ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले को एक हफ्ता हो गया है. इस युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक ही सीमित नहीं रहेगा. खासकर एशिया के मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट होने वाले वाहनों पर भी इसका असर देखने को मिलेगा. एशियन ऑटोमेकर्स के लिए मिडिल ईस्ट एक बड़ा मार्केट है.
चीनी, भारतीय, साउथ कोरियन और जापानी ऑटोमेकर्स अरबों डॉलर की कार्स मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट करते हैं. एक्सपोर्ट का रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है. मौजूदा हालात को देखते हुए इस बात का डर है कि किसी शिप पर तेहरान हमला कर सकता है.
चीन की बात करें, तो मिडिल ईस्ट चीनी कंपनियों के लिए दूसरा सबसे बड़ा ओवरसीज मार्केट है. साथ ही ये क्षेत्र एशियन कारनिर्माताओं के लिए भी काफी महत्वपूर्ण है. चीनी ऑटोमेकर्स ने 2025 में कुल 83.2 लाख कार्स को विदेशों में शिप किया है. चाइना पैसेंजर कार एसोसिएशन के मुताबिक, इसमें से 13.9 लाख कार्स सिर्फ गल्फ कंट्रीज में भेजी गई हैं.
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वहीं भारत की बात करें, तो साल 2025 में 8.8 अरब डॉलर की कार्स देश से एक्सपोर्ट हुई हैं. इसमें से 25 परसेंट गाड़ियों को मिडिल ईस्ट में भेजा गया है, जिसमें सऊदी अरब प्रमुख है. हुंडई मोटर्स ने 2025 में आधा एक्सपोर्ट तो सिर्फ गल्फ देशों में किया है. टोयोटा भी बड़ी संख्या में मिडिल ईस्ट में एक्सपोर्ट करता है.
रिपोर्ट्स की मानें तो टोयोटा ने 2025 में भारत से 47 करोड़ डॉलर का एक्सपोर्ट किया है, जिसमें से 30 करोड़ डॉलर का एक्सपोर्ट सिर्फ मिडिल ईस्ट में किया गया है. वहीं निसान मोटर्स ने 2025 में भारत से 31.8 करोड़ डॉलर का एक्सपोर्ट किया है.
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इसी तरह से साउथ कोरिया ने साल 2025 में रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर का कार एक्सपोर्ट किया है. इसमें से 5.3 अरब डॉलर की गाड़ियों को मिडिटल ईस्ट भेजा गया है. वहीं जापान की बात करें, तो टोयोटा ने कुल 320,699 वाहनों को जापान से मिडिल ईस्ट एक्सपोर्ट किया है.
इन सभी डेटा से साफ है कि मिडिल ईस्ट कार कंपनियों के लिए एक प्रमुख मार्केट है. चूंकि, मिडिल ईस्ट में इस वक्त अनिश्चितता है और हर तरफ लगातार हमले हो रहे हैं. ऐसे में एक बड़ा रिस्क उस क्षेत्र में एक्सपोर्ट करना है. अगर इस रूट से एक्सपोर्ट करते हुए कोई जहाज हमले का शिकार हो जाता है, तो कंपनियों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा.