पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी जनआंदोलन को कुचलने के लिए इस्लामाबाद ने बेहद अमानवीय रास्ता चुना है. क्षेत्र में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी हुक्मरानों ने पीओके की नाकाबंदी कर वहां भोजन (खाना), राशन, डीजल-पेट्रोल और जरूरी दवाओं की एंट्री पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है. इस घेराबंदी के कारण मुजफ्फरनगर, पुंछ, रावलाकोट, बाग और सुदूर नीलम घाटी जैसे संवेदनशील इलाकों में खाद्यान्न और रसद का भयंकर संकट पैदा हो गया है.
स्थानीय मीडिया ने आसपास रहने वाले लोगों, ट्रक ड्राइवरों और विपक्षी नेताओं ने हवाले से बताया कि जरूरी सामान ले जाने वाले वाहनों को इलाके में घुसने से रोका जा रहा है, जिससे जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में पूरे इलाके में चल रहे शटडाउन के कारण पहले से ही हो रही कमी और भी गंभीर हो गई है. हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने ऐसी किसी भी तरह की नाकेबंदी लागू होने की बात से इनकार कर दिया है, लेकिन BBC उर्दू, डॉन और अन्य इंटरनेशनल न्यूज एजेंसी की रिपोर्टें इस गैर-कानूनी रूप से कब्जे वाले इलाके में गहराते संकट की ओर इशारा कर रही हैं.
'सीमा चौकियों पर रोके सामान से लदे ट्रक'
स्थानीय मीडिया ने दावा किया कि पीओके में दवाओं और राशन की भारी कमी होने के बाद जब स्थानीय नागरिकों ने पड़ोसी खैबर पख्तूनख्वा, रावलपिंडी और इस्लामाबाद जाकर खुद सामान खरीद कर ला रहे हैं. तो ऐसे लोगों को सीमा चौकियों पर रोका जा रहा है. आजाद पट्टन और फगवारी में तैनात पंजाब पुलिस के जवान राशन और दवाओं से लदे व्यावसायिक ट्रकों और निजी वाहनों को आगे नहीं जाने दे रहे हैं, जिससे दर्जनों गाड़ियां हफ्तों से खड़ी हैं और सब्जियां जैसी खराब होने वाली चीजें सड़ रही हैं.
'सामान फेंकोगे तभी मिलेगी एंट्री'
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, नवीद नाम के एक स्थानीय नागरिक ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि आजाद पट्टन के पास पुलिस ने उसकी गाड़ी रोक ली. उसने पुलिसवालों से बहुत मिन्नतें कीं कि घर में भुखमरी के हालात हैं और पत्नी गर्भवती है, इसलिए रावलपिंडी से खरीदा खाना और दवा ले जाने दी जाए. लेकिन पुलिसकर्मियों ने साफ कह दिया कि यदि सामान अपने हाथों से फेंक दोगे, तभी आगे जाने दिया जाएगा, अन्यथा वापस लौट जाओ.
नीलम घाटी के रहने वाले अलिफ दीन ने बताया कि जब से ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी की हड़ताल और पाकिस्तान की नाकेबंदी शुरू हुई है, तब से लोगों को सरकारी डिपो से राशन तक नहीं मिल पा रहा है. अलिफ दीन पिछले 15 दिनों से सरकारी डिपो में पैसे जमा करके रोजाना चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक आटा नहीं दिया गया है. खुले बाजार में जो थोड़ा-बहुत आटा बचा है, उसकी कीमतें आसमान छू रही हैं.
'दो हफ्तों से बंद हैं मेडिकल स्टोर'
समाचार एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, मुजफ्फरनगर के रहने वाले 64 वर्षीय मोहम्मद मकीन ने बताया कि वो अपने इलाज के लिए हर जगह दवाइयां ढूंढ रहे हैं, लेकिन पूरे इलाके में दवा नहीं मिल रही है. क्षेत्र के सभी बड़े मेडिकल स्टोर और फार्मेसी पिछले दो हफ्तों से लगातार बंद पड़े हैं. पुंछ और मुजफ्फरनगर के पेट्रोल पंपों पर ताले लटके हैं, जिससे मजबूर होकर लोगों को ब्लैक मार्केट से महंगा ईंधन खरीदना पड़ रहा है.
उधर, पाकिस्तानी अधिकारी और पुलिस प्रमुख भले ही नाकेबंदी के आरोपों से साफ इनकार कर दिया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स ने इस्लामाबाद की पोल खोल दी है. 'डॉन' अखबार ने एक अनाम अधिकारी के हवाले से पुष्टि की है कि सरकार ने बिना बल प्रयोग किए रावलाकोट में चल रहे धरने को समाप्त करने के लिए प्रदर्शनकारियों तक पहुंचने वाले खाना और रसद की सप्लाई लाइन को ही काटने की सोची-समझी रणनीति अपनाई है.
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन
दरअसल, इस पूरे भारी विवाद की जड़ पीओके की विधायी विधानसभा में जम्मू-कश्मीर के शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटें हैं. स्थानीय नागरिक समूहों का आरोप है कि इस्लामाबाद इन सीटों का दुरुपयोग करके यहां के चुनावों को प्रभावित करता है और अपनी कठपुतली सरकारें स्थापित करता है. इसी राजनीतिक दखलंदाजी के खिलाफ स्थानीय अवाम ने जेएएसी के बैनर तले बड़ा आंदोलन छेड़ रखा है, जिसे दबाने के लिए इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है. प्रदर्शन के दौरान हुई झड़पों में कम से कम 58 लोगों की मौत हो चुकी है.
पाकिस्तान की बड़ी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) की पीओके यूनिट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके इस कार्रवाई की तीखी निंदा की है. पार्टी ने आरोप लगाया कि आजाद पट्टन मार्ग पर यात्रियों को रोककर उनसे पीने का पानी, खाना और जरूरी दवाएं छीनी जा रही हैं. पीटीआई ने सरकार के इस कदम को 'फिरौनी दमन का सबसे घटिया उदाहरण' करार दिया है.
आंदोलन से जुड़े 70 हजार लोग
पाकिस्तानी सरकार की इस क्रूर आर्थिक घेराबंदी के बावजूद अवाम का ये आंदोलन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. रावलाकोट के ईदगाह मैदान में चल रहे विशाल धरने में पिछले दो हफ्तों के अंदर 70,000 से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं. जेएएसी के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह रावलाकोट से प्रशासनिक राजधानी मुजफ्फरनगर तक 1,00,000 लोगों का एक विशाल मार्च निकालेंगे.
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