ा चढ़ाकर पेश की गई हैं या भ्रामक हैं. 

गन्ने की खेती में अनाज के कम पानी खर्च होता है 

स्टडी का फोकस गन्ने की तुलना चावल, गेहूं और मक्का जैसी फसलों से करना है. रिजल्ट बताते हैं कि पारंपरिक खेती में 1 किलोग्राम गन्ना उगाने के लिए लगभग 173 लीटर पानी की जरूरत होती है, जबकि ड्रिप इरिगेशन के इस्तेमाल से ये घटकर करीब 114 लीटर रह जाती है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: Ethanol Explained: कार, किसान और कारोबार, इथेनॉल के नशे की 'महागाथा'

वहीं चावल और गेहूं के लिए प्रति किलोग्राम 2,244 लीटर तक पानी की जरूरत हो सकती है, जबकि मक्का के लिए 1,600 लीटर से ज्यादा पानी लगता है. अगर ये दावे सही हैं, तो गन्ने की खेती में गेहूं और चावल के मुकाबले काफी कम पानी लगता है. 

इथेनॉल बनाने में कितना पानी लगता है?

आलोचकों का कहना है कि 1 लीटर इथेनॉल बनाने में लगभग 10 हजार लीटर पानी खर्च होता है. वहीं हाल हुई ये स्टडी इन दावों को नकारती है. इसके मुताबिक, गन्ने से बने इथेनॉल में पारंपरिक सिंचाई के तहत लगभग 2,469 पानी (एक लीटर इथेनॉल बनाने में) खर्च होता है.

वहीं ड्रिप इरिगेशन के साथ यह घटकर लगभग 1,634 लीटर रह जाता है. मक्के पर आधारित इथेनॉल बनाने में लगभग 4,500 लीटर पानी की जरूरत बताई जाती है. यानी गन्ने से इथेनॉल बनाने में कम पानी खर्च होता है. 

सवाल खेती के तरीके पर...

स्टडी में खेती के तरीकों पर भी सवाल उठाया गया है. भारत में अभी भी बड़े पैमाने पर फ्लड इरिगेशन का इस्तेमाल होता है. इससे पानी का बड़ा हिस्सा बर्बाद हो जाता है. इसके उलट ड्रिप इरिगेशन पानी की खपत 15 से 25 फीसदी तक कम करता है और ये पैदावार को भी बढ़ाता है. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: Ethanol Blended Fuel: एथेनॉल ब्लेंड E20 पेट्रोल पर बोले नितिन गडकरी, 'माइलेज होगा थोड़ा कम लेकिन...'

स्टडी में दिए गए फील्ड ट्रायल डेटा के मुताबिक, पारंपरिक तरीके से जहां गन्ने की पैदावार करीब 102 टन प्रति हेक्टेयर होती है, वहीं ड्रिप इरिगेशन से ये बढ़कर लगभग 126 टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच जाती है. इससे एक बड़ा सवाल ये भी उठता है कि दिक्कत गन्ने की खेती में नहीं बल्कि सिंचाई के तरीके में है. 

ये रिपोर्ट ऐसे समय पर आई है, जब भारत में इथेनॉल ब्लेंडिंग को तेजी से बढ़ाया जा रहा है. कच्चे तेल पर देश की निर्भरता को कम करने के लिए पेट्रोल में इथेनॉल को मिलाया जा रहा है. इसमें गन्ने का बड़ा रोल है, जिसे भारत में इथेनॉल तैयार किया जाता है. 

महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भूजल स्तर गिरने की चिंता ने गन्ने की खेती को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है. ये स्टडी इंडस्ट्री की ओर से एक मजबूत काउंटर-नैरेटिव पेश करती है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement