नेपाल में तबाही के 13 दिन: 1340 से ज्यादा मौतें, 5000 लापता... आज पूरे देश में राष्ट्रीय शोक

नेपाल में फ्लैश फ्लड के 13वें दिन पूरे देश में राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है और राष्ट्रध्वज आधा झुका दिया गया है. इस आपदा में 1,340 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 5,000 लापता लोगों की तलाश मलबे और सुरंगों में लगातार जारी है.

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मलबे के ढेर में अपनों की तलाश करते नेपाली सेना के जवान. (Photo: REUTERS/Adnan Abidi) मलबे के ढेर में अपनों की तलाश करते नेपाली सेना के जवान. (Photo: REUTERS/Adnan Abidi)

aajtak.in

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  • 07 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:57 AM IST

नेपाल में उस तबाही को सोमवार 13 दिन हो गए, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी. 26 अगस्त को आई फ्लैश फ्लड में अब तक 1,340 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. करीब 5,000 लोग अभी भी लापता हैं. इस बीच सोमवार को पूरे नेपाल में राष्ट्रीय शोक मनाया जा रहा है और देशभर में मृतकों को श्रद्धांजलि दी जा रही है.

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सरकार ने 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक का दिन घोषित किया है. सरकारी दफ्तरों से लेकर विदेशों में मौजूद नेपाली दूतावासों तक राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. यह दिन बाढ़ के 13वें दिन रखा गया है. हिंदू परंपरा में किसी की मौत के बाद 13वां दिन शोक से जुड़ा अहम समय माना जाता है. इसी वजह से नेपाल ने इस दिन अपने लोगों को याद करने का फैसला किया.

26 अगस्त को चीन की सीमा से लगे रसुवा इलाके में ऊंचे हिमालय पर बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद अचानक फ्लैश फ्लड आई. इसका असर रसुवा के साथ नुवाकोट, धादिंग समेत कई इलाकों में पड़ा. भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के आसपास बाढ़ ने भारी तबाही मचाई. इसके चलते, कई घर बह गए, सड़कें टूट गईं, पुल क्षतिग्रस्त हुए. हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, सरकारी इमारतें समेत जरूरी बुनियादी ढांचा भी बुरी तरह प्रभावित हुआ. इस आपदा से कम से कम 32 हजार परिवार विस्थापित हुए हैं. करीब 7,500 घर पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं.

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5 हजार लोग अब भी लापता

सबसे बड़ी चिंता उन 5,000 लोगों को लेकर है, जिनका अब तक पता नहीं चल पाया है. इनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. राहत की टीमों का काम अभी खत्म नहीं हुआ है. कई जगहों के मलबे में तलाश चल रही है. इसके अलावा, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है. नेपाली सुरक्षा बलों के साथ दूसरे देशों से आई विशेषज्ञ टीमें भी इस काम में जुटी हैं. साथ ही भारत की विशेषज्ञ टीम भी ऐसे इलाकों में बचाव की कोशिश कर रही है.

'एक नहीं, कई रेस्क्यू एक साथ'

उत्तराखंड के सिल्क्यारा सुरंग हादसे में 41 मजदूरों को सुरक्षित निकालने वाले प्रोफेसर अर्नोल्ड डिक्स ने नेपाल के बचाव अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि नेपाल में इस समय एक नहीं, बल्कि अलग-अलग जगहों पर कई संभावित रेस्क्यू एक साथ चल रहे हैं. हर जगह खतरे अलग हैं, इसलिए हर अभियान अपने आप में चुनौती है.

डिक्स ने सिल्क्यारा का जिक्र करते हुए कहा कि उस अभियान ने उन्हें सिखाया कि मुश्किल काम को नामुमकिन नहीं समझना चाहिए. नेपाल में भी कई जिंदगियां बचाने की कोशिश जारी है. उनके मुताबिक ऐसे समय में उम्मीद को सिर्फ भावना नहीं, बल्कि लगातार काम में बदलना जरूरी है.

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मंगलवार को रहेगा सार्वजनिक अवकाश

सोमवार को नेपाल में बाढ़ में जान गंवाने वालों को याद किया जा रहा है. इसके अगले दिन यानी 8 सितंबर को देश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा. यह छुट्टी 'जेन जी शहीद दिवस' के मौके पर रखी गई है.

दरअसल, पिछले साल इसी तारीख को काठमांडू में Gen Z के नेतृत्व में प्रदर्शन शुरू हुए थे. आंदोलन के दौरान सुरक्षा बलों की गोलीबारी में 72 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद तत्कालीन सरकार संकट में आ गई थी. एक साल बाद नेपाल के सामने एक साथ दो अलग-अलग घटनाओं की याद है, एक तरफ बाढ़ में जान गंवाने वालों का शोक, दूसरी तरफ पिछले साल के आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि.
 

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