पाकिस्तान का यार तुर्की भी भारत से डीजल खरीद रहा, मक्का वाले प्रिंस भी नहीं आ रहे काम

अगस्त 2026 में तुर्की ने भारत से रिकॉर्ड डीजल खरीदा, जबकि रूस से उसकी सप्लाई तेजी से घट गई और अमेरिका से भी आयात बढ़ा. रूस पर बढ़ती पाबंदियों, मिडिल ईस्ट रूट पर दबाव और तंग वैश्विक बाजार के बीच भारतीय रिफाइनर तुर्की के लिए अहम विकल्प अब बनकर उभरे.

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होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई घटने से तुर्की की मुश्किलें बढ़ गई है. (Photo- ITG) होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई घटने से तुर्की की मुश्किलें बढ़ गई है. (Photo- ITG)

अविनाश कटील

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:36 PM IST

पाकिस्तान का दोस्त तुर्की लंबे समय से अपनी डीजल जरूरतों के लिए रूस पर निर्भर रहा है. लेकिन अगस्त 2026 में यह निर्भरता अचानक टूटती दिखी और तुर्की ने भारत से रिकॉर्ड मात्रा में डीजल खरीदा. अगस्त में तुर्की ने भारत से हर दिन 1.2 लाख बैरल से ज्यादा डीजल की खरीद की. 2017 से जो भी आंकड़े मौजूद हैं, उनमें यह सबसे बड़ी डीजल खरीद है.

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असल कहानी शुरू होती है रूस से. साल की शुरुआत में रूस से तुर्की प्रतिदिन 2 लाख बैरल से ज्यादा डीजल खरीद रहा था. अगस्त तक आते-आते यह आंकड़ा घटकर सिर्फ 80 हजार बैरल प्रतिदिन रह गया. 2025 में तुर्की के कुल डीजल आयात का करीब 85 फीसदी हिस्सा अकेले रूस से आ रहा था. अगस्त 2026 में यह हिस्सेदारी घटकर सिर्फ 20 फीसदी रह गई. यानी कुछ ही महीनों में रूस की सप्लाई लगभग एक-चौथाई रह गई, और तुर्की को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए दूसरे सप्लायर तलाशने पड़े.

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भारत क्यों बना तुर्की का नया फ्यूल सोर्स?

इन्हीं हालात में भारत तुर्की के लिए एक बड़ा विकल्प बनकर उभरा. हालांकि भारत से तुर्की को गई डीजल की सही मात्रा को लेकर अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में थोड़ा फर्क है. Kpler का आंकड़ा 1.2 लाख बैरल प्रतिदिन का है, जबकि एनर्जी एस्पेक्ट्स के मुताबिक यह करीब 74 हजार बैरल प्रतिदिन रहा. आंकड़े भले अलग हों, दोनों एजेंसियां इस बात पर सहमत हैं कि भारत से तुर्की को डीजल सप्लाई में बड़ा उछाल आया है. एनर्जी एस्पेक्ट्स के मुताबिक तो अगस्त 2022 के बाद यह भारत की तुर्की को सबसे बड़ी मासिक सप्लाई रही.

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भारत के लिए इतनी बड़ी मात्रा में डीजल निर्यात करना इसलिए मुमकिन हो पाया, क्योंकि भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनिंग क्षमताओं में से एक है. भारत बाहर से भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है और अपनी रिफाइनरियों में उसे प्रोसेस कर डीजल, पेट्रोल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पाद तैयार करता है. इसका एक हिस्सा देश के अंदर इस्तेमाल होता है, बाकी दूसरे देशों को निर्यात कर दिया जाता है.

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इसमें एक अहम कड़ी यह भी है कि भारत ने हाल के वर्षों में रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी बढ़ाई है. यानी भारत जो कच्चा तेल रूस से ले रहा है, उसे रिफाइन करने के बाद तैयार डीजल तुर्की जैसे देशों को बेचा जा रहा है.

दरअसल, रिफाइनरी से निकलने के बाद डीजल एक अलग ग्लोबल कमोडिटी बन जाता है, जिसे बाजार की मांग और कीमत के हिसाब से कहीं भी बेचा जा सकता है. इसी वजह से भारत का रूस से कच्चा तेल खरीदना और तैयार डीजल तुर्की को बेचना, दोनों एक ही ग्लोबल फ्यूल मार्केट का हिस्सा माने जाते हैं.

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