फ्रेंडशिप ब्रिज... सिर्फ निशान बाकी, दो तस्वीरों से समझें विनाश की कहानी

बुधवार को तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ ने मध्य नेपाल के ज़िलों में तबाही मचा दी. इस घटना में कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई और 133 भारतीयों समेत लगभग 500 लोग लापता हैं. बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों को नुकसान पहुंचाया, पुल बहा दिए.

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नेपाल-चीन ब्रिज पर अब नाममात्र का ही बचा है (Photo: ITG) नेपाल-चीन ब्रिज पर अब नाममात्र का ही बचा है (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:09 PM IST

नेपाल-चीन के बॉर्डर पर बना फ्रेंडशिप ब्रिज अब गायब है. चारों तरफ मलबा ही मलबा है. टूटी सड़कें हैं और तबाही के निशान हैं. कुछ ही घंटे पहले इस रास्ते पर गहमागहमी थी. इसी रास्ते से होकर लोग कैलाश मानसरोवर जाते थे. नेपाल-चीन सीमा पर स्थित रसुवागढ़ी की यह तस्वीर तबाही की गवाही दे रही है. बुधवार को भोटे कोशी में आई अचानक बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद यही जगह पहचान में नहीं आ रही. 

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पहले की तस्वीरों में रसुवागढ़ी एक व्यवस्थित बॉर्डर ट्रेड प्वाइंट नजर आता था. नदी अपने तय रास्ते में बहती थी. उसके ऊपर बना पुल दोनों देशों को जोड़ता था और आसपास कस्टम ऑफिस, सड़कें, इमारतें और कारोबार से जुड़ी गतिविधियां चलती थीं. चीन से नेपाल आने-जाने वाले सामान और वाहनों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण रास्ता था. 

2025 की बाढ़ में मूल मितेरी यानी फ्रेंडशिप ब्रिज बह गया था, जिसके बाद अस्थायी पुल के जरिए सीमा संपर्क बहाल करने की कोशिश की गई थी. जनवरी 2026 तक वहां पुल के जरिए चीनी सामान की आवाजाही फिर शुरू हो चुकी थी. 

लेकिन आज की तस्वीर उस पुराने सामान्य जीवन से बिल्कुल अलग है.

जहां पहले नदी का पानी एक निश्चित चैनल में बहता दिखाई देता था, वहां अब मटमैला पानी, पत्थर, चट्टान और पहाड़ से आया मलबा फैला हुआ है. नदी का पूरा तल जैसे कई गुना चौड़ा हो गया हो. पानी में मिट्टी इतनी ज्यादा घुली है कि भोटे कोशी का साफ पहाड़ी नदी वाला रूप पूरी तरह गायब हो चुका है.

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यह भी पढ़ें: नेपाल बॉर्डर पर देखते ही देखते बहा फ्रेंडशिप ब्रिज, चीन से गरजते-बरसते आई मौत की धारा, Video

तस्वीर में बाईं तरफ बॉर्डर से जुड़ा बड़ा परिसर दिखाई देता है. उसके आसपास की सड़कें और नदी किनारे का इलाका अब मलबे से घिरा है. दाईं ओर पहाड़ से नीचे आया मलबा साफ दिखाई देता है. ऐसा लगता है जैसे किसी ने पहाड़ का एक हिस्सा काटकर नदी में उड़ेल दिया हो.

सबसे डरावनी बात यह है कि यह सिर्फ पानी की बाढ़ नहीं थी. शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक ऊपरी इलाके में बर्फ और चट्टान का बड़ा हिस्सा ल्हेंदे नदी में गिरा, जिससे नदी का रास्ता बाधित हुआ और फिर अचानक पानी और मलबे का जबरदस्त प्रवाह नीचे की ओर आया. 

बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद फ्रेंडशिप ब्रिज की तस्वीर.

इसका असर सिर्फ इस बॉर्डर प्वाइंट तक सीमित नहीं रहा. रसुवागढ़ी से आगे भोटे कोशी के किनारे बसे तिमुरे और स्याफ्रुबेसी जैसे इलाकों में घर, सड़कें, पुल और दूसरी आधारभूत संरचनाएं जैसे पावर प्रोजेक्ट बुरी तरह प्रभावित हुईं. रिपोर्टों के मुताबिक बेट्रावती से रसुवागढ़ी तक करीब 42 किलोमीटर सड़क भी बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गई. 

95 लोगों की मौत, 500 लापता

बुधवार को तिब्बत से शुरू हुई अचानक आई ज़बरदस्त बाढ़ ने मध्य नेपाल के ज़िलों में भारी तबाही मचाई हैं. इस बाढ़ में कम से कम 95 लोगों की मौत हो गई और 133 भारतीयों समेत लगभग 500 लोग लापता हैं.  बाढ़ ने कई कस्बों और गांवों को नुकसान पहुंचाया, पुल बहा दिए और कम से कम एक दर्जन पनबिजली परियोजनाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया.

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अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 9 बजे (स्थानीय समय) भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेज़ी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से सटे रसुवा और धाडिंग ज़िले प्रभावित हुए. तिब्बत सीमा के पास स्थित रसुवा, काठमांडू से लगभग 125 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है.

इसके बाद बाढ़ का पानी नुवाकोट और चितवन ज़िलों तक फैल गया, जिससे कम से कम चार पक्के पुल और कुछ अस्थायी पुल क्षतिग्रस्त हो गए. 

सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण पर आधारित शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार यह अचानक आई बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास (तिब्बत-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र से 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में) पहाड़ की अस्थिर चट्टानों के खिसकने से हुए बर्फ के हिमस्खलन के कारण आई थी.

नेपाल के 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी'ने बताया कि चट्टान खिसकने और नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण भोटे कोशी नदी से होते हुए बाढ़ का पानी त्रिशूली नदी में जा पहुंचा. 

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