नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने कई परिवारों को तबाह कर दिया. कई परिवार अपनों के लौटने की उम्मीद में दिन-रात इंतजार कर रहे हैं. लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है वे अपनी उम्मीद भी छोड़ने को मजबूर हैं.
जिन लोगों के शव नहीं मिले उनके परिजन उम्मीद कर रहे थे कि उनके अपनों की सलामती की खबर आएगी. लेकिन एक हफ्ते तक परिजनों का कोई पता नहीं चलने के कारण अब उनकी उम्मीद छूट रही है. जिन अपनों के शव अब तक नहीं मिले हैं, उनके लिए परिवारों ने कुश की घास से प्रतीकात्मक शव बनाया. और इन्हीं प्रतीकात्मक शवों को अपना मानकर बुधवार को पशुपति आर्यघाट पर कई परिवारों ने सामूहिक अंतिम संस्कार किया.
आर्यघाट पर मौजूद हर परिवार की आंखों में अपने परिजनों को खोने का दर्द था. कोई अपने पति के लौटने का इंतजार कर रहा था, किसी को अपने बेटे का इंतजार था, किसी को भाई का, तो किसी को अपने माता-पिता का. लेकिन जब अब तक अपनों के कोई निशान नहीं मिले, तो परिवारों की उम्मीद टूटने लगी और उन्होंने कुश की घास से प्रतीकात्मक शव बनाकर अपने परिजनों को मुखाग्नि दी.
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जब प्रतीकात्मक शवों का अंतिम संस्कार किया गया तो वहां मौजूद लोगों की आंखें छलक आई. जिन्हें वे आखिरी बार देख भी न पाएं, उन्हें आखिरी विदाई देते समय वे भावुक हो गए. नेपाल की बाढ़ ने न सिर्फ इमारतों को उजाड़ा, बल्कि कई परिवारों से उनके अपने भी छीन लिए.
रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा और चितवन जिलों में करीब 7,570 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें से 1,253 घर पूरी तरह ढह गए हैं. घरों को हुए नुकसान का अनुमान करीब 17 अरब रुपये लगाया गया है, वहीं बाढ़ में सड़कें, पुल और पेयजल व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे कुल नुकसान अरबों रुपये तक पहुंच गया है.
शहरी विकास एवं भवन निर्माण विभाग की टीम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया है. विभाग के मुताबिक कुल 7,570 घरों में से 6,317 घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए और 1,253 घर पूरी तरह तबाह हो गए, जिन्हें अब दोबारा बनाना ही पड़ेगा. सिर्फ घरों का नुकसान करीब 17 अरब रुपये आंका गया है. इसके अलावा 45 सरकारी इमारतें भी क्षतिग्रस्त हुईं, जिनका नुकसान करीब 4 अरब 50 करोड़ रुपये बताया गया है. विभाग का कहना है कि विस्तृत आकलन अभी जारी है.
पंकज दास