अमेरिकी घेराबंदी का 'साइड इफेक्ट'... समुद्र में तेल बहाने को मजबूर ईरान, सैटेलाइट तस्वीरों से हड़कंप

अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान तेल स्टोर करने के गंभीर संकट से जूझ रहा है. रिपोर्ट्स और सैटेलाइट तस्वीरों में फारस की खाड़ी में समुद्र की सतह पर तेल के बड़े-बड़े धब्बे दिखाई दिए हैं, जिससे आशंका है कि स्टोरेज क्षमता खत्म होने पर ईरान अतिरिक्त कच्चा तेल समुद्र में छोड़ रहा है.

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सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में ईरान के खार्ग आइलैंड ऑयल टर्मिनल के पास समुद्र की सतह पर बड़े-बड़े काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं. (Photo: X) सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों में ईरान के खार्ग आइलैंड ऑयल टर्मिनल के पास समुद्र की सतह पर बड़े-बड़े काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं. (Photo: X)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 10 मई 2026,
  • अपडेटेड 6:28 PM IST

अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच ईरान गंभीर तेल संकट का सामना कर रहा है. ईरान हर दिन 30 लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन करता है, जिसका अधिकांश हिस्सा खार्ग द्वीप (Kharg Island) स्थित उसके मुख्य एक्सपोर्ट टर्मिनल से भेजा जाता है. लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी के कारण फारस की खाड़ी से तेल टैंकर बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. 

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इस कारण ईरान अपना तेल दूसरे देशों को नहीं बेच पा रहा और प्रोडक्शन जारी रहने की वजह से उसके पास तेल स्टोर करने की जगह नहीं बची है. सैटेलाइट तस्वीरों में खार्ग द्वीप के पास समुद्र की सतह पर बड़े काले धब्बे दिखाई दिए हैं. इससे आशंका जताई जा रही है कि ईरान जिस तेल को स्टोर नहीं कर पा रहा, उसे समुद्र में छोड़ रहा है. 

समुद्र में तेल छोड़ने की नौबत क्यों?

अप्रैल के मध्य में अमेरिकी नाकेबंदी लागू होने के बाद सबसे पहले खार्ग द्वीप के ऑनशोर स्टोरेज टैंक भर गए. इसके बाद ईरान ने पुराने तेल टैंकरों को फिर से सक्रिय कर समुद्र में फ्लोटिंग स्टोरेज के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू किया. इन पुराने जहाजों में अतिरिक्त तेल जमा किया गया ताकि तेल उत्पादन बंद न करना पड़े. दरअसल, लंबे समय तक तेल कुओं को बंद रखने से भूमिगत तेल भंडार को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है. 

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अगर तेल उत्पादन रोक दिया जाए तो चट्टानों में पानी और गैस भरने का खतरा रहा है. पाइपलाइन बंद हो सकते हैं और बाद में प्रोडक्शन शुरू करना बेहद महंगा और मुश्किल हो सकता है. तेल कुओं के काफी समय तक बंद रहने के कारण कई बार प्रोडक्शन पूरी तरह पहले जैसा लौट भी नहीं पाता. यही कारण है कि ईरान तेल उत्पादन रोक नहीं रहा और अमेरिकी नाकेबंदी के कारण एक्सपोर्ट भी नहीं कर पा रहा. इस वजह से उसे तेल स्टोर करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है.

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखे बड़े ऑयल स्लिक्स

यूरोपियन स्पेस एजेंसी के सेंटिनल सैटेलाइट डेटा और अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास हाल के हफ्तों में पानी पर तेल की परतें (ऑयल स्लिक्स) देखी गईं. 5 मार्च को कुवैत तट के पास, 10 अप्रैल को लावन द्वीप के आसपास, 22 अप्रैल को केशम द्वीप के पास और 6 मई को खार्ग द्वीप के पश्चिम में समुद्र की सतह पर तेल के बड़े धब्बे दिखाई दिए. 

