हूतियों को 1 अरब डॉलर की 'फिरौती' देगा सऊदी अरब, हमले रुकवाने के लिए सरेंडर मोड में

सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने हूतियों के साथ युद्ध विराम के लिए ईरान की यात्रा की है. सूत्रों के मुताबिक, इसमें 1 अरब डॉलर का प्रस्ताव रखा गया है. यह कूटनीतिक प्रयास खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव को कम करने और सऊदी तेल सुविधाओं पर हमलों को रोकने के उद्देश्य से किया गया है.

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ईरान ने सऊदी और हूतियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है. (File Photo) ईरान ने सऊदी और हूतियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 7:42 AM IST

सऊदी अरब में हूती हमले बीते कई दिनों से जारी है. खाड़ी क्षेत्र के राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने हूतियों के साथ सीज़फायर पर बातचीत करने के लिए अचानक ईरान की यात्रा की. इस बातचीत का मकसद ही हूतियों के हमलों को रुकवाना है. 

सूत्रों का दावा है कि इस समझौते के तहत सऊदी अरब ईरान के जरिए हूतियों को 1 अरब डॉलर का ऑफर देगा. सूत्रों के मुताबिक, सऊदी रक्षा मंत्री यह रकम अपने साथ 'हरक्यूलिस' सैन्य परिवहन विमान में लेकर तेहरान पहुंचे थे. हालांकि, सऊदी अरब के किसी भी अधिकारी ने इस तरह के लेन-देन की पुष्टि नहीं की है. 

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यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब हूती लगातार सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं. सऊदी रक्षा मंत्री का यह दौरा मक्का रक्षा समझौते में सऊदी अरब के साझेदारों ने आयोजित किया था. बातचीत में तुर्की के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कलिन और पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी शामिल हैं.

इस समझौते के बावजूद पाकिस्तान, तुर्की सऊदी अरब को कोई ठोस मदद नहीं दे पाए हैं. उन्होंने सिर्फ अपने सैन्य सलाहाकर भेजे और कोई अतिरिक्त सैन्य बल नहीं भेजा. हालांकि मक्का समझौते में यह प्रावधान है कि अगर किसी सदस्य देश पर हमला होता है तो बाकी सदस्य देश उसे सैन्य सहायता देंगे. 

ईरान ने की मध्यस्थता की पेशकश

ईरान ने सऊदी और हूतियों के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की है. सऊदी विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में आधिकारिक बयान में साफ कहा है कि रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान और मक्का संयुक्त रक्षा गठबंधन के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों की ईरान यात्रा का मकसद क्षेत्र में जारी तनाव को कम करना है. हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने अब तक इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि कोई धनराशि ट्रांसफर की गई या नहीं.

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वहीं, अधिकारी ने हताया कि हूतियों के साथ विवाद की एक वजह तीन साल पहले समझौतों को लागू करने से भी जुड़ी है. इन समझौतों के तहत सऊदी अरब को हूतियों को सीधे आर्थिक मदद देनी थी. इस पैसे का इस्तेमाल हूतियों के कब्जे वाले इलाकों में सरकारी कर्मचारियों को वेदन देने और नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे को दोबारा बनाने के लिए किया जाना था. इसके बदले हूतियों से उम्मीद थी कि वे युद्धविराम का पालन करेंगे और सऊदी अरब पर हमले बंद कर दें.

हाल के महीनों में, हूतियों ने यह दावा करते हुए अपने हमलों को सही ठहराया है कि सऊदी अरब उन सहमतियों से मुकरा है. फिर भी, अमेरिका के साथ चल रहे अपने संघर्ष के तहत, ईरान स्पष्ट रूप से मौजूदा तनाव को बढ़ाने के पीछे है. वह हूतियों को हथियार मुहैया करा रहा है और अन्य तरीकों से उनका समर्थन कर रहा है.

इसलिए, तेहरान में हुई यह बैठक सऊदी अरब के लिए एक 'जनसंपर्क' (PR) संबंधी झटका भी है. यह संकेत देता है कि वे तेल निर्यात को पूरी तरह से बहाल करने के लिए, कम से कम समय में, कुछ रियायतें देने को तैयार हैं.

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