राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव-2026 के मंच पर शुक्रवार को लेखक Pico Iyer ने भी शिरकत की. बता दें कि Pico Iyer ने केवल पत्रकार के रूप में ही नहीं, बल्कि कई और रूपों में खुद को स्थापित किया. उन्होंने दुनिया भर की यात्राएं कीं और अपने अनुभवों पर लिखा.
उनकी किताबों जैसे The Art of Stillness और उनकी नई किताब Learning from Silence में वे कहते हैं कि आज के इस हाइपर-कनेक्टेड और तेज़ रफ्तार युग में असली चुनौती तेज़ी से आगे बढ़ना नहीं, बल्कि यह सीखना है कि कब और कैसे ठहरना चाहिए. इंडिया टुडे कॉन्क्लेव के मंच पर उनसे जो बातचीत हुई वह खास सेशन 'The Art of Stillness in a Restless World' के तहत ही हुई, जहां उन्होंने ‘स्टिलनेस’ यानी ठहराव के विचार पर बात की और यह भी बताया कि आज इसकी जरूरत क्यों बढ़ गई है.
'फोन का वाइब्रेशन भी करता है परेशान, ध्यान भटकाता है'
बातचीत में सामने आया कि, Pico Iyer' हाइपर-कनेक्टेड' जैसे शब्द का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन कॉन्टेक्ट करने के लिए उनके पास मोबाइल फोन भी नहीं है. फिर वह कैसे मैनेज करते हैं. इसके जवाब में Pico कहते हैं 'मुझे पहले से ही बहुत सारी जानकारी और ध्यान भटकाने वाली चीजें मिल जाती हैं. जो चीज मेरे पास कम है, वह है समय और जगह, ताकि मैं इन सबका अर्थ समझ सकूं.
मेरी पत्नी बहुत सहनशील है, क्योंकि जब मैं यात्रा पर होता हूं तो वह मुझे आसानी से ढूंढ नहीं पाती. लेकिन मैं नहीं चाहता कि मेरा ध्यान हजार टुकड़ों में बंट जाए. जब मैं किसी से बात कर रहा हूं तो मैं पूरी तरह उसी के साथ रहना चाहता हूं न कि जेब में फोन वाइब्रेट कर रहा हो या मैं यह सोच रहा हूं कि बातचीत खत्म होते ही 11 मैसेज मेरे इनबॉक्स में मेरा इंतजार कर रहे हैं.
कैसे समझ में आया ठहराव का महत्व?
उनसे सवाल हुआ कि वह एक प्रसिद्ध ट्रैवल राइटर हैं, लेकिन उनकी सबसे मजबूत दलील यह है कि 'सबसे महत्वपूर्ण यात्रा तब होती है जब हम चलना बंद कर देते हैं.' यह बात कब समझ आई?
Pico ने कहा- 'यह तब समझ आया जब लगभग 40 साल पहले मैं न्यूयॉर्क में Time Magazine के साथ काम कर रहा था. जिंदगी बहुत रोमांचक थी. लेकिन मैंने वह सब छोड़कर जापान के क्योटो में एक छोटे से कमरे में रहने का फैसला किया जहां न फोन था, न अपना बाथरूम, न बिस्तर. मुझे लगता है कि यात्रा किसी बाजार जाने जैसी है, आप वहां से मसाले, सब्ज़ियां और चीजें इकट्ठा करते हैं. लेकिन उनसे भोजन तभी बनता है जब आप रसोई में बैठकर उन्हें पकाते हैं. ठीक वैसे ही स्टिलनेस हमें अनुभवों को अंतर्दृष्टि में बदलने का मौका देती है.'

क्या लोग खुद से ठहराव चुनते हैं या जीवन उन्हें मजबूर करता है, जैसे बीमारी, नुकसान या संकट? इस सवाल के जवाब में Pico ने कहा 'कभी-कभी जीवन मजबूर करता है. मेरे साथ भी ऐसा हुआ. एक जंगल की आग में मेरा घर और मेरी तीन किताबों की पांडुलिपियां जल गईं. उसके बाद मैं एक मठ में रहने जाने लगा.' इतिहास में भी कई महान किताबें जैसे पंडित नेहरू, मार्टिन लूथर किंग जूनियर,
हेनरी डेविड थोरो, नेल्सन मंडेला ने जेल में अपनी किताब लिखीं. क्योंकि जब इंसान बंद जगह में होता है तो उसके पास सोचने और आत्ममंथन करने के अलावा बहुत कुछ नहीं होता.
सूचना की समझ और AI की दुनिया
उन्होंने AI को लेकर कहा कि, तकनीक हमें सब कुछ दे सकती है, लेकिन उसे समझदारी से इस्तेमाल करने की बुद्धि नहीं. तकनीक हमें डेटा दे सकती है, लेकिन उस डेटा को समझने की बुद्धि नहीं. वह सूचना दे सकती है, लेकिन ज्ञान नहीं. हम अपनी मानवता और विवेक को तकनीक के हवाले नहीं कर सकते.
उन्होंने कहा कि हर किसी में बदलाव आ सकता है, हर कोई ठहराव को समझ सकता है, इसके लिए करना इतना है कि हर किसी के पास रोज़ 20 मिनट शांत बैठने का समय हो सकता है. यह आपके जागने के समय का सिर्फ 3% है, लेकिन यह बाकी 97% को बदल सकता है. आप यह भी कर सकते हैं कि रविवार को लंबी सैर पर जाएं, किसी दोस्त से मिलने जाएं, बिना मोबाइल के और अपने साथ “मीटिंग” तय करें.
शांति की तलाश हर किसी की जरूरत
कई बड़े सीईओ और नेता भी शांति की तलाश में रिट्रीट पर जाते हैं, क्योंकि उन्हें सबसे ज्यादा स्पष्ट सोच की जरूरत होती है. जैसे Bill Gates हर साल “थिंक वीक” लेते हैं. Steve Jobs बड़े फैसलों से पहले लंबी सैर करते थे. Warren Buffett अपना शेड्यूल जानबूझकर खाली रखते हैं. Pico Iyer ने एक दिलचस्प बात कही. जापानी भाषा में 'व्यस्त' शब्द का अर्थ है, दिल खो देना. अगर आप अपना दिल खो देते हैं, तो आप बहुत कुछ खो देते हैं.
आज दुनिया में बहुत बंटवारा है, राजनीति, धर्म, विचारधाराएं. लेकिन पिको कहते हैं कि अगर हम दो घंटे बहस करेंगे तो शायद असहमत हो जाएंगे. लेकिन अगर हम कुछ मिनटों की खामोशी में साथ बैठें, तो हम अपनी साझा मानवता को महसूस करेंगे. उन्होंने एक कहानी सुनाई, एक दिन महात्मा गांधी ने अपना शेड्यूल देखा और कहा, आज बहुत व्यस्त दिन है, इसलिए मुझे एक घंटे की जगह दो घंटे ध्यान करना होगा. लेखक Pico Iyer ने युद्ध और तनाव के इस दौर में शांति की राह चुनने का तरीका बताया.