
फर्ज़ कीजिए... कोई कार सड़क पर चल रही है. गाड़ी नई है, टेक्नोलॉजी हाई-फाई है और मॉडर्न फीचर्स के नाम पर मोटी रकम खर्च कर खरीदी गई है. अचानक एक हादसा होता है. कोई तगड़ी टक्कर या भिडंत नहीं है, लेकिन कार में आग लग जाती है. लोग मौके पर पहुंचते हैं, कार के भीतर जिंदगी से लड़ता शख्स विंडो पर हाथ मारता है. लोग उसे बचाने के लिए आगे बढ़ते हैं... लेकिन ये क्या कार के दरवाजे में कोई हैंडल ही नहीं है. चीख-पुकार मचती है लेकिन आखिरकार कार में फंसा शख्स दम तोड़ देता है. वजह कार के डोर हैंडल को मैनुअली नहीं खोला जा सकता था.
ये कोई फिल्मी सीन या किसी थ्रीलर उपन्यास की कहानी नहीं है. बल्कि दुनिया भर में कई ऐसे हादसे सामने आए हैं. जहां इलेक्ट्रॉनिक डोर हैंडल (Flus Door Handle) जैसे हाईटेक फीचर के चलते लोगों को अपने जान से हाथ धोना पड़ा है. मॉडर्न कारों में स्टाइल और फ्यूचरिस्टक लुक के नाम पर जो बदलाव किए जा रहे हैं, अब उन पर सवाल उठने लगे हैं. चीन ने सेफ्टी को प्राथमिकता देते हुए इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाले हिडन डोर हैंडल, जिन्हें फ्लश डोर हैंडल (Flush Door Handle) पर रोक लगाने का बड़ा फैसला किया है.
यह फैसला कई गंभीर हादसों के बाद लिया गया है, जिनमें किसी एक्सीडेंट या डोर हैंडल फेल होने के बाद लोग कार के अंदर फंस गए थे. चीन ऐसा करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है.

फ्लश या पॉप-आउट डोर हैंडल को सबसे पहले टेस्ला ने लोकप्रिय बनाया था और आज यह कई इलेक्ट्रिक कारों में आम हो चुके हैं. लेकिन हादसों के दौरान जब गाड़ी में इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई रूक जाती है, तब ये इलेक्ट्रॉनिक हैंडल काम नहीं करते. चीन में कुछ जानलेवा हादसों के बाद यह सामने आया कि दरवाजे नहीं खुल पाए और लोग अंदर फंस गए, जिससे उनकी जान चली गई.
चीन में 1 जनवरी 2027 से बिकने वाली हर कार में अंदर और बाहर दोनों तरफ मैकेनिकल डोर हैंडल होना जरूरी होगा. सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक या हिडन हैंडल वाली कारों की बिक्री की अनुमति नहीं दी जाएगी. यह नियम सभी पैसेंजर कारों पर लागू होगा, हालांकि डिक्की यानी बूट को इससे बाहर रखा गया है.
चीन के उद्योग और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के नियमों के अनुसार, हर पैसेंजर डोर के बाहर कम से कम 6 सेमी लंबा, 2 सेमी चौड़ा और 2.5 सेमी गहरा हिस्सा होना चाहिए, ताकि दरवाजा आसानी से खोला जा सके. कार के अंदर भी दरवाजा खोलने के साफ निर्देश लगाने होंगे, जिनका आकार कम से कम 1x0.7 सेमी होना जरूरी है.
जिन कारों को पहले ही सरकारी मंजूरी मिल चुकी है और जो बाजार में आने वाली हैं, उन्हें डिजाइन बदलने के लिए 2 साल का अतिरिक्त समय दिया जाएगा. इसके बाद उन्हें भी नए सेफ्टी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा. चीन में बेची जाने वाली इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और फ्यूल सेल कारों में हिडन डोर हैंडल का चलन तेजी से बढ़ रहा है. सरकारी अखबार चाइना डेली के आंकड़ों के मुताबिक, चीन में सबसे ज्यादा बिकने वाली टॉप 100 इलेक्ट्रिक कारों में से करीब 60 फीसदी गाड़ियों में ऐसे हैंडल लगे हैं.

टेस्ला पहले से ही फ्लश डोर हैंडल के चलते अमेरिका में जांच के घेरे में है. नवंबर में अमेरिकी एजेंसी नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने टेस्ला के इलेक्ट्रिक डोर हैंडल को लेकर जांच शुरू की थी. शिकायतों में कहा गया कि अचानक हैंडल ने काम करना बंद कर दिया और बच्चों समेत लोग कार के अंदर फंस गए. टेस्ला मॉडल वाई से जुड़ी 9 शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें से चार मामलों में लोगों को बाहर निकलने के लिए कार की खिड़की तोड़नी पड़ी थी.
भारत में भी कई लग्जरी और मास मार्केट कारों में फ्लश या पॉप-आउट डोर हैंडल दिए जा रहे हैं. टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और उसकी ब्रिटिश कंपनी जगुआर लैंड रोवर के कई मॉडल ऐसे हैं जिनमें इस तरह के हैंडल आसानी से देखे जा सकते हैं. हाल ही में लॉन्च की गई टाटा की नई सिएरा और कर्व भी हिडन डोर हैंडल के साथ आई हैं. इसके अलावा किआ ने सेल्टोस और साइरोस जैसे मॉडलों में फ्लश फिटेड हैंडल दिए हैं. वहीं महिंद्रा की मशहूर इलेक्ट्रिक कारें XEV 9e, BE 6, XEV 9S, XUV700 और नई XUV7XO में भी ऐसे डोर हैंडल मिलते हैं.
हालांकि ये नियम फिलहाल चीन में बिकने वाली कारों पर ही लागू होंगे, लेकिन ग्लोबल ऑटो इंडस्ट्री में चीन की बड़ी भूमिका को देखते हुए इसका असर दुनियाभर की कार डिजाइन पर पड़ सकता है. यानी समय रहते कार निर्माताओं को यह समझना जरूरी है कि, लुक और डिज़ाइन एक तरफ लेकिन यात्रियों की सेफ्टी से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए.