नेपाल में बाढ़ के बीच करिश्मा... रसुवा में 3 दिनों तक मलबे के नीचे दबी रही 6 साल की बच्ची, रोने की आवाज सुन पुलिस ने बचाया'

नेपाल के रसुवा जिले के टिमुरे में भोटेकोशी बाढ़ के मलबे में दबी 6 साल की बच्ची को सशस्त्र पुलिस बल ने तीन दिन बाद शुक्रवार शाम जिंदा बाहर निकाला. बचाव दल को मिट्टी के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी थी, जिसके बाद तुरंत तलाश शुरू की गई.

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रसुवा के टिमुरे में मलबे में दबी थी बच्ची (Photo: Nepali armed force) रसुवा के टिमुरे में मलबे में दबी थी बच्ची (Photo: Nepali armed force)

पंकज दास

  • काठमांडू, नेपाल,
  • 29 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 11:24 PM IST

नेपाल के रसुवा जिले में एक बड़ी और राहत देने वाली खबर सामने आई है. यहां के टिमुरे इलाके में मिट्टी के नीचे दबी एक 6 साल की बच्ची को तीन दिन बाद जिंदा बाहर निकाल लिया गया है. सशस्त्र पुलिस बल ने शुक्रवार शाम इस बच्ची को सुरक्षित बचाया और आज शनिवार को उसे इलाज के लिए काठमांडू लाया गया है. इस पूरी घटना ने वहां मौजूद लोगों और बचाव दल के जवानों को हैरान कर दिया, क्योंकि तीन दिन बाद भी बच्ची का जीवित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा.

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यह पूरा मामला भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से जुड़ा है. इस बाढ़ के कारण रसुवा जिले के टिमुरे इलाके में भारी तबाही मची थी और कई लोग मलबे में दब गए थे. हादसे के बाद सशस्त्र पुलिस की टीम लगातार वहां फंसे लोगों की तलाश और बचाव अभियान में जुटी हुई थी.

इसी दौरान पुलिस टीम को मिट्टी के नीचे से एक बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी. आवाज सुनते ही पुलिस जवानों ने बिना देर किए खोज अभियान तेज कर दिया और आखिरकार मलबे में दबी बच्ची को ढूंढकर बाहर निकाल लिया.

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बचाव के तुरंत बाद बच्ची को सशस्त्र पुलिस बल नेपाल के सीमा चौकी, टिमुरे लाया गया. यहां जब उसकी हालत की जांच की गई तो पता चला कि उसकी स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है. इसे देखते हुए बेहतर इलाज के लिए शुक्रवार को ही हेलिकॉप्टर से उसे काठमांडू भेजने की कोशिश की गई. लेकिन रात का समय होने और मौसम खराब होने के कारण उस वक्त काठमांडू पहुंचाना संभव नहीं हो पाया.

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इसके बाद आज यानी शनिवार दोपहर में बच्ची को काठमांडू लाया गया, जहां फिलहाल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है. डॉक्टरों की टीम उसकी सेहत पर लगातार नजर बनाए हुए है. तीन दिन तक मलबे के नीचे रहने के बावजूद बच्ची का जिंदा बचना बचाव दल की मेहनत और उसकी हिम्मत दोनों की मिसाल बन गया है.

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