मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को देखते हुए सऊदी अरब बहुत सतर्क हो गया है. पूरे क्षेत्र को एक और महायुद्ध से बचाने के लिए सऊदी अरब ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. इसी कड़ी में सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है.
सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे.
सऊदी विश्लेषक अब्दुलअजीज अलघाशियान ने बताया कि, सऊदी नेतृत्व को डर है कि युद्धविराम शायद ज्यादा दिन न टिके. अमेरिका और ईरान के बीच फिर से हमला और पलटवार का दौर शुरू हो सकता है. इसी खतरे को देखते हुए क्राउन प्रिंस ने खुद पहल की है. सऊदी अरब पूरी दुनिया को यह संदेश देना चाहता है कि वह क्षेत्र में तनाव बिल्कुल नहीं चाहता.
दरअसल, सऊदी अरब का सत्ताधारी वर्ग जानता है कि युद्ध भड़कने की पूरी आशंका है. लेकिन वे हर हाल में इस बढ़ते तनाव पर ब्रेक लगाना चाहते हैं. सऊदी चाहता है कि खाड़ी देश और उसकी अपनी सुरक्षा उसके अपने नियंत्रण में रहे. अगर क्षेत्र में जंग छिड़ती है, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान सऊदी अरब के व्यापार और सुरक्षा को होगा.
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सऊदी ने व्हाइट हाउस भेजा अपना खास दूत
सऊदी अरब डोनाल्ड ट्रंप के बिन-भरोसे वाले रवैये को अच्छी तरह समझता है. इसके बावजूद उसने ट्रंप के ईगो को साधने की कोशिश की है. इसी रणनीति के तहत क्राउन प्रिंस ने अपने रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान को खास दूत बनाकर व्हाइट हाउस भेजा.
सऊदी की इस कूटनीतिक चाल का मकसद डोनाल्ड ट्रंप को यह महसूस कराना है कि वे ही मिडिल ईस्ट को तबाही से बचा सकते हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि सऊदी की यह कोशिश रंग लाती है या नहीं.
बता दें कि मिडिल-ईस्ट की जंग रोकने के लिए सऊदी अरब के साथ-साथ कतर, UAE, तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश भी अमेरिका और ईरान दबाव बना रहे हैं. शनिवार को कतर ने ईरानी विदेश मंत्री, व्हाइट हाउस के दूत स्टीव विटकॉफ और ओमान के अधिकारियों से अलग-अलग बातचीत की, ताकि होर्मुज को फिर से खोलने पर सहमति बन सके.
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