इजरायल में कल चुनाव, नेतन्याहू को तनाव... क्या वोटिंग में टर्निंग पॉइंट बनेंगी ये तीन घटनाएं

इजरायल में चुनाव से पहले नेतन्याहू के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है. डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन मिलने के बाद भी उनकी राह आसान नहीं दिख रही. इस चुनाव में तीन ऐसे मुद्दे हैं, जो नतीजों के साथ सत्ता का पूरा समीकरण बदल सकते हैं.

Advertisement
इजरायल चुनाव से पहले नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं का होर्डिंग. (Photo: AP) इजरायल चुनाव से पहले नेतन्याहू और विपक्षी नेताओं का होर्डिंग. (Photo: AP)

आजतक ब्यूरो

  • नई दिल्ली,
  • 26 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:42 PM IST

इजरायल में मंगलवार, 27 अक्टूबर को आम चुनाव के लिए वोटिंग होगी. इस चुनाव में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता दांव पर है. गाजा युद्ध, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद सुरक्षा में हुई चूक और ईरान के साथ टकराव के बीच जनता का फैसला उनके राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा.

नेतन्याहू की लिकुड पार्टी के सामने गादी आइजेनकोट की याशार पार्टी समेत विपक्षी दल चुनौती पेश कर रहे हैं. चुनाव से ठीक पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू का खुलकर समर्थन किया है. इसके बावजूद सर्वे में किसी भी खेमे को सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटें मिलती साफ नहीं दिख रहीं. ऐसे में इस चुनाव में तीन बड़े मुद्दे अहम हो गए हैं. 

Advertisement

इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. यहां वोटर प्रधानमंत्री को सीधे नहीं चुनते, बल्कि पार्टी की सूची के पक्ष में वोट डालते हैं. किसी पार्टी को संसद में सीट पाने के लिए कम से कम 3.25 फीसदी वोट हासिल करने होते हैं. सरकार बनाने के लिए 61 सीटों का समर्थन जरूरी है. यही वजह है कि चुनाव में सीटों की संख्या के साथ यह भी अहम होगा कि कौन किसके साथ मिलकर सरकार बना सकता है. 

पहला टर्निंग पॉइंट: 7 अक्टूबर का हमला और सुरक्षा में चूक

यह इजरायल का पहला आम चुनाव है, जो 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद हो रहा है. उस हमले में इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे. अब चुनाव में नेतन्याहू से पूछा जा रहा है कि इतना बड़ा हमला कैसे हुआ और इसके लिए जवाबदेही किसकी होनी चाहिए.

Advertisement

गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई भी इस पूरे घटनाक्रम का हिस्सा है. हालांकि, चुनावी बहस में सबसे अहम सवालों में से एक यह है कि देश को सुरक्षित रखने में हुई चूक की जिम्मेदारी कौन लेगा. नेतन्याहू के विरोधी इस मुद्दे पर जवाब मांग रहे हैं, जबकि उनके समर्थक सुरक्षा के मोर्चे पर उनके अनुभव को अहम बताते हैं. 

दूसरा टर्निंग पॉइंट: ईरान का खतरा, AI तस्वीर से दिया संदेश

वोटिंग से ठीक पहले नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया. इसमें ईरान से परमाणु खतरे की चेतावनी दी गई. पोस्ट के साथ AI से बनाई गई एक तस्वीर भी थी, जिसमें तेल अवीव के ऊपर परमाणु विस्फोट जैसा मशरूम क्लाउड दिखाया गया था.

इस पोस्ट के जरिए नेतन्याहू ने वोटरों का ध्यान ईरान के खतरे पर केंद्रित करने की कोशिश की. उनका तर्क है कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई को आगे बढ़ाना जरूरी है. वह भ्रष्टाचार के मामलों, देश में विरोध प्रदर्शनों और अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स यहूदी समुदाय की सैन्य भर्ती से जुड़े विवादों को इस खतरे के मुकाबले कम अहम बताने की कोशिश कर रहे हैं. उनके आलोचक इस रणनीति पर सवाल उठा रहे हैं. 

तीसरा टर्निंग पॉइंट: ट्रंप का समर्थन, लेकिन सत्ता की राह आसान नहीं

चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल के लोगों से नेतन्याहू को वोट देने की अपील की. उन्होंने नेतन्याहू को "उत्कृष्ट योद्धा प्रधानमंत्री" बताया. ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ शुरू किए गए काम को पूरा करना जरूरी है. नेतन्याहू ने इस समर्थन को अपनी ताकत के तौर पर पेश किया है. उनका कहना है कि ट्रंप के साथ मिलकर ईरान के खतरे से निपटने के लिए वह बेहतर स्थिति में हैं. 

Advertisement

हालांकि, चुनाव से पहले के सर्वे नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत से पीछे दिखा रहे हैं. कुछ सर्वे में आइजेनकोट की याशार पार्टी आगे नजर आती है, लेकिन अलग-अलग सर्वे के आंकड़ों में अंतर है. इसलिए किसी एक खेमे की सरकार बनना अभी तय नहीं है. 

इजरायल चुनाव के नतीजे कब आएंगे?

इजरायल में 27 अक्टूबर की रात मतदान खत्म होने के बाद एग्जिट पोल जारी होंगे. शुरुआती रुझान 28 अक्टूबर को सामने आ सकते हैं. चुनाव अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, गिनती के नतीजे 29 अक्टूबर तक सामने आने की उम्मीद है. हालांकि, आधिकारिक नतीजे घोषित करने की अंतिम तारीख 4 नवंबर 2026 है. इसके बाद सरकार बनाने के लिए दलों के बीच समर्थन जुटाने की प्रक्रिया अहम होगी
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »