जेडी वेंस ने भेजी वार्ता की चिट्ठी, ट्रंप ने किया इनकार, क्या ईरान पर फिर हमले की प्लानिंग कर रहा अमेरिका?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के कट्टरपंथी नेता मोहसिन रेजाई को शांति वार्ता के लिए पत्र भेजा है. हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे शांति वार्ता नहीं बल्कि चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति बताया है.

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जेडी वेंस ने बातचीत के लिए मोहसिन रेजाई को पत्र लिखा है .(Photo- (Reuters) जेडी वेंस ने बातचीत के लिए मोहसिन रेजाई को पत्र लिखा है .(Photo- (Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 6:23 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शांति के लिए दोबारा बातचीत शुरू करने की कोशिश की है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, वेंस ने ईरान के प्रभावशाली कट्टरपंथी नेता मोहसिन रेजाई से सीधे संपर्क स्थापित किया है. उन्होंने रेजाई को एक पत्र भेजकर यह जानने की कोशिश की है कि, क्या वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत का कोई नया रास्ता निकल सकता है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यह संपर्क शांति की बातचीत के लिए नहीं, बल्कि चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति से जुड़ा था.

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वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, जेडी वेंस ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई को पत्र भेजा है. रेजाई ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर भी रह चुके हैं.

सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि यह पत्र राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर भेजा गया था और उन्हें इस पूरी पहल की जानकारी है.

ट्रंप बोले- शांति वार्ता नहीं, मेडिकल सप्लाई का मामला

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने उन दावों से इनकार किया कि उन्होंने उपराष्ट्रपति वेंस को ईरान के साथ शांति बातचीत शुरू करने का निर्देश दिया था. जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों ने जब ट्रंप से इस बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने कहा, 'ईरान को चिकित्सा सामग्री की जरूरत है. मूल रूप से यह उन लोगों की मदद के लिए जरूरी सामान पहुंचाने से संबंधित है, जो बीमार हैं.'

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इस तरह वेंस की कूटनीतिक पहल को लेकर वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट और राष्ट्रपति ट्रंप के सार्वजनिक बयान में अंतर सामने आया है.

चुनाव के बाद ईरान पर फिर हमले की आशंका

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब ट्रंप अगले सप्ताह होने वाले अमेरिकी मिडटर्म इलेक्शन के बाद ईरान पर एक और मिलिट्री अटैक करने के ऑप्शन को लेकर सोच रहे हैं.  रिपोर्ट के मुताबिक, जेडी वेंस यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए एक बार फिर सैन्य संघर्ष शुरू होने से रोका जा सकता है. हालांकि, अब तक बातचीत से कोई विस्तृत शांति प्रस्ताव सामने नहीं आया है.

पिछले सप्ताह मोहसिन रेजाई ने कहा था कि जब तक ईरान की बुनियादी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक तेहरान अमेरिका के साथ बातचीत नहीं करेगा.

पहले भी शांति समझौते की कोशिश हुई नाकाम

रिपोर्ट के अनुसार, जेडी वेंस ने सार्वजनिक रूप से युद्ध का समर्थन किया है, लेकिन निजी तौर पर संघर्ष को लंबा खींचने को लेकर चिंता जताई है. फरवरी में ट्रंप के 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू करने से पहले वेंस ने अधिक व्यापक कूटनीतिक प्रयासों की वकालत की थी. बाद में राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें प्रमुख वार्ताकार नियुक्त किया.

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इसके बाद वेंस ने संघर्ष समाप्त कराने के लिए ईरानी प्रतिनिधियों से बातचीत करने के उद्देश्य से दो बार अंतरराष्ट्रीय यात्राएं कीं. जून में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता ज्ञापन तैयार हुआ था, लेकिन हस्ताक्षर के महज दो सप्ताह बाद ही यह व्यवस्था टूट गई. इसकी प्रमुख वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात बहाल करने को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्याएं थीं.

इसके बाद कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई बातचीत भी गतिरोध दूर नहीं कर सकी.

परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों पर फंसी बातचीत

अमेरिका चाहता है कि ईरान सबसे पहले अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर रियायतें दे. दूसरी ओर ईरान तत्काल आर्थिक राहत की मांग कर रहा है. मोहसिन रेजाई के प्रमुख वार्ताकार के रूप में सामने आने से बातचीत का स्वरूप बदल सकता है. इससे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ जैसे नेताओं की भूमिका प्रभावित होने की संभावना जताई गई है.

रेजाई 1980 के दशक में इराक के साथ युद्ध में शामिल रहे हैं और कई वर्षों तक IRGC का नेतृत्व कर चुके हैं. अमेरिकी हमलों की बढ़ती आशंका के बीच ईरान की सुरक्षा नीति में उनका प्रभाव बढ़ा है. इस महीने की शुरुआत में उन्होंने चेतावनी दी थी कि ईरान संयुक्त अरब अमीरात के साथ-साथ क्षेत्रीय डेटा सेंटरों और इंटरनेट केबलों को भी निशाना बना सकता है.

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ट्रंप की चेतावनी- चुनाव तक इंतजार से ईरान को फायदा नहीं

डोनाल्ड ट्रंप एक ओर ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते की संभावनाओं पर बात करते रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है. ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने को राष्ट्रीय सुरक्षा की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है. पिछले सप्ताह ट्रंप ने कहा था कि वॉशिंगटन तेहरान के साथ बातचीत नहीं कर रहा है. उन्होंने सैन्य कार्रवाई के संकेत भी दिए थे.

मंगलवार को एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने ईरान पर समझौते की प्रक्रिया को जानबूझकर लंबा खींचने का आरोप लगाया. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी चुनाव समाप्त होने तक इंतजार करने से ईरान को कोई फायदा नहीं होगा. अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं. युद्ध और ईंधन की बढ़ती कीमतें मतदाताओं की प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं. ऐसे में ईरान के साथ जारी संघर्ष का घरेलू राजनीति पर भी असर पड़ रहा है.

जेडी वेंस को 2028 के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के संभावित दावेदारों में शुरुआती तौर पर देखा जा रहा है. ऐसे में ईरान को लेकर उनकी कूटनीतिक पहल विदेश नीति के साथ-साथ घरेलू राजनीतिक चुनौतियों से भी जुड़ी हुई है. ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि ईरान के साथ युद्ध कब समाप्त होगा, इसका फैसला वही करेंगे.

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