नेपाल आपदा में फंसे लोगों की तलाश कर रही एजेंसियों को एक टनल से 6 और डेड बॉडीज मिली हैं. कुछ ही दिन पहले एक टनल से हादसे के 9 दिन बाद एक व्यक्ति जीवित मिला था. लेकिन इस बार सुरंग में फंसे लोग अनलकी रहे और उनकी मौत हो गई.
शुक्रवार को नेपाल में एक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से छह शव बरामद किए गए. पिछले महीने नेपाल में आए भयानक अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के बाद लापता लोगों की तलाश का काम जारी है; इस बाढ़ में 1,400 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और 6,100 से ज़्यादा लोग लापता हो गए थे.
नेपाल सेना ने बताया कि सुरक्षा बलों की एक संयुक्त टीम ने नुवाकोट ज़िले में अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट साइट पर ऑडिट-3 सुरंग से ये शव बरामद किए.
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ़ और चट्टान के खिसकने (एवलांच) से आई भोटेकोशी अचानक बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों को तबाह कर दिया था. गुरुवार तक इस घटना में कम से कम 1,410 लोगों की मौत हो चुकी थी और 6,145 लोग लापता थे.
खोज और बचाव टीमों ने अब तक अलग-अलग प्रभावित इलाकों से 13,756 से ज़्यादा लोगों को बचाया है.
अपर त्रिशूली-1 में मिले ये शव सुरंग में कंक्रीट के काम के लिए तैयार की गई स्टील की जाली में फंसे हुए मिले. नेपाल सेना मुख्यालय के अनुसार, उन्हें निकालने के लिए टीम ने ग्राइंडर, गैस कटर और रोटरी रेस्क्यू इक्विपमेंट का इस्तेमाल किया.
खोज अभियान जारी है क्योंकि बचावकर्मियों को शक है कि टनल के अंदर कीचड़ के नीचे और भी शव दबे हो सकते हैं.
इससे पहले 4 सितंबर 2026 को सुरंग में फंसे संजय शाह और कबीर महर्जन को घटना के 9 दिन बाद जिंदा बाहर निकाला गया था.
इससे पहले विदेशी टेक्नीशियनों वाली एक संयुक्त टीम लापता कर्मचारियों की तलाश के लिए प्रोजेक्ट की मुख्य एक्सेस टनल में लगभग 400 मीटर अंदर गई थी.
रसुवागढ़ी, रसुवा भोटेकोशी, लांगटांग, त्रिशूली-3A और अपर त्रिशूली-3B समेत कई अन्य हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर भी खोज अभियान चल रहे हैं.
बुधवार को भी मिले 5 शव
इससे पहले चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में बुधवार को एक सुरंग से पांच शव निकाले गए. भारतीय और नेपाली बचाव टीमों ने ज़मीन के नीचे बने पावरहाउस तक पहुंचने के लिए कीचड़ और मलबे को हटाया था. यहां कोई भी जीवित नहीं मिला.
इस बीच मकावानपुर ज़िला प्रशासन कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी संतोष सुबेदी के अनुसार, हेटौडा को काठमांडू से जोड़ने वाले दो मुख्य रास्तों - त्रिभुवन और कांति हाईवे - पर शुक्रवार से दोनों तरफ़ गाड़ियों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई.
यह कदम धाडिंग ज़िले में पृथ्वी हाईवे के कृष्णभीर सेक्शन पर ट्रैफ़िक बहाल होने के बाद उठाया गया है; 26 अगस्त को आई बाढ़ के कारण सड़क धंसने से यहां रास्ता बंद हो गया था.
त्रिभुवन हाईवे हेटौडा को पालुंग-नौबिसे होते हुए काठमांडू से जोड़ता है, जबकि कांति हाईवे इन दोनों शहरों को टीकाभैरव-ललितपुर होते हुए जोड़ता है.
पृथ्वी हाईवे पर रुकावट के बाद ट्रैफ़िक को आसान और सुरक्षित बनाने के मकसद से, 1 सितंबर से माल ढोने वाली गाड़ियों और बड़ी गाड़ियों के लिए काठमांडू जाने के लिए त्रिभुवन हाईवे और लौटते समय कांति हाईवे का इस्तेमाल करने की व्यवस्था लागू की गई थी.
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