बांग्लादेश ने रविवार को उम्मीद जताई कि भारत पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज करेगा. विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के साथ राजनीतिक इच्छा भी जरूरी है. एक दिन पहले भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा था कि वापसी की कोई समय सीमा नहीं बताई जा सकती.
मीडिया ब्रीफिंग के दौरान उनसे पूछा गया कि क्या दोनों देशों के बीच लागू प्रत्यर्पण संधि के तहत हसीना को वापस लाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बिल्कुल, आरोपी को संधि के तहत लाया जा सकता है और प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. हालांकि कुछ कानूनी जानकार सवाल उठाते हैं कि यह संधि हसीना के मामले में लागू होती है या नहीं.
शनिवार को ढाका में एक निजी थिंक टैंक की चर्चा में त्रिवेदी ने कहा कि कोई भी समय सीमा नहीं दे सकता. भारत सरकार बार बार यही कह चुकी है कि प्रक्रिया कानूनी और अच्छी तरह तय है. ढाका के अनुरोध की जांच अदालतों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया से हो रही है.
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79 साल की हसीना 5 अगस्त 2024 को ढाका छोड़ने के बाद से भारत में रह रही हैं. छात्रों के नेतृत्व वाले जुलाई विद्रोह में उनकी अवामी लीग सरकार गिर गई थी. बाद में विशेष ट्रिब्यूनल ने गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाकर प्रदर्शनों पर कार्रवाई के मामले में उन्हें मौत की सजा सुनाई. हसीना और उनके समर्थक इसे कंगारू कोर्ट बताते हैं.
मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने कूटनीतिक नोट भेजकर प्रत्यर्पण मांगा था. भारत का कहना है कि अनुरोध की जांच तय प्रक्रिया से हो रही है. 12 फरवरी के चुनाव के बाद सत्ता में आई तारिक रहमान की बीएनपी सरकार ने मांग दोहराई. अगस्त में रहमान ने त्रिवेदी से प्रक्रिया तेज करने को कहा, ताकि रिश्तों के लिए अनुकूल माहौल बने.
हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर तक मर्जी से बांग्लादेश लौटकर कानूनी प्रक्रिया का सामना करेंगी. यह मुद्दा दोनों देशों के रिश्तों में बड़ी परेशानी बन गया है. भारत ने रहमान को पिछले महीने के ब्रिक्स सम्मेलन और फरवरी से द्विपक्षीय दौरे का न्योता दिया था, पर वह न आए, न पद संभालने के बाद दिल्ली गए.
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