यूक्रेन युद्ध का विरोध करने की सजा... रूसी नेता को 11 साल की जेल, चुनाव लड़ने पर भी लगा बैन

मॉस्को की अदालत ने विपक्षी नेता लेव श्लोसबर्ग को यूक्रेन युद्ध का विरोध करने के आरोप में 11 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई है.

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: रूस के सीमावर्ती इलाकों में यूक्रेन के ड्रोन हमले से हुआ नुकसान. (File Photo) : रूस के सीमावर्ती इलाकों में यूक्रेन के ड्रोन हमले से हुआ नुकसान. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:16 PM IST

मॉस्को में एक रूसी अदालत ने यूक्रेन युद्ध का विरोध करने वाले प्रमुख विपक्षी नेता लेव श्लोसबर्ग को दोषी करार देते हुए 11 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई है. रूस में अगले महीने होने वाले संसदीय चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के बीच यह फैसला सामने आया है.

लेव श्लोसबर्ग विपक्षी याब्लोको पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने रूस के यूक्रेन पर हमले और युद्ध को लेकर सार्वजनिक रूप से विरोध जताया था. फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से क्रेमलिन युद्ध की आलोचना करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार कार्रवाई करता रहा है. याब्लोको रूस की एकमात्र आधिकारिक राजनीतिक पार्टी है, जो खुलकर यूक्रेन युद्ध का विरोध करती है.

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श्लोसबर्ग के खिलाफ पिछले दो वर्षों में यह दूसरा मुकदमा था. सोमवार को अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 11 साल और एक महीने की जेल की सजा सुनाई.

चुनाव भी नहीं लड़ पाएगी याब्लोको पार्टी

श्लोसबर्ग को सजा सुनाए जाने के साथ ही उनकी पार्टी को भी बड़ा झटका लगा है. रूस के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपने उस पुराने फैसले को बरकरार रखा, जिसके तहत याब्लोको पार्टी को आगामी संसदीय चुनाव में उम्मीदवार उतारने से रोक दिया गया है.

पार्टी ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील खारिज कर दी. रूस में 18 से 20 सितंबर तक संसदीय चुनाव होने हैं. ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्टी का बैलेट से बाहर होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

श्लोसबर्ग के खिलाफ कार्रवाई और याब्लोको को चुनाव लड़ने से रोकने के फैसले को रूस में यूक्रेन युद्ध के खिलाफ उठने वाली राजनीतिक आवाजों पर बढ़ती सख्ती के तौर पर देखा जा रहा है. रूस-यूक्रेन युद्ध अब अपने पांचवें साल में पहुंच चुका है और इस दौरान रूसी प्रशासन ने युद्ध की आलोचना करने वाले कई नेताओं, कार्यकर्ताओं और अन्य असहमति जताने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है.

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