अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो गया है. शुक्रवार से वर्जीनिया में वोटिंग शुरू हो गई. इडाहो, मिनेसोटा और साउथ डकोटा जैसे कुछ राज्यों में भी लोग चुनाव कार्यालय या वोटिंग सेंटर जाकर अब्सेंटी बैलेट डाल सकते हैं. आने वाले हफ्तों में दूसरे राज्यों में भी बड़े स्तर पर अर्ली वोटिंग शुरू होगी.
3 नवंबर को होने वाले चुनाव में अमेरिकी कांग्रेस की सीटों के साथ कई राज्यों में गवर्नर और स्टेट लेजिस्लेचर के लिए भी वोटिंग होगी. सबसे ज्यादा नजर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर रहेगी. चुनाव से तय होगा कि कांग्रेस के दोनों सदनों में रिपब्लिकन बहुमत बनाए रखते हैं या नहीं.
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अगर डेमोक्रेट्स कांग्रेस में बहुमत हासिल करते हैं, तो ट्रंप के कार्यकाल के आखिरी दो सालों की राजनीति पर इसका असर पड़ सकता है. कांग्रेस में जांच और सरकार के कामकाज की निगरानी से जुड़ी गतिविधियां बढ़ सकती हैं.
महंगाई और ईरान बड़े मुद्दे
इस चुनाव में अमेरिकी मतदाताओं के सामने कई बड़े मुद्दे हैं. गैस और किराने के सामान की बढ़ती कीमतें लोगों की चिंता का बड़ा कारण हैं. इसके अलावा ईरान के साथ चल रही लंबी जंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े खतरे और ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन कार्रवाई भी चुनाव में अहम मुद्दे रहेंगे.
चुनाव से पहले कांग्रेस की सीटों की सीमाओं में भी बदलाव हुआ है. कई राज्यों में नए कांग्रेसनल मैप बनाए गए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव का असर इतना बड़ा है कि करीब 10 में से 1 अमेरिकी नागरिक अब ऐसे कांग्रेसनल जिले में रह रहा है, जो 2024 में उसके जिले से अलग था.
चुनावी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा
चुनाव से पहले ट्रंप प्रशासन की चुनावी प्रक्रिया में केंद्र सरकार के दखल की कोशिशों को लेकर भी चर्चा है. ट्रंप लंबे समय से कुछ मतदान तरीकों पर सवाल उठाते रहे हैं. वह गैर-नागरिकों के वोट डालने के मामलों का मुद्दा भी उठाते रहे हैं.
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हालांकि, एक रिपोर्ट में गैर-नागरिकों के वोट डालने को बेहद दुर्लभ बताया गया है. इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने मेल बैलेट पर रोक लगाने की ट्रंप की कोशिश को खारिज कर दिया. वहीं प्रशासन की कुछ अन्य कोशिशें अभी जारी हैं.
इसके बावजूद चुनाव अधिकारियों ने मतदान की सुरक्षा और सटीकता को लेकर भरोसा जताया है. वोटिंग राइट्स संगठनों ने भी लोगों से जल्दी वोट डालने की अपील की है. उनका कहना है कि इससे मतदान केंद्रों पर भीड़ कम करने और वोटिंग की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है.
अब शुरुआती वोटिंग के साथ अमेरिकी चुनावी मैदान खुल गया है. अगले करीब छह हफ्तों में होने वाली वोटिंग से कांग्रेस के साथ-साथ ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो सालों की राजनीति की दिशा भी तय होगी.
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