अमेरिका में 90 से ज्यादा नेताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े लोगों और संस्थाओं से मिलने वाला किसी भी तरह का राजनीतिक चंदा नहीं लेने का संकल्प लिया है. इनमें भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना और प्रमिला जयपाल भी शामिल हैं. यह संकल्प RSS प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में हुए कार्यक्रम के कुछ दिनों बाद सामने आया है. इस कार्यक्रम में भागवत ने अलग-अलग धर्मों के बीच समझ और 'सार्वभौमिक एकता' की बात रखी थी.
यह अभियान 'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स एक्शन' और 'साउथ एशियन अमेरिकन कोएलिशन टू रिन्यू डेमोक्रेसी एक्ट्स' ने शुरू किया है. 31 अगस्त को जारी किए गए इस छह पन्नों के संकल्प में अमेरिका के आठ राज्यों के डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दलों से जुड़े नेता और उम्मीदवार शामिल हैं. इसमें फ्रेडल, राज्य और स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधि और उम्मीदवार भी हैं.
संकल्प के तहत नेताओं ने RSS से जुड़े लोगों और संस्थाओं से राजनीतिक चंदा नहीं लेने की बात कही है. इसके अलावा राजनीतिक हिंसा और डराने-धमकाने को भी खारिज करने की बात कही गई है. पहले RSS से जुड़े लोगों या संस्थाओं से मिला पैसा वापस करने या उसे लोकतंत्र का समर्थन करने वाले संगठनों को देने की बात भी संकल्प में कही गई है.
'हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स एक्शन' अमेरिका में काम करने वाला एक राजनीतिक संगठन है. संगठन के मुताबिक, वह लोकतंत्र, मानवाधिकार और अलग-अलग विचारों वाले समाज की रक्षा के लिए काम करता है. वहीं, 'साउथ एशियन अमेरिकन कोएलिशन टू रिन्यू डेमोक्रेसी एक्ट्स' खुद को ऐसा समूह बताता है जो अमेरिका में लोकतंत्र को बढ़ावा देने और कट्टरपंथी समूहों के बीच संबंधों को सामने लाने का काम करता है.
किन नेताओं ने लिया संकल्प?
संकल्प पर हस्ताक्षर करने वालों में अमेरिकी संसद के सदस्य, राज्य के विधायक, मेयर, स्थानीय जनप्रतिनिधि और उम्मीदवार शामिल हैं. इनमें मिशिगन से अमेरिकी सीनेट के उम्मीदवार अब्दुल एल-सईद, वॉशिंगटन की भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जयपाल, कैलिफोर्निया के सांसद रो खन्ना और इलिनॉय की सांसद रॉबिन केली प्रमुख हैं.
प्रमिला जयपाल ने RSS को 'दक्षिणपंथी संगठन' बताते हुए कहा कि वह भारत में लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करता है. उन्होंने RSS से जुड़े किसी भी पैसे को स्वीकार नहीं करने की प्रतिबद्धता जताई. रो खन्ना ने RSS को गांधी की हत्या के पीछे का समूह बताया. उन्होंने कहा कि RSS को अमेरिका में चुनावों को प्रभावित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. खन्ना ने यह भी कहा कि उन्होंने RSS से संबंध रखने वाले एक अरबपति से मिले 6,600 डॉलर का चंदा दूसरी जगह दे दिया है. हालांकि, अमेरिकी पत्रिका 'द नेशन' ने 2023 में रिपोर्ट किया था कि खन्ना को अमेरिका में 'हिंदू राष्ट्रवादी लोगों' से 1.10 लाख डॉलर मिले थे.
संकल्प पर उठे सवाल
इस संकल्प के बाद हिंदू अमेरिकी राजनीतिक कार्रवाई समिति ने इसे 'भेदभावपूर्ण' और 'हिंदू विरोधी' बताया. संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ नेताओं को गुमराह किया गया और उन पर दबाव बनाया गया. समिति ने कहा कि इस अभियान में सिर्फ हिंदू अमेरिकी चंदा देने वालों को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदू अमेरिकी फाउंडेशन की कार्यकारी निदेशक सुहाग ए शुक्ला ने भी इस अभियान को 'अमेरिकी मूल्यों के खिलाफ' बताया. उन्होंने आरोप लगाया कि केवल हिंदू अमेरिकी नागरिकों के राजनीतिक चंदे की RSS से संभावित संबद्धता की जांच करना उन्हें किसी विदेशी संस्था के प्रति वफादारी साबित करने जैसी स्थिति में डालता है.
शौनक सान्याल