अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले फर्जी वोटिंग और चुनावी प्रक्रिया में सरकारी दखल को लेकर विवाद तेज हो गया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का न्याय विभाग उन लोगों के वोट रोकने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें अमेरिकी नागरिक नहीं होने के कारण मतदान का अधिकार नहीं है. हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि क्या सरकार की कानून लागू करने वाली एजेंसियों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के फायदे के लिए किया जा रहा है.
कैलिफोर्निया में न्याय विभाग ने करीब 20 हजार मतदाताओं के मेल-इन बैलेट रोकने की मांग की है. विभाग का आरोप है कि ये लोग अमेरिकी नागरिक नहीं हैं और इसलिए वोट देने के पात्र नहीं हैं. विभाग ने इससे जुड़े एक आपराधिक मामले की जांच के लिए रिकॉर्ड भी मांगे हैं.
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कैलिफोर्निया सरकार का कहना है कि उसने गैर-अमेरिकी नागरिकों को वोट देने से रोकने के लिए जरूरी इंतजाम किए हैं. राज्य ने यह भी दलील दी कि न्याय विभाग को वोट रोकने का अधिकार नहीं है.
अलास्का में भी चुनाव को लेकर विवाद
अलास्का में न्याय विभाग ने रिपब्लिकन सांसद डैन सुलिवन के नाम वाले एक अन्य उम्मीदवार डेनियल जे सुलिवन की उम्मीदवारी की जांच तेज कर दी है. आरोप है कि इस नाम से उम्मीदवार उतारने का मकसद मतदाताओं में भ्रम पैदा करना था. विभाग ने यह भी मांग की थी कि अगर डैन सुलिवन मामूली अंतर से हारते हैं तो नतीजों को प्रमाणित करने से रोका जाए.
हालांकि, रविवार को संघीय अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया. अदालतों ने कैलिफोर्निया और अलास्का, दोनों मामलों में न्याय विभाग की मांगें ठुकरा दी हैं. अलास्का के फैसले के खिलाफ विभाग ने अपील की है.
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन पर उठ रहे सवाल
आलोचकों का कहना है कि न्याय विभाग की ऐसी कार्रवाई से ट्रंप को चुनाव के नतीजों पर सवाल उठाने का मौका मिल सकता है. ट्रंप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में अपनी हार के लिए लगातार धोखाधड़ी के दावे करते रहे हैं, जबकि स्वतंत्र अध्ययनों और राज्यों की जांच में वोटिंग में धोखाधड़ी की घटनाएं बेहद कम पाई गई हैं.
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न्याय विभाग का कहना है कि उसकी कार्रवाई कानून के मुताबिक है और इसका मकसद चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखना है. लेकिन पूर्व अधिकारियों का कहना है कि चुनावी मामलों में विभाग का दखल आमतौर पर नतीजे प्रमाणित होने के बाद होता रहा है. ट्रंप प्रशासन ने चुनावी जांच से जुड़ी एक अहम इकाई का आकार भी घटाया है और जांच में राजनीतिक नियुक्तियों वाले अधिकारियों की भूमिका बढ़ाई है.
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