इजरायल ने शनिवार को ईरान पर शील्ड ऑफ जूडा नामक ऑपरेशन के तहत हमला किया जिसमें ईरान के राष्ट्रपति भवन और खुफिया एजेंसी मुख्यालय को निशाना बनाया गया. इस ऑपरेशन का नाम यहूदी इतिहास और धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा है, जो सुरक्षा और शक्ति का प्रतीक है.
अभिनेता विजय देवरकोंडा और अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने उदयपुर में अपनी शादी कोडवा समाज की परंपराओं के अनुसार संपन्न की. कोडवा जनजाति की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक पहनावे, हथियारों की पूजा और सामाजिक संरचना को इस शादी में प्रमुखता मिली.
Holi special: क्यों पहनते हैं Shivji मृगछाला? Hiranyakashipu, Prahlad, Narasimha avatar और Sharabh रूप से जुड़ी पौराणिक कथा का आध्यात्मिक अर्थ और Holika Dahan connection.
Japan दौरे पर CM Yogi Adityanath को Jain Sadhvi Tulsi ने भगवान Mahavir Swami की प्रतिमा भेंट की. अहिंसा, tolerance और cultural connect पर हुई चर्चा.
होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अहंकार और क्रोध पर विजय का प्रतीक भी है. पौराणिक कथाओं में हिरण्यकशिपु, प्रह्लाद, नरसिंह और शिवजी के शरभ अवतार की कहानी होली के गहरे अर्थ को दर्शाती है.
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जापान के दौरे पर हैं जहां उनका भव्य स्वागत हो रहा है. इस दौरान जैन श्वेतांबर साध्वी तुलसी ने उनसे मुलाकात की, जिन्होंने सीएम योगी को जैन तीर्थंकर महावीर स्वामी की प्रतिमा भेंट की. साध्वी ने हिंदुत्व की सहिष्णुता और तीर्थंकरों की शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार पर चर्चा की.
होली से पहले आठ दिन का होलाष्टक माना जाता है अशुभ क्योंकि इस दौरान मंगलकार्य नहीं होते. शिवपुराण के अनुसार, कामदेव ने महादेव को समाधि से जगाने के लिए आठ दिन तक प्रयास किया, लेकिन उनकी तीसरी आंख खुलते ही कामदेव भस्म हो गए.
बिश्नोई समाज भारत का एक ऐसा धार्मिक और सामाजिक समुदाय है जो प्रकृति के साथ सहजीवन को जीवन का मूल सिद्धांत मानता है. गुरु जाम्भेश्वर द्वारा स्थापित इस समाज ने 29 नियम बनाए, जिनका केंद्र पर्यावरण संरक्षण है.
शिवालयों में नंदी बैल शिवलिंग की ओर मुख करके बैठा होता है, जो शक्ति, सामर्थ्य और विनम्रता का प्रतीक है. नंदी की उत्पत्ति से जुड़ी कई पुराणिक कथाएं हैं, जो उसकी दिव्यता और शिव के प्रति भक्ति को दर्शाती हैं. हिंदू परंपरा में नंदी का महत्व गहरा है, वह शक्ति, उर्वरता और धर्म का प्रतीक माना जाता है.
हस्तिनापुर, जो महाभारत की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है, आज एक प्रमुख जैन तीर्थ स्थल के रूप में जाना जाता है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में इसे पुरातात्विक-पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा की है. पुरातत्व खुदाइयों में कई प्राचीन अवशेष मिले हैं, जिन्हें लेकर रिसर्च जारी है. जबकि जैन परंपरा ने यहां कई धार्मिक संरचनाएं स्थापित की हैं.
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट-2026 में 15 प्रमुख पुरातात्विक स्थलों को पर्यटन के लिए विकसित करने की योजना का ऐलान किया है. इन स्थलों में राखीगढ़ी, लोथल, सारनाथ, हस्तिनापुर, धोलावीरा जैसे ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं.
30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या ने पूरे देश और विश्व को हिला कर रख दिया. भारत की आजादी के शुरुआती छह महीनों में यह घटना देश की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना गई, लेकिन इसी तनाव भरी स्थिति के बीच कैसे राजघाट बना उनका समाधि स्थल?
अभिनेता रणवीर सिंह पर कांतारा फिल्म की दैव परंपरा चावुंडी दैव से तुलना करते हुए विवादित एक्ट करने के आरोप में FIR दर्ज हुई है. कांतारा की दैव परंपरा दक्षिण भारत की प्राचीन लोक आस्था और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है, जिसमें चावुंडी दैव एक उग्र रक्षक शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं.
भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ समझौता केवल टैरिफ या सप्लाई चेन तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों पुराने भारत-यूरोप व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों की निरंतरता को दर्शाता है. इस ऐतिहासिक डील के पीछे भारत और यूरोप के बीच दो हजार साल पुराना व्यापारिक संबंध भी है.
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट का इतिहास पौराणिक मान्यताओं, ऐतिहासिक घटनाओं और कई शासकों के संरक्षण से जुड़ा है. हाल ही में घाट के जीर्णोद्धार को लेकर विवाद उठे हैं, जिससे स्थानीय लोग नाराज़ हैं. महारानी अहिल्याबाई होल्कर सहित कई शासकों ने घाट के पुनर्निर्माण में योगदान दिया.
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रही बुल्डोजर कार्रवाई ने स्थानीय लोगों में गुस्सा और विरोध को जन्म दिया है. घाट के विस्तार और अतिक्रमण हटाने की योजना के तहत हो रही तोड़फोड़ ने विवाद को और बढ़ा दिया है.
दरभंगा राज की अपार संपदा और शाही वैभव का अध्याय हाल ही में 96 वर्ष की आयु में महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के साथ समाप्त हो गया. यह कहानी केवल धन-दौलत की नहीं, बल्कि साज़िश, रहस्य और एक शांत त्रासदी की भी है.
खिचड़ी भारत की सांस्कृतिक और पाक परंपरा का एक अनमोल हिस्सा है, जिसका इतिहास वैदिक काल से शुरू होता है. यह सरल, पौष्टिक और सुपाच्य भोजन है जो हर भारतीय के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है,
मकर संक्रांति भारत के सभी राज्यों में विभिन्न नामों से मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर आधारित है. यह पर्व प्रकृति की पूजा, नदी में स्नान, दान और सामाजिक सौहार्द के संदेश को बढ़ावा देता है.
मकर संक्रांति के पर्व पर खिचड़ी बनाना और बांटना एक प्राचीन परंपरा है जो स्वास्थ्य और औषधि के रूप में मानी जाती है. बिहार के मगध साम्राज्य के इतिहास में खिचड़ी का विशेष स्थान है, जहां यह साम्राज्य के अंत और नए साम्राज्य के उदय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
खिचड़ी एक ऐसा व्यंजन है जो सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक माना जाता है. यह व्यंजन दाल और चावल के मिलन से बनता है, जो अलग-अलग अन्नों को एक साथ जोड़कर एक नई चीज बनाता है. मकर संक्रांति के अवसर पर खिचड़ी भोज का आयोजन होता है, जो समाज के सभी वर्गों को एक साथ लाता है.