'ट्रंप का बयान देखा, अब मध्यस्थों के जवाब का इंतजार...', होर्मुज प्रस्ताव पर बोले ईरानी विदेश मंत्री अराघची

होर्मुज को फिर खोलने के ईरान के प्रस्ताव पर अब अमेरिका के औपचारिक जवाब का इंतजार है. ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि मध्यस्थों के जरिए अमेरिकी रुख मिलने के बाद ही तेहरान अगला फैसला करेगा. इस बीच होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को लेकर भी चेतावनी सामने आई है.

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ट्रंप के इनकार के बाद मध्यस्थों पर टिकी निगाहें. (File Photo: Reuters) ट्रंप के इनकार के बाद मध्यस्थों पर टिकी निगाहें. (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 5:24 AM IST

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान के 7 दिन वाले प्रस्ताव पर ट्रंप के इनकार के बाद अब तेहरान मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आ चुकी है, लेकिन मध्यस्थों ने अभी तक अमेरिका का अंतिम रुख ईरान तक नहीं पहुंचाया है. उनका कहना है कि इसी जवाब के आधार पर ईरान आगे का फैसला करेगा.

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न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक,  अराघची ने कहा कि होर्मुज खोलने को लेकर ईरान की शर्तें साफ हैं. इन शर्तों के पूरा होने के बाद ही होर्मुज को दोबारा खोलने की दिशा में कोई कदम उठाया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा गतिरोध से निकलने का रास्ता बातचीत के जरिए ही निकल सकता है.

मध्यस्थों के जवाब के बाद लेंगे फैसला

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अराघची ने कहा कि 'ईरान अब मध्यस्थों के जरिए अमेरिका के औपचारिक जवाब का इंतजार कर रहा है'. उनका कहना है कि जवाब मिलने के बाद ही तेहरान इस पर अपना अगला फैसला करेगा. यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप पहले ही ईरान के 7 दिन वाले प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं. लेकिन ईरान अब भी मध्यस्थों के जरिए मिलने वाले औपचारिक जवाब को अहम मान रहा है.

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यह भी पढ़ें: 'शर्तें मंजूर नहीं...', ट्रंप ने खारिज किया ईरान का प्लान, अब फिर होगी बमबारी?

ईरान ने 7 दिन में क्या करने का प्रस्ताव दिया था?

ईरान ने अमेरिका के सामने 7 दिन का एक प्लान रखा था. इसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू करने की बात कही गई थी. बदले में ईरान ने अमेरिका से ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने की मांग की थी. लेबनान को शामिल करते हुए युद्ध रोकने की शर्त भी रखी गई थी.

अराघची ने कहा था कि अमेरिका इन कदमों को चार से पांच दिन में पूरा कर सकता था. इसके बाद छठे दिन होर्मुज खोलने की बात थी. सातवें दिन परमाणु मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू की जा सकती थी.

दूसरी तरफ, ट्रंप ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप को भरोसा नहीं है कि ईरान उनकी मांगें पूरी करेगा. साथ ही नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा बमबारी की संभावना भी सामने आई है. हालांकि, हमले का स्तर क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है.

जहाजों के रूट पर भी चेतावनी

इसी बीच PGSA (Persian Gulf Strait Authority) ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को लेकर चेतावनी जारी की है. संगठन के मुताबिक, उसे ऐसी रिपोर्ट मिली हैं कि कुछ चार्टरर्स जहाजों को अमान्य रूट से गुजरने के लिए मजबूर कर रहे हैं. PGSA ने कहा कि इससे जहाज, उसके मालिक, जहाज के कप्तान और क्रू के लिए आर्थिक नुकसान के साथ जान का खतरा भी पैदा हो सकता है. इससे भविष्य में इन जहाजों के लिए होर्मुज से गुजरना भी मुश्किल हो सकता है.

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