खार्ग द्वीप के पास दिखाई दिया तेल का एक धब्बा करीब 120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला था, जो किसी बड़े शहर के आकार के बराबर माना जा रहा है. एक्सपर्ट्स ने रडार डेटा की मदद से इसका विश्लेषण किया. समुद्र की सतह पर तैरता तेल लहरों को शांत कर देता है, जिससे रडार तस्वीरों में काले और चिकने हिस्से दिखाई देते हैं. प्रोसेस्ड तस्वीरों में ऐसे संकेत मिले जो तेल रिसाव या तेल छोड़े जाने से मेल खाते हैं. 

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हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर यह पूरी तरह साबित नहीं किया जा सकता कि ये धब्बे तेल ही हैं. कभी-कभी शैवाल, तलछट, सूरज की रोशनी या प्राकृतिक परतें भी ऐसे दृश्य बना सकती हैं. लेकिन तेल ढुलाई के लिए उपयोग होने वाले समुद्री मार्गों और प्रमुख तेल फैसिलिटी के पास इन धब्बों का दिखना, साथ ही हालिया हमलों के बाद उनका सामने आना, तेल रिसाव या जानबूझकर समुद्र में तेल छोड़े जाने की आशंका को मजबूत करता है.

पर्यावरण और समुद्री जीवन के लिए बड़ा खतरा

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर समुद्र में तेल छोड़ा जा रहा है तो इससे समुद्री जीवन और पर्यावरण को भारी नुकसान हो सकता है. फारस की खाड़ी के समुद्री इलाकों में बड़ी संख्या में मछुआरे, कोरल रीफ और समुद्री जीव रहते हैं, जिन पर लाखों लोगों की आजीविका निर्भर करती है. समुद्र की सतह पर फैला तेल मछलियों के लिए जहर का काम कर सकता है, समुद्री पक्षियों को नुकसान पहुंचा सकता है और संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को तबाह कर सकता है. इसी बीच ओमान के दक्षिणी धोफार (Dhofar) इलाके के समुद्र तटों पर बड़ी संख्या में मरे हुए झींगे बहकर आने की खबरें भी सामने आई हैं. वैज्ञानिकों ने इसकी वजह समुद्र के पानी में ऑक्सीजन लेवल कम होने और समुद्री धाराओं को बताया है. लेकिन समय को देखते हुए क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

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होर्मुज ब्लॉकेड का भारत समेत दुनिया पर असर

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है. दुनिया के करीब 20 फीसदी तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है. भारत समेत कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस क्षेत्र पर निर्भर हैं. नाकेबंदी और तनाव के चलते वैश्विक तेल कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है, जिससे ईंधन, परिवहन और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो रही हैं.

ईरान बैक चैनल से तेल बेचने का कर रहा प्रयास

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान अब भी गुप्त तरीकों से तेल एक्सपोर्ट करने में जुटा हुआ है. अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान कई महीनों तक इस नाकेबंदी को झेल सकता है. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक कम से कम 13 टैंकरों ने इंडोनेशिया के रियाउ द्वीप समूह के पास समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में गुप्त तरीके से तेल ट्रांसफर किया. रिपोर्ट के मुताबिक इन टैंकरों ने करीब 2.2 करोड़ बैरल तेल दूसरे जहाजों में ट्रांसफर किया, जिसकी मौजूदा कीमत करीब 2 अरब डॉलर आंकी गई है. माना जा रहा है कि तेल की ये खेप चीन पहुंचाई गई. 

हालांकि लगातार जारी अमेरिकी नाकेबंदी ने अब ईरान को ऐसे हालात में पहुंचा दिया है जहां उसे अतिरिक्त तेल समुद्र में छोड़ने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है. ईरानी अधिकारियों ने अभी तक फारस की खाड़ी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास दिखाई दिए तेल के इन धब्बों पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है. हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि तेल के ये धब्बे क्षतिग्रस्त जहाजों या तेल फैसिलिटी में लीक की वजह से भी हो सकते हैं. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ईरान के पास तेल स्टोरेज क्षमता की कमी होना, समुद्र में दिखाई दिए तेल के इन धब्बों के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है. इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि ईरान अतिरिक्त तेल समुद्र में छोड़ रहा हो.

